हाय दोस्तों, मैं अर्जुन हूँ, गुजरात का रहने वाला एक साधारण सा लड़का। यह xxx हॉट देसी स्टोरी मेरी जिंदगी का वो राज है जो मैं हमेशा से छिपाए घूमता रहा हूँ, लेकिन आज हिम्मत करके बता रहा हूँ क्योंकि यह xxx बहन की चुदाई कहानी जैसी अनुभव ने मुझे बदल दिया। मेरा लंड 7 इंच का मोटा है, हमेशा तैयार रहने वाला।
मेरी दीदी की शादी मुंबई में हुई थी, जीजू ने मुझे नौकरी के लिए यहीं बुला लिया। मैं उनके ही फ्लैट में रहता था। उसी दौरान जीजू की बड़ी बहन रिया और उसके पति के बीच झगड़ा हो गया था, तो वो भी वहीं शिफ्ट हो गई। घर में दीदी, जीजू, उनके मॉम-पापा, मैं और रिया – बस यही लोग। जीजा की बहन की चुदाई
रिया को देखते ही दिल धक से हो जाता था, वो 32 साल की मस्त औरत थी, उसके बूब्स 36 साइज के गोल-गोल, गांड इतनी भरी हुई कि साड़ी में लहराती रहती। वो हमेशा लो-कट ब्लाउज पहनती, जिसमें से उसके भरे हुए चूचे झांकते। मैंने उसके नाम पर कई बार मुठ्ठी मारी, लेकिन कभी सोचा नहीं कि कभी चोद पाऊंगा। गर्मियों के वो दिन थे, जब सब सुबह निकल जाते – जीजू और पापा ऑफिस, मॉम मार्केट। घर में सिर्फ दीदी और रिया दीदी। मैं रिया को बड़ी दीदी ही कहता था, सम्मान से। लेकिन अंदर ही अंदर उसकी चूत चोदने का ख्याल आता रहता।
एक दिन नहाने के बाद मैं रिया दीदी के कमरे के पास से गुजर रहा था, दरवाजा थोड़ा खुला था। झांका तो देखा, वो नंगी हो रही थी। दोस्तों, क्या बताऊं, मैं तो वहीं जम गया। उसके मस्त बूब्स को वो खुद दबा रही थी, निप्पल्स कड़े हो चुके थे, और नीचे क्लीन शेव्ड चूत में उंगली डालकर रगड़ रही थी। ‘आह्ह्ह… उफ्फ्फ…’ उसकी सिसकारियां सुनकर मेरा लंड पैंट में तन गया। जीजा की बहन की चुदाई
बाहर खड़े-खड़े मैंने दो बार झड़ गया, लंड से रस टपक रहा था। वो कपड़े पहनकर बाहर आई, मुस्कुराई और बोली, ‘क्या हुआ अर्जुन, इतना पसीना क्यों?’ मैं कुछ बोल न पाया, बस नजरें फेर लीं। लेकिन मन में आग लग गई। रात को बाथरूम में जाकर मैंने रिया दीदी का नाम लेकर लंड हिलाया, चोदने का ख्याल सोचकर। अचानक लगा किसी ने झांका, लेकिन कुछ नहीं बोला।
रात को लाइट चली गई, घर में अंधेरा। हम तीनों – मैं, दीदी और रिया दीदी – बालकनी में बैठे थे। ठंडी हवा चल रही थी। अचानक रिया दीदी ने अपना पैर मेरे पैर पर रख दिया।
धीरे-धीरे ऊपर की तरफ सरकाने लगी, मेरी जांघ पर। मैं समझ गया, सुबह उसने मुझे देख लिया था। मेरा लंड फिर तनने लगा। इतने में लाइट आ गई, वो पैर हटा लिया।
लेकिन उसकी आंखों में चमक थी। अगले दिन मुझे मार्केट जाना था, कुछ सामान खरीदने। रिया दीदी बोलीं, ‘मैं भी चलूंगी, कुछ शॉपिंग करनी है।’ हम दोनों साथ निकले। वापसी में बोलीं, ‘चलो मेट्रो से चलें, ट्रैफिक से बचेंगे।’ जीजा की बहन की चुदाई
मेट्रो में भारी भीड़ थी, लोगों का जमघट। रिया दीदी मेरे ठीक आगे खड़ी थीं। धक्के-मुक्कों में हम चिपक गए। मेरा लंड उनकी गांड पर सट गया, तना हुआ। मैं सह न सका, धीरे से धक्का मारा। वो कुछ न बोलीं, बस हल्का सा पीछे हटीं। हिम्मत बढ़ी, मैंने कमर पर हाथ रखा, फिर नीचे चूत की तरफ सरकाया। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा, फुसफुसाई, ‘यहां नहीं, पागल।’ लेकिन दबाव न हटाया। कुछ ही मिनटों में मैं झड़ गया, पैंट गीली हो गई। वो मुड़ीं, देखकर हंसीं, ‘क्या हुआ, रुक क्यों गया?’ मैं शरमाया, ‘हो गया।’ वो हंस पड़ीं, ‘घर जाकर देखते हैं।’ घर पहुंचे, मैं नहाने चला गया। बाहर आया तो वो दीदी से कह रही थीं, ‘आज तो अर्जुन को कितना मजा आया!’ मैंने कहा, ‘बड़ी दीदी को नहीं आया क्या?’ वो बोलीं, ‘उतना नहीं जितना आना चाहिए।’ जीजा की बहन की चुदाई
अब मैं मौका ढूंढने लगा रिया दीदी को चोदने का। आते-जाते बूब्स दबा देता, कभी चुपके से किस कर लेता। लेकिन पूरा मौका न मिला। एक दिन जीजू के चाचा की बेटी की शादी थी, मुंबई के बाहर। सब गए थे। मैंने रिया दीदी से कहा, ‘आज अच्छा मौका है, चलो घर लौटें।’ वो हिचकिचाईं, ‘क्या बहाना बनाऊंगी?’ लेकिन मैंने जिद की। आखिरकार वो मना न कर सकीं।
मैं पहले ही घर आ गया, उदास कि मौका चूक गया। डोरबेल बजी, खोला तो रिया दीदी! बोलीं, ‘तबीयत खराब होने का बहाना बना दिया। अब क्या?’ मैं पागल हो गया खुशी से, उन्हें गले लगा लिया, चूमने लगा। वो बोलीं, ‘रुको, कपड़े बदलकर आती हूं।’
वो अंदर गईं, लौटीं तो पतली सी नाइटी में। पारदर्शी, बिना ब्रा के। उनके निप्पल्स साफ दिख रहे थे। मैं उन पर टूट पड़ा, स्मूच करने लगा। जीभें लड़ाईं, सांसें तेज। नाइटी ऊपर सरकाई, बूब्स बाहर। मैंने चूसना शुरू किया, काटा, दबाया। वो सिसकीं भर रही थीं, ‘आह्ह्ह… अर्जुन… पागल हो गए हो क्या?’ मैंने कहा, ‘कब से इन चूचियों को चोदने का ख्याल आ रहा था। आज तुझे चुदक्कड़ बना दूंगा।’ वो हंसकर बोलीं, ‘बना दे, हरामी। मैं भी कई दिनों से चुदवाने को तरस रही हूं। पति का लंड छोटा सा, महीने में 2-3 बार ही चोदता है।’ जीजा की बहन की चुदाई
मैंने नाइटी पूरी उतार दी, पैंटी भी खींच ली। उनकी चूत गीली चमक रही थी, गुलाबी पंखुड़ियां फैली हुईं। मैं घुटनों पर बैठा, जीभ से चाटने लगा। क्लिट पर गोल-गोल घुमाई, अंदर डाला। ‘आह्ह्ह… उफ्फ्फ… चोदते रहो… जीभ से चोदो…’ वो कसमसा रही थीं। उंगलियां डालीं, दो, तीन – चपचप की आवाज। वो कांपने लगीं, ‘अब मत तड़पा… लंड डालो… चुदाई करो…’ मैंने कपड़े उतारे, मेरा 7 इंच का लंड बाहर।
वो देखकर पागल, ‘वाह… इतना मोटा… चूसना चाहती हूं।’ मैंने हामी भरी। वो घुटनों पर, लंड मुंह में। चूसने लगीं, गग्गी… गग्गी… लार टपक रही। 10 मिनट तक चूसा, मैं झड़ गया उनके मुंह में। रस निगल लिया, बोलीं, ‘स्वादिष्ट।’ जीजा की बहन की चुदाई
कुछ देर फोरप्ले के बाद मैं तैयार। लंड उनकी चूत पर रगड़ा। पहला धक्का – अंदर न गया। ‘आह्ह्ह… दर्द हो रहा… बहुत दिनों से चुदाई नहीं हुई।’ मैंने स्मूच किया, मुंह बंद। फिर धक्का मारा, आधा अंदर। चीखीं, ‘रुको… फट जाएगी चूत…’ मैं रुका, बूब्स चूसे। जब शांत हुईं, पूरा लंड ठूंका। ‘आआआह्ह्ह्ह… मार डाला… लंड बहुत मोटा…’ वो रोने लगीं। मैं धीरे-धीरे हिलाने लगा। ठप-ठप… चप-चप… अब वो भी साथ देने लगीं, ‘हां… चोदो… जोर से चोदते जाओ… रंडी बना दो…’ मैंने स्पीड बढ़ाई, 100 धक्के मारे। उनकी चूत गीली, लंड चिकना। बूब्स दबाए, निप्पल मरोड़े। ‘आह्ह्ह… ऊईई… झड़ रही हूं…’ वो कसकर चूत सिकोड़ लीं, रस बहा। मैं भी झड़ गया अंदर। गर्म रस भर दिया।
फिर रुके नहीं। दूसरी बार डॉगी स्टाइल में। उनकी गांड ऊपर, लंड पीछे से पेला। ‘फाड़ दो गांड… चोदो रंडी को…’ वो चिल्ला रही थीं। मैंने बाल पकड़े, 200 धक्के मारे। पसीना टपक रहा, कमरा चुदाई की महक से भरा। तीसरी बार मिशनरी में, टांगें कंधे पर। ‘अर्जुन… तू मेरा पति बन गया… हमेशा चोदते रहना…’ हम दोनों थक गए, लेकिन मजा अनमोल। उस रात तीन बार चुदाई की, हर बार नया पोज। सुबह तक सोए। फिर से वो शादी में चली गईं, लेकिन वादा किया – मौका मिलेगा तो मिलेंगे। जीजा की बहन की चुदाई
उसके बाद कई मौके बने। कभी जीजू के बाहर जाने पर, कभी दीदी के साथ शॉपिंग बहाने। एक बार तो किचन में ही चोद डाला, दीदी सो रही थी। रिया दीदी चुदवाती रहतीं, ‘लंड डालो… चूत खुजला रही…’ मैं चोदता, ‘चुदक्कड़ रंडी, ले लंड…’ दो साल हो गए। अब मैंने मुंबई में अपना फ्लैट ले लिया, वो अपने पति के पास लौट गईं। लेकिन हफ्ते में एक बार जरूर मिलते हैं, चुदाई का धमाल मचाते।
कभी होटल में, कभी कार में। वो कहतीं, ‘तुम्हारा लंड ही असली है, चोदवाने का मजा सिर्फ तुमसे।’ मैं हंसता, ‘रंडी साली, हमेशा चुदवाती रहना।’ यह राज अब खुल गया, लेकिन पछतावा नहीं। जिंदगी में ऐसा मजा कहीं और न मिले। धन्यवाद दोस्तों, पढ़ने के लिए।
यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।”
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