खूबसूरत सेक्रेटरी की जवानी का मजा लूटा

मैं तेजस्वी, उम्र 32 साल। मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता हूँ। रहता हूँ सिटी ऑफ ब्यूटी चंडीगढ़ में—हमारे देश की सबसे खूबसूरत और साफ-सुथरी शहर। यह कहानी उस समय की है जब मेरा पोस्टिंग यहाँ हुआ और मैं इलाहाबाद से यहाँ आया।  office sex kahani

कंपनी की तरफ से मुझे बंगला मिला हुआ था क्योंकि मेरा पोस्ट जनरल मैनेजर का था और मेरा ऑफिस सेक्टर 17 में था। जिस दिन मैंने जॉइन किया, उसी दिन सबने मिलकर मेरे रिसेप्शन में पार्टी दी। सब कोई आकर मिला। कुल 12 लोग काम करते थे इस ऑफिस में—8 आदमी और 4 लड़कियाँ। उनमें से एक मेरी पीएस थी, बाकी तीन ऑफिस असिस्टेंट।

मेरी नजर जब उसकी तरफ पड़ी तो मेरा दिमाग ठनक गया—ये लड़की तो बहुत खूबसूरत है। गेहुँआ रंग, बाल कटे हुए, बिल्कुल अल्ट्रा मॉडर्न। मेरी तरफ देखकर हँस भी रही थी। मैं वैसे थोड़ा जल्दी घुलता-मिलता नहीं हूँ लोगों के साथ, और ये जगह मेरे लिए नई थी, इसलिए मैं चुपचाप सबसे मिला, पार्टी मनाई, ड्रिंक्स लिए, सबके साथ खाना भी खाया।

जब मैं ड्रिंक्स ले रहा था तब मैंने देखा, उस लड़की का नाम था रेवती। वो साउथ इंडिया से थी। वो मेरी ही तरफ देख रही थी। मेरा ग्लास खाली देखकर वो उठी और बोली, “एक्सक्यूज मी सर, मेय आई हेल्प यू?” मैं बोला, “हाँ ज़रूर।” वो मेरे ग्लास में ड्रिंक्स लेकर आई और मेरे हाथ में देने लगी।

अचानक किसी ने पीछे से हल्का सा धक्का दे दिया उसे, और वो मेरी तरफ आकर गिर पड़ी। थोड़ी शराब उछलकर मेरे सूट पर भी लग गई। मैंने उसे अपनी बाहों में पकड़ लिया ताकि वो गिर न जाए। वो मुझे थैंक्स बोली और अपना रुमाल निकालकर मेरे सूट की कॉलर को पोंछने लगी। Office chudai story

उसके बदन से आ रही भिनभिनाती खुशबू मुझे पागल बना रही थी। इस तरह उस दिन पार्टी खत्म हुई। मैं नीचे आया, ड्राइवर को बोला कार पार्किंग से ले आए। मैं एक सिगरेट जलाकर कश ले रहा था कि अचानक वो लड़की मेरे सामने आ गई। “हैलो सर, आप घर जा रहे हैं?”

“हाँ, और आप?”

“मैं भी सर। मैं तो ऑटो से जाऊँगी, बस थोड़ी दूर है यहाँ से। रोज़ ऐसे ही आती-जाती हूँ। ओके सर, बाय। कल ऑफिस में मिलते हैं, आपको सारी फाइल्स वगैरह के बारे में जानकारी दूँगी।”

“ओके।”

वो चली गई। मैं पीछे से उसे देखता रहा। उसकी गांड की लचक मुझे उसकी तरफ देखने पर मजबूर कर रही थी। छोटा स्कर्ट और ब्लाउज़ में उसका बदन बिल्कुल खिलखिलाता हुआ लग रहा था। अगले दिन टाइमली मैं ऑफिस पहुँचा। देखा सब आ गए हैं। मैं सबको विश करते हुए केबिन में पहुँचा। रेवती पहले से ही वहाँ मौजूद थी।

मुझे देखकर मुसकराई और बोली, “गुड मॉर्निंग सर, रात कैसे बीती आपकी? नया शहर जो है।”

मैं बोला, “अच्छा, लेकिन नया है ना, कुछ समय तो लगेगा। जो फाइल दिखानी है दिखाओ।”

वो ओके बोलकर बगल की वार्डरोब से फाइल निकालने लगी। मैंने देखा आज उसने पिंक कलर की झीनी साड़ी पहनी हुई है, लो-कट ब्लाउज़, एक पतली सी सोने की चेन गले में जिसमें मोती का लॉकेट लगा हुआ है। उसकी पेट और नाभि पूरी दिख रही थी।

थोड़ी देर में वो फाइल लेकर मेरे सामने आई। अब मुझे उसके लो-कट ब्लाउज़ में अटके हुए बड़े-बड़े गोल चूची दिखाई देने लगे। मेरी नज़र वहीं अटक गई। अंदर ही अंदर एक्साइटमेंट होने लगा। प्यास भी जोर से लगी। मैं काँपते गले से बोला, “रेवती, मेय आई हैव अ ग्लास ऑफ वॉटर प्लीज़?” office sex kahani

“यस सर, व्हाई नॉट।”

वो तुरंत जुग से एक ग्लास पानी मेरी तरफ बढ़ा दी। मेरा हाथ काँप रहा था। मैंने पानी लिया और एक साँस में पी लिया। फिर थोड़ी ठंडक महसूस हुई। फिर फाइल देखने लगा। कुछ ऑफिशियल बातें कीं, इधर-उधर की चर्चा की। इतने में लंच का टाइम हो गया। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

रेवती बोली, “सर, इस केबिन के बगल में एक छोटा सा चैंबर है, वहाँ सोफा-कम-बेड, टेबल, चेयर, फ्रिज, टीवी सब रखा हुआ है। क्या आप वहाँ लंच लेना पसंद करेंगे?” मैं बोला, “मैं तो लंच लाया नहीं हूँ। वैसे भी मैं एक बार में सुबह खाना खाकर आया हूँ, शाम को घर जाकर फिर खाऊँगा। प्लीज़ आप लोग लंच कर लो।”

वो थोड़ा मुसकराई और वहाँ से चली गई। पाँच मिनट बाद एक टिफिन बॉक्स लेकर सीधा उसी कमरे में चली गई जिस कमरे का ज़िक्र उसने पहले किया था। थोड़ी देर बाद उसने मुझे आवाज़ लगाई, “सर प्लीज़ आ जाइए, लंच रेडी है।” मैं थोड़ा असमंजस में पड़ गया, फिर उठकर कमरे में गया।

देखा रेवती प्लेट में पराठे, बाउल में दाल, कुछ सब्ज़ी, सलाद परोसकर खड़ी है। मुस्कुराकर बोली, “सर यहाँ ये नहीं चलेगा कि आप भूखे रहें और हम सब लंच करें। आप खाना खा लीजिए प्लीज़।” मैंने पूछा, “रेवती, आप किसका खाना मुझे खिला रही हो? ये तो होटल का नहीं है।”

वो मुस्कुराती हुई बोली, “नहीं सर, ये मेरा अपना हाथ का बना हुआ है। क्यों, अपना हाथ का बना हुआ नहीं खायेंगे क्या?”

“अरे नहीं, मैंने ऐसा नहीं कहा रेवती, लेकिन आप क्या खाओगी?”

“मेरे लिए है सर, आप खाइए प्लीज़। मुझे पता था कितना लाई होगी।”

मैं बोला, “एक शर्त पर खा सकता हूँ—अगर तुम भी मेरे साथ यहीं खाना खाओगी तो मैं भी खा लूँगा।”

वो थोड़ा शरमाई, बोली, “आप कह लीजिए ना सर, मैं खा लूँगी।”

मैं बोला, “नहीं, तुम भी यहीं बैठ जाओ। एक साथ खाते हैं।”

वो आकर मेरे बगल में बैठ गई। प्लेट में खाना रखा। हम दोनों खाते-खाते बातें करते रहे।

मैंने पूछा, “रेवती, आपके घर में कौन-कौन है?”

वो बोली, “सर मैं तो यहाँ अकेली रहती हूँ। केरल में मेरी माँ और एक छोटा भाई है जो पढ़ता है।”

मैंने पूछा, “आप शादी क्यों नहीं की?”

बोली, “अभी नहीं सर। पहले भाई को पढ़ा लूँ, उसे कोई अच्छी सी जॉब मिल जाए, फिर देखूँगी।”

मैं कनखियों से उसके बदन को देख रहा था। उसकी भरी हुई चूचियाँ लग रहा था मानो अभी ब्लाउज़ में से निकल आएँगी। मेरी आँखें जो चोरी-चोरी उसे देख रही थीं, मुझे लगा उसे पता लग गया है। वो मुझसे पूछने लगी, “सर, आपने मैडम को ले आए हैं यहाँ?”

मैं बोला, “मैडम? मतलब?”

वो बोली, “आपकी बीवी सर।”

मैं हँसकर बोला, “रेवती, मैंने अभी शादी नहीं की है। शादी के लिए टाइम ही नहीं मिला। आप तो जानती हो किस पोस्ट पर हूँ, बहुत ज़िम्मेदारी है। नया-नया जनरल मैनेजर बना हूँ, अभी नहीं। बाद में सोचेंगे।”  office sex kahani

वो मुसकराई, मेरी तरफ देखकर। मैं बोला, “तुम बहुत अच्छी लड़की हो रेवती। मुझे कुछ भी चाहिए हो तो बेझिझक बोल देना। और आज तुम्हारा नमक खा लिया।” बोलकर मैं हँसने लगा। वो भी शरमाकर हँस दी। ऐसे दो-चार दिन कट गए। रोज़ मैं रेवती के साथ खाना खाता था, वो भी मेरे साथ शेयर करती थी। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

एक दिन अचानक ग्यारह बजे के करीब पूरा मार्केट बंद हो गया। कोई हंगामा हुआ था, मुझे ठीक से याद नहीं। सब अपने-अपने घर निकल गए। मैं अपनी केबिन में काम कर रहा था। पीओन आया और बोला, “सर, सब जाना चाहते हैं। कुछ हुआ है, बाद में जाने का साधन नहीं मिलेगा या रास्ते में दिक्कत आ सकती है। सब आपकी परमिशन का वेट कर रहे हैं। आपको आकर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे, इसलिए मुझे भेजा। क्या ऑर्डर है सर?” office sex kahani office sex kahani

मैं हँस दिया, बोला, “जाओ, सबको जाने बोल दो। कोई बात नहीं।”

मैंने सोचा सबके साथ रेवती भी चली गई होगी। थोड़ी देर बाद मेरे रूम में रेवती आ गई। बोली, “सर मैं नहीं जा पाई। ऑटो स्ट्राइक है, बस भी नहीं चल रही। अब मैं कैसे जाऊँगी?” मैंने खिड़की से झाँककर देखा, रास्ता सुनसान हो गया था। मैंने ड्राइवर को बुलाया, बोला, “राम सिंह, अब घर कैसे जाऊँगा? रास्ते में तो कोई आदमी नहीं है।”

वो बोला, “कोई बात नहीं साब, हो सकता है शाम तक ठीक हो जाए। मैं रिसेप्शन केबिन में हूँ। बाकी सब तो चले गए हैं, आप और रेवती मैडम हैं। उनको शाम को मैं घर छोड़ दूँगा। लेकिन अभी निकलने से रिस्क हो सकता है।”

मैं बोला, “ओके, कोई बात नहीं। तुम जाओ।”

फिर रेवती से बोला, “रेवती, आपको डर नहीं लग रहा? इस बिल्डिंग में सिर्फ मैं और आप, और कोई नहीं।”

वो शरमा गई, बोली, “डर क्यों सर? आप तो हैं। आपसे कैसा डर?”

मैं बोला, “क्यों? मुझसे डर नहीं लगता तुम्हें?”

बोली, “नहीं सर, आपसे डर क्यों लगने लगा? आप भी बहुत अच्छे इंसान हैं और बॉस जैसे नहीं।”

मैंने पूछा, “मतलब? और बॉस? मेरे पहले जो था, क्या वो अच्छा नहीं था?”

वो थोड़ा उदास हो गई, बोली, “सर, उसने मुझे तीन बार सस्पेंड किया था। उसकी बात न मानने के लिए।”

मैं बोला, “क्यों, तुमने क्यों नहीं मानी?”

बोली, “सर, अगर मानने लायक होती तो ज़रूर मान लेती। मगर वो बहुत उम्रदराज था और गंदी हरकतें भी करता था।”

मैं समझ गया। मैं बोला, “कोई बात नहीं रेवती, मैं ऐसा नहीं हूँ। मुझ पर भरोसा रख सकती हो।”

वो बोली, “सर, पहले दिन से ही मैं आपको पहचान गई हूँ कि आप औरों जैसे नहीं हैं।” बोलकर शरमा गई।

मैं बोला, “लेकिन उतना अच्छा भी नहीं हूँ। हा हा हा हा हा हा हा!”

वो और शरमा गई।

मैं बोला, “रेवती, तुम इतनी सुंदर हो, किसी का भी दिल तो आ ही सकता है ना तुम पर। बाकी बेचारों का क्या दोष?” office sex kahani

“जाइए सर आप भी।” बोलकर शरमा गई। बोली, “मैं ज़रा बाहर जाकर देखकर आती हूँ। आप उस कमरे में चले जाइए। काम तो खत्म हो ही गया है। वहाँ बैठकर बातें करेंगे, फिर खाना खायेंगे।”

मैं बोला, “ठीक है, तुम देखकर आओ।”

मैं उठकर कमरे में चला गया। थोड़ी देर में रेवती आ गई। बोली, “सर, कैंपस में कोई नहीं है। मैं मेन डोर लॉक कर आई हूँ ताकि किसी को पता न चले कि अंदर कोई है। आपका ड्राइवर भी सो रहा है।” मैं बोला, “ठीक है, अच्छा हुआ। आओ बैठ जाओ यहाँ।” बोलकर मैंने सोफे से थोड़ा हाथ करके जगह बनाई।

वो आकर मेरे बगल में बैठ गई। मैंने एक सिगरेट जलाई, कश मारने लगा और बातें करते हुए उसके रूप को देखने लगा। बॉब कट बाल, पतली सी कमर, आज हल्की नीली रंग की साड़ी पहनी हुई थी, मैचिंग ब्लाउज़, गले में वही सोने की चेन जिसमें मोती का लॉकेट लटक रहा था।

उसकी सुराहीदार गर्दन की शोभा बढ़ा रहा था। उसके जिस्म से एक भिनभिनाती सी मीठी और उत्तेजक सुगंध आ रही थी। मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया। मैंने धीरे से रेवती का हाथ अपने हाथ में ले लिया। उसका हाथ गर्म और नरम था, जैसे कोई रेशमी कपड़ा। office sex kahani office sex kahani

वो थोड़ा सहम गई, लेकिन हाथ नहीं छुड़ाया। उसने शर्मा कर सिर झुका लिया और आँखें नीची कर लीं। मैंने उसकी तरफ़ देखा, उसकी साँसें तेज़ चल रही थीं, सीने का उठना-नीचना साफ़ दिख रहा था। नीली साड़ी में उसकी कमर और भी पतली लग रही थी।

मैंने उसके हाथ को हल्के से दबाया और फुसफुसा कर कहा, “रेवती… तुम सच में बहुत ख़ूबसूरत हो।”

वो शर्मा कर बोली, “सर… प्लीज़… ऐसा मत कहिए…”

मैंने उसका हाथ अपनी गोद में खींच लिया और दूसरा हाथ उसकी कमर पर रख दिया। उसकी कमर इतनी पतली थी कि मेरा हाथ पूरा घेर ले रहा था। वो हल्के से सिहर उठी, लेकिन पीछे नहीं हटी। मैंने उसके कान के पास मुँह ले जा कर धीरे से कहा, “डर मत… मैं वही करूँगा जो तुम चाहोगी।”

उसने आँखें बंद कर लीं और हल्के से सिर हिला दिया। मैंने उसके गाल पर होंठ रख दिए। उसकी त्वचा गर्म और मुलायम थी। फिर धीरे-धीरे उसके होंठों तक पहुँचा। पहला चुंबन हल्का सा था, जैसे परख रहा हूँ। वो सिहर उठी, लेकिन जवाब दिया। फिर मैंने उसे गले लगा लिया और गहरा चुंबन करने लगा। ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.

उसकी जीभ मेरी जीभ से टकराई, दोनों की साँसें मिल गईं। मेरा हाथ उसकी पीठ पर फिरता हुआ साड़ी के पल्लू तक पहुँचा। मैंने पल्लू धीरे से सरका दिया। उसका ब्लाउज़ पूरी तरह दिखने लगा। मैंने उसकी छाती पर हाथ फेरा। उसकी चूचियाँ इतनी सख़्त और भरी हुई थीं कि ब्लाउज़ फटने को थीं।

मैंने ब्लाउज़ के हुक खोल दिए। उसने कोई विरोध नहीं किया। ब्रा के ऊपर से ही मैंने उसकी चूचियों को दबाया। वो सिसकारी लेने लगी, “आह्ह… सर…” मैंने ब्रा भी ऊपर सरका दी। उसके गुलाबी निप्पल तने हुए थे। मैंने एक चूची मुँह में ले ली और चूसने लगा। office sex kahani office sex kahani office sex kahani

वो मेरे सिर को पकड़ कर दबाने लगी। दूसरी चूची को मैं हाथ से मसल रहा था। उसकी सिसकारियाँ कमरे में गूँजने लगीं। फिर मैंने उसे सोफ़े पर लिटा दिया। साड़ी पूरी तरह खोल दी। अब वो सिर्फ़ पेटीकोट और पैंटी में थी। मैंने पेटीकोट का नाड़ा खींचा, वो नीचे सरक गया।

उसकी जाँघें एकदम चिकनी और गोरी थीं। मैंने उसकी पैंटी पर हाथ फेरा, वो पूरी तरह गीली थी। मैंने पैंटी उतार दी। उसकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, गुलाबी और चमकदार। मैंने उसकी चूत पर उँगली फेरी, वो तड़प उठी, “आह्ह… सर… प्लीज़…”

मैंने अपना पैंट खोला। मेरा लंड पूरी तरह तना हुआ था। मैंने उसकी टाँगें चौड़ी कीं और लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। वो बेचैन हो रही थी। मैंने धीरे से झटका दिया, आधा लंड अंदर चला गया। वो चीख पड़ी, “आह्ह्ह… धीरे सर… बहुत मोटा है…” मैंने रुका, फिर धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर ठूँस दिया। उसकी चूत बहुत टाइट और गर्म थी। office sex kahani

मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू किया। वो अपनी कमर उचका-उचका कर साथ देने लगी। कमरे में सिर्फ़ चपचप और हमारी साँसों की आवाज़ थी। दस-पंद्रह मिनट तक मैंने उसे अलग-अलग पोज़िशन में चोदा। कभी वो ऊपर, कभी मैं ऊपर। उसने तीन बार झड़ चुकी थी, उसकी चूत से पानी बह रहा था। आख़िर में मैंने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से ज़ोर-ज़ोर से ठोकने लगा। वो चिल्ला रही थी, “बस सर… और नहीं… आह्ह्ह… मैं मर जाऊँगी…” मैंने आख़िरी झटके मारे और उसके अंदर ही झड़ गया। गर्म वीर्य उसकी चूत में भर गया। हम दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से लिपट कर सोफ़े पर गिर पड़े। office sex kahani office sex kahani

काफ़ी देर बाद वो मेरे सीने पर सिर रख कर बोली, “सर… आज के बाद मैं सिर्फ़ आपकी हूँ।”

मैंने उसके माथे पर किस किया और कहा, “और मैं सिर्फ़ तेरा।”

बाहर शाम हो चुकी थी। ड्राइवर ने आवाज़ लगाई कि अब रास्ते खुल गए हैं। हमने कपड़े ठीक किए, एक लंबा चुंबन लिया और बाहर निकले। लेकिन अब हम दोनों जानते थे कि ये सिर्फ़ शुरुआत थी। रेवती की चूत की गर्मी और उसकी सिसकारियाँ मेरे कानों में अब भी गूँजती हैं।  office sex kahani office sex kahani office sex kahani office sex kahani office sex kahani office sex kahani office sex kahani office sex kahani office sex kahani office sex kahani office sex kahani office sex kahani office sex kahani

5 1 vote
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments