ये कहानी है उस पिकनिक “पिकनिक पर बॉयफ्रेंड ने कि behan ki chudai”, जहाँ मैंने अपनी बहन को उसके बॉयफ्रेंड के साथ देखा, एक ऐसी देसी हिंदी सेक्स कहानी जो मेरी ज़िंदगी का सबसे चौंकाने वाला और छुपाया हुआ सच है। ये मेरी अपनी आँखों देखी सच्ची घटना है,
एक ऐसा राज़ जिसे मैं हमेशा अपने सीने में दफनाकर रखना चाहता था, लेकिन अब लगता है कि इसे बाहर आना ही चाहिए। मेरा नाम अर्जुन है और मैं अपनी बहन अंजलि के साथ एक छोटे से शहर, देहरादून में रहता हूँ। अंजलि मुझसे सिर्फ दो साल बड़ी है, 21 साल की, और हम दोनों में गजब की बॉन्डिंग है। वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त भी है और कई बार माँ की तरह डाँटने वाली बड़ी बहन भी।
अंजलि दिखने में बेहद खूबसूरत है, लंबे घने काले बाल, गेहुआँ रंग, और एक ऐसी मुस्कान जो किसी का भी दिल चुरा ले। उसकी आँखें बड़ी-बड़ी और बादामी हैं, जिनमें हमेशा एक शरारत भरी चमक रहती है। लेकिन सबसे खास बात जो मैंने कभी नोटिस की, वो था उसके शरीर का गठन। behan ki chudai
वो बहुत फिट थी, लेकिन उसके कर्व्स ऐसे थे कि कोई भी उसे देखता रह जाए। उसकी कमर पतली और कूल्हे भरे हुए थे, और उसके स्तन, भगवान, मैंने हमेशा कोशिश की कि उस तरफ ध्यान न जाए, लेकिन वो इतने उभरे हुए और सुडौल थे कि कभी-कभी उसकी कसी हुई टॉप में वो बहुत ही प्रमुखता से दिखाई देते थे। हालाँकि मैंने कभी भी अपनी बहन को उस नज़र से नहीं देखा था, क्योंकि वो मेरी बहन थी।
उसका बॉयफ्रेंड था रोहन। रोहन 22 साल का था, लंबा, गोरा, और एक स्पोर्ट्स बाइक रखता था जो उसकी पर्सनैलिटी में चार चाँद लगाती थी। वो हमारे शहर में ही एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता था और अंजलि से पिछले एक साल से रिलेशनशिप में था।
अंजलि ने मुझे बताया था कि वो रोहन से बहुत प्यार करती है, लेकिन माँ-पापा को अभी तक इस बारे में नहीं बताया था। वो डरती थी क्योंकि हमारा परिवार थोड़ा पारंपरिक था। इसलिए वो दोनों अक्सर छुपकर मिलते थे, और मैं ही था जो हमेशा उनका राज़ छुपाता था, उनकी डेट्स के लिए बहाने बनाता था।
एक दिन रोहन ने हम दोनों को अपने कुछ दोस्तों के साथ एक तीन दिन की पिकनिक पर चलने का ऑफर दिया। जगह थी मसूरी के पास एक प्राइवेट कॉटेज, जो रोहन के एक अमीर दोस्त के चाचा की थी। घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसा वो कॉटेज, बिल्कुल एक सपने जैसा लगता था। behan ki chudai
रोहन ने कहा, |अर्जुन, चलना, बहुत मज़ा आएगा, अंजलि भी खुश होगी और तू भी नेचर के बीच एंजॉय करेगा| मुझे तो बस वो बात चाहिए थी क्योंकि मैं पिछले कुछ महीनों से पढ़ाई और रूटीन लाइफ से बहुत बोर हो गया था। अंजलि बहुत एक्साइटेड थी, और मेरे मना करने पर भी मुझे जबरदस्ती मनाया गया।
हम सब शुक्रवार की सुबह निकले। रोहन के साथ उसके तीन और दोस्त थे – विक्की, सुमित, और एक लड़की नेहा, जो सुमित की गर्लफ्रेंड थी। कुल मिलाकर हम छह लोग थे, एक स्कॉर्पियो गाड़ी में। सफर बहुत ही मज़ेदार रहा, गाने बज रहे थे, हँसी-मज़ाक चल रहा था। रोहन और अंजलि पीछे की सीट पर साथ बैठे थे।
मैं बीच की सीट पर विक्की के साथ था, और आगे सुमित और नेहा थे जो ड्राइविंग कर रहे थे। रास्ते भर मैंने देखा कि रोहन अंजलि का हाथ पकड़े हुए था और कभी-कभी उसके कानों में धीरे से कुछ फुसफुसा रहा था, जिसे सुनकर अंजलि शरमा जाती थी और हल्के से मुस्कुरा देती थी। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जिसे मैंने आज से पहले कभी नहीं देखा था। वो एक अलग ही खूबसूरती थी, किसी के प्यार में डूबी एक लड़की की खूबसूरती।
रास्ते में हमने एक ढाबे पर लंच किया। वहाँ अंजलि जब अपनी सीट से उठी तो मैंने गौर किया कि उसने एक कैज़ुअल लेकिन टाइट ब्लू जींस और एक सफेद रंग की टॉप पहनी हुई थी, जो उसके शरीर पर एकदम चिपकी हुई थी और उसकी कमर और कूल्हों के कर्व्स को बखूबी दर्शा रही थी। रोहन ने भी ये नोटिस किया, और उसकी नज़रें बार-बार अंजलि के उन उभारों पर जा रही थीं। मुझे उस पल थोड़ा अजीब लगा, लेकिन मैंने नजरअंदाज कर दिया। सोचा, प्यार में ऐसा तो होता ही है।
शाम के धुँधलके तक हम कॉटेज पहुँच गए। वो जगह देखने में जितनी खूबसूरत लग रही थी तस्वीरों में, हकीकत में उससे कहीं ज्यादा थी। लकड़ी और पत्थरों से बनी एक बड़ी सी कोठी, चारों तरफ देवदार के पेड़ और दूर तक फैली पहाड़ियाँ। हवा में एक ठंडक और ताजगी थी जो सीधे दिल को छू रही थी।
कॉटेज के अंदर तीन बेडरूम थे, एक बड़ा सा लिविंग एरिया जिसमें एक चिमनी भी थी, और एक पूरी तरह से लैस किचन। हमने जल्दी-जल्दी रूम्स बाँट लिए। विक्की और सुमित ने एक रूम लिया, नेहा ने एक अलग रूम लेने की जिद की ताकि वो सुमित के साथ रह सके, और तीसरा रूम रोहन और मेरे लिए था, जबकि अंजलि को सोने के लिए लिविंग एरिया में सोफा कम बेड मिला। हालाँकि ये तो बस शुरुआती बँटवारा था, रात होते-होते चीज़ें जैसे अपने आप बदल गईं। behan ki chudai
रात के खाने का इंतज़ाम हम सबने मिलकर किया। रोहन और विक्की ने बोनफायर के लिए लकड़ियाँ इकट्ठी कीं, सुमित और नेहा किचन में मैगी और सूप बनाने लगे, और मैं और अंजलि कॉटेज के पीछे लॉन में कुर्सियाँ और म्यूजिक का इंतज़ाम करने लगे। अंजलि बहुत खुश लग रही थी, लगातार गुनगुना रही थी और मुझे चिढ़ा रही थी।
अर्जुन, तू तो हमेशा किताबों में घुसा रहता है, आज पहाड़ों में आकर देख, तेरा भी मूड बदल जाएगा, मैं बस मुस्कुरा दिया। सच कहूँ तो, मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था।
रात करीब नौ बजे हम सब बोनफायर के आसपास बैठ गए। आग की गर्मी और ऊपर खुले आसमान में तारों की चादर, दोनों का कॉम्बिनेशन अद्भुत था। सबके हाथों में ड्रिंक्स आ चुकी थीं। मैंने बीयर पकड़ ली, विक्की और सुमित व्हिस्की पी रहे थे, नेहा वाइन लेकर आई थी, और अंजलि और रोहन ने भी बीयर ली।
हालाँकि मैंने देखा कि रोहन ने अपने बैग से एक अलग बोतल भी निकाली, जो शायद रम थी। धीरे-धीरे नशा चढ़ने लगा और बातचीत का माहौल हल्का होने लगा। पहले क्रिकेट, फिल्मों, फिर पॉलिटिक्स से होते हुए बातें पर्सनल होने लगीं। विक्की ने अंजलि को चिढ़ाते हुए कहा, |अंजलि, रोहन से कब शादी कर रही है? इतना प्यार करते हो तो दोनों।
अंजलि शरमा गई और रोहन के कंधे से सट गई। रोहन ने हँसकर कहा, |बस, थोड़ा सेटल हो जाऊँ, फिर तो बस वही करेंगे| behan ki chudai
नशा थोड़ा और गहराया तो रोहन और अंजलि के बीच की हरकतें और भी इंटिमेट होने लगीं। रोहन का हाथ अंजलि की जींस की जेब में था, और वो अक्सर उसकी जाँघों को सहला रहा था। अंजलि भी उसकी तरफ पूरी तरह झुकी हुई थी, उसके बाल रोहन के कंधे पर बिखरे हुए थे।
मैंने देखा कि रोहन ने धीरे से अपना चेहरा झुकाकर अंजलि की गर्दन पर एक हल्की सी किस की, और अंजलि ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके होंठों से एक धीमी सी साँस निकली। ये सब मैं ही देख पा रहा था क्योंकि मैं थोड़ा साइड में बैठा था और बाकी लोग अपनी-अपनी बातों में मशगूल थे। उस पल मेरे पेट में एक अजीब सी गुदगुदी हुई, एक ऐसा एहसास जो न तो गलत था न ही सही, बस नया था। मैंने नजरें हटा लीं और अपनी बीयर खत्म करने लगा।
रात के ग्यारह बज गए थे। नेहा और सुमित तो कब के अपने रूम में चले गए थे, और विक्की भी नशे में धुत होकर अपने रूम की तरफ चला गया। मैं, अंजलि और रोहन तीनों ही आग के पास बचे थे। अब रोहन और अंजलि का प्यार ज्यादा खुलकर सामने आ रहा था। वो एक-दूसरे से लिपटकर बैठे थे और रोहन उसके माथे पर, गालों पर और कभी-कभी होंठों पर छोटे-छोटे पेक दे रहा था।
मुझे लगा कि मुझे उन्हें अकेला छोड़ देना चाहिए, तो मैं खड़ा हुआ और बोला, |मैं थक गया हूँ, सोने जा रहा हूँ| अंजलि ने पलटकर मुझे देखा, उसकी आँखें नशे और प्यार से थोड़ी बोझिल थीं, और बोली, अच्छा ठीक है, गुड नाइट रोहन ने भी हाथ हिलाया।
मैं अंदर गया और अपने और रोहन के लिए तय रूम में आ गया। मैंने अपने कपड़े बदले और बिस्तर पर लेट गया। लेकिन नींद तो जैसे कोसों दूर थी। नशे की वजह से दिमाग थोड़ा घूम रहा था और बार-बार वही दृश्य आँखों के सामने आ रहा था, जिसमें रोहन अंजलि को किस कर रहा था और उसकी प्रतिक्रिया। मुझे ये समझ नहीं आ रहा था कि मैं ये सब क्यों सोच रहा हूँ। मैंने करवट बदली और सोने की कोशिश करने लगा। behan ki chudai
करीब आधे घंटे बाद मुझे हल्की सी आवाज़ें सुनाई दीं। पहले तो मैंने अनसुना कर दिया, लेकिन फिर ध्यान गया। आवाज़ें बाहर लिविंग रूम की तरफ से आ रही थीं, वहीं जहाँ अंजलि को सोना था। शायद रोहन अभी भी वहीं है, मैंने सोचा। पहले तो हल्की-हल्की बातें, फुसफुसाहट, और फिर एक दबी हुई हँसी। मेरी उत्सुकता बढ़ने लगी। मैं उठा और धीरे से अपने रूम का दरवाजा खोला, जो सीधे लिविंग रूम के एक कोने में खुलता था। दरवाजा खोलते ही आवाजें साफ आने लगीं। behan ki chudai
लिविंग रूम में हल्की रोशनी थी, सिर्फ एक कोने में लगा लैंप जल रहा था। मैंने दरवाजे की दरार से झाँका तो देखा कि रोहन और अंजलि उस सोफा कम बेड पर थे। लेकिन अब उनके बीच की दूरी बिल्कुल खत्म हो चुकी थी। रोहन अंजलि के ऊपर आधा लेटा हुआ था और अंजलि उसके नीचे, दोनों एक-दूसरे की बाँहों में कसकर बँधे हुए थे और गहरी, रूहानी किस कर रहे थे।
ये वो चुंबन था जो प्यार और आकर्षण की सारी सीमाएँ पार कर चुका था। अंजलि की उँगलियाँ रोहन के बालों में घुसी हुई थीं और उसका शरीर रोहन के स्पर्श के नीचे थोड़ा सा उठ रहा था और गिर रहा था। उसने अपनी सफेद टॉप उतार फेंकी थी और अब वो सिर्फ अपनी ब्लैक ब्रा और जींस में थी। रोशनी में उसकी त्वचा सुनहरी लग रही थी।
मैं सन्न रह गया। मुझे समझ नहीं आया कि मैं ये देख रहा हूँ या ये कोई सपना है। मेरे पैर जड़ हो गए और नजरें उस दृश्य पर टिक गईं। मैं जानता था कि मुझे वहाँ से हट जाना चाहिए, ये गलत है, लेकिन एक अदृश्य शक्ति ने मुझे वहीं जकड़ लिया था। मेरी साँसें रुकी हुई थीं और मेरा पूरा ध्यान उन दोनों पर केंद्रित हो गया था, जैसे कोई फिल्म देख रहा हो।
रोहन के होंठ अब अंजलि की गर्दन से नीचे उतरकर उसके कंधों और कॉलरबोन को चूम रहे थे। अंजलि की साँसें तेज़ हो गई थीं, उसके मुँह से एक हल्की सी कराह निकली, |उह्ह्ह्ह्ह… रोहन…| behan ki chudai
रोहन ने अपना एक हाथ उसकी कमर पर रखा और दूसरा धीरे-धीरे उसकी पीठ पर सरकाते हुए ब्रा के हुक तक पहुँचा। अंजलि ने अपनी पीठ थोड़ी ऊपर उठाकर उसे इजाज़त दे दी। एक झटके में हुक खुल गया और ब्रा के दोनों सिरे अलग हो गए। रोहन ने वो ब्रा हटा दी और फिर उसकी नजरों के सामने अंजलि के स्तन पूरी तरह से उजागर हो गए। behan ki chudai
मैंने अपने जीवन में पहली बार अपनी बहन के स्तनों को इस तरह देखा, और वो भी बेहद करीब से। वो गोल, भरे हुए और एकदम सुडौल थे। उसके निप्पल गहरे गुलाबी रंग के थे और उत्तेजना से कड़े होकर बाहर की तरफ उभर आए थे। रोहन की साँस भी तेज़ हो गई, उसने अपने मुँह से अंजलि का एक स्तन पूरी तरह से ढक लिया और चूसने लगा।
अंजलि ने एक गहरी कराह भरी,आआह्ह्ह्ह… आह्ह्ह… हाँ बेबी…| उसकी पीठ धनुष की तरह ऊपर उठ गई और उसकी उँगलियाँ रोहन के बालों में और जोर से कस गईं। रोहन बारी-बारी से उसके दोनों स्तनों को चूस रहा था, काट रहा था और अपनी जीभ से सहला रहा था। उसके मुँह से चूसने की आवाज़ें आ रही थीं, |श्लर्प… श्लर्प…| और अंजलि की कराहें कमरे में गूँज रही थीं। मैंने धीरे से एक वीडियो भी बनाया है जिसको निचे लाल बटन पर क्लिक करके देख सकते हो।
ये सब देखकर मेरे शरीर में एक अजीब सी गर्मी दौड़ गई। मेरा अपना लंड मेरी पैंट में तनकर कड़ा हो गया था और मैं अनायास ही अपने कपड़ों के ऊपर से ही उसे दबाने लगा। मेरे दिमाग में एक तरफ तो ये बात आ रही थी कि ये मेरी बहन है, लेकिन दूसरी तरफ ये सीन इतना उत्तेजक था कि मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था।
रोहन का हाथ अब अंजलि की जींस की बेल्ट पर गया। उसने बेल्ट खोली, बटन खोला और चेन नीचे खींच दी। |ज़रा, थोड़ा ऊपर उठ| रोहन ने कहा और अंजलि ने अपने कूल्हे ऊपर उठाए। रोहन ने उसकी जींस और उसके अंदर की पैंटी एक साथ पकड़ी और धीरे-धीरे नीचे सरका दी। अंजलि अब पूरी तरह से नंगी थी, सिर्फ उसकी कलाइयों पर घड़ी और पैरों में मोज़े थे, जो उसे और भी सेक्सी बना रहे थे। उसके पैरों के बीच का त्रिकोण बारीक बालों से सजा हुआ था और उसकी चुत के होंठ उसकी हल्की सी खुली जाँघों के बीच से साफ दिखाई दे रहे थे, जो पूरी तरह से भीग चुके थे और चमक रहे थे।behan ki chudai
रोहन ने उसकी जाँघों को अपने हाथों से फैलाया और अपना चेहरा वहाँ नीचे ले गया। अंजलि ने अपनी साँस रोक ली और अपनी कोहनियों के बल उठकर उसे देखने लगी। रोहन ने अपनी जीभ बाहर निकाली और अंजलि की चुत के ठीक बीच में, उस कली को, जो भीतर छुपी थी, सहलाने लगा। |आआअह्ह्ह्ह्हह… रोहन… ये… उह्ह्ह्ह्ह…| अंजलि चीख पड़ी, उसका शरीर करंट लगने की तरह काँप गया। रोहन ने अपनी जीभ तेज़ी से अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी, उसकी चुत के रस को चाटते और पीते हुए। |तुम्हारा स्वाद बहुत अच्छा है जान| रोहन बीच में बोला और फिर से अपनी जीभ पूरी तरह से उसकी चुत के अंदर डाल दी।
अंजलि जोर-जोर से कराह रही थी, उसकी आँखें बंद थीं और वो रोहन के बाल पकड़कर उसका चेहरा अपनी चुत पर और जोर से दबा रही थी। |हाँ… हाँ… अंदर… और तेज़… आह्ह्ह… मैं… मैं आ रही हूँ…| और फिर अंजलि के शरीर में एक जोरदार ऐंठन हुई, उसके पैर सीधे खिंच गए और वो एक लंबी, गहरी कराह के साथ चरमोत्कर्ष पर पहुँच गई। रोहन ने उसका सारा रस चाट लिया और फिर अपना चेहरा ऊपर करके मुस्कुराया।behan ki chudai
अब रोहन ने अपनी पैंट और अंडरवियर उतार फेंके। उसका लंड बाहर निकला, पूरी तरह से खड़ा और मोटा। वो सात इंच का तो होगा ही, फूला हुआ और नसों से भरा। अंजलि ने अपना हाथ बढ़ाया और उसे पकड़ लिया, फिर धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी। रोहन ने आँखें बंद कर लीं और एक गहरी साँस छोड़ी। |हाँ बेबी, बिल्कुल ऐसे ही| मैंने धीरे से एक वीडियो भी बनाया है जिसको निचे लाल बटन पर क्लिक करके देख सकते हो।
अंजलि आगे झुकी और उसने अपने होंठ खोलकर रोहन के लंड को अपने मुँह में ले लिया। उसने पहले तो सिर्फ ऊपरी हिस्से को चूमा, फिर धीरे-धीरे अपना मुँह खोलकर पूरे लंड को अंदर लेने लगी। उसके गाल बाहर की तरफ फूले हुए थे और वो तेज़ी से अपना सिर आगे-पीछे कर रही थी। |आह्ह्ह शिट…| रोहन कराहा, उसने अपना हाथ अंजलि के सिर पर रख दिया। कमरे में गीली, चिपचिपी आवाज़ें गूँज रही थीं, |श्लिक… श्लिक… श्लर्प…| अंजलि का एक हाथ रोहन के लंड पर था और दूसरा उसकी जाँघों पर। वो पूरी शिद्दत से उसका लंड चूस रही थी, बीच-बीच में लंड को बाहर निकालकर उसकी पूरी लंबाई पर अपनी जीभ फेरती, नीचे लटक रही गोटियों को भी चूसती और फिर वापस अपने मुँह में लेकर गले तक ले जाने की कोशिश करती। behan ki chudai
कुछ देर बाद रोहन ने कहा, |अब नहीं, वरना मैं तुम्हारे मुँह में ही झड़ जाऊँगा| वो अंजलि को सोफे पर लिटाकर उसके ऊपर आ गया। उसने अंजलि की टाँगें चौड़ी करके उसकी चुत पर अपने लंड का सिरा रखा और धीरे से रगड़ने लगा। अंजलि बुरी तरह से तड़प रही थी, |प्लीज़ रोहन… अंदर डालो न… बहुत मन कर रहा है… चोदो न मुझे…| और फिर रोहन ने एक जोरदार धक्का मारा और अपना पूरा लंड एक बार में ही अंजलि की चुत में घुसा दिया।
|आआआह्ह्ह्ह्ह्ह… हाँ… ऐसे ही…| अंजलि चीखी, उसके नाखून रोहन की पीठ में धँस गए। रोहन उसके ऊपर झुका और अपने कूल्हे तेज़ी से आगे-पीछे करने लगा। उसका लंड अंजलि की चुत में बड़ी ही रफ्तार से अंदर-बाहर हो रहा था। चुदाई की वो गीली आवाज़, |चपक… चपक… चपक…| पूरे कमरे में साफ सुनाई दे रही थी। रोहन बहुत जोश में था, वो पूरी ताकत से अंजलि को चोद रहा था और अंजलि उसे पूरी तरह से रिसीव कर रही थी। वो लगातार बोले जा रही थी, |हाँ… हाँ… मुझे चोदो… और तेज़… और जोर से… मेरी चुत फाड़ दो… आह्ह्ह… तुम्हारा लंड इतना मोटा है…|
रोहन ने अपनी रफ्तार और तेज़ कर दी और अंजलि उसकी हर थ्रस्ट के साथ जोर-जोर से कराह रही थी। फिर रोहन ने अपना हाथ बढ़ाकर अंजलि की टाँगों को और ऊपर उठा लिया और उसके कंधों पर टिका दिया। इस पोज़िशन में उसकी चुत और भी खुल गई और रोहन का लंड और गहराई तक जाने लगा। |आह्ह्ह्ह… हाँ बेबी… ये पोज़िशन बहुत गहरी है…| अंजलि कराही। रोहन ने अपना एक पैर सोफे पर टिकाया और खड़े होने जैसी मुद्रा में आकर अंजलि को चोदने लगा। ये बिल्कुल कुत्ता स्टाइल का एहसास दे रहा था, लेकिन अंजलि पीठ के बल लेटी थी। रोहन के पैरों के बीच से उसके लंड का अंदर-बाहर होता एक्शन साफ देखा जा सकता था, जिस पर अंजलि की चुत के सफेद झाग लग चुके थे। मैंने धीरे से एक वीडियो भी बनाया है जिसको निचे लाल बटन पर क्लिक करके देख सकते हो। behan ki chudai
थोड़ी देर बाद रोहन ने अपना लंड बाहर निकाला और अंजलि को पलटकर उलटे कर दिया। अंजलि हाथ और घुटनों के बल सोफे पर आ गई और अपनी कमर को नीचे करके अपनी चुत और गांड को ऊपर उठा दिया। उसकी गांड के मांसल गोलाई और उसके बीच की दरार, और नीचे उसकी गीली चुत, ये नज़ारा लाजवाब था। रोहन उसके पीछे आया, उसने एक हाथ से अपना लंड पकड़ा और दूसरे हाथ से अंजलि की कमर को सहारा देते हुए एक बार फिर से उसकी चुत में अपना लंड डाल दिया। इस बार उसकी थ्रस्टिंग और भी तेज़ और गहरी थी। अंजलि जोर-जोर से चिल्ला रही थी, |हाँ… हाँ… मैं… मैं आ रही हूँ… उह्ह्ह्ह्ह…|
रोहन की साँसें भी बुरी तरह फूल रही थीं। उसने अपनी रफ्तार बढ़ा दी और फिर अचानक वो ठिठका, और एक जोरदार कराह के साथ उसने अंजलि की चुत के अंदर ही अपना माल छोड़ दिया। |आआआह्ह्ह्ह्ह…| वो दहाड़ा। अंजलि ने भी महसूस किया और अपनी चुत की माँसपेशियों को कसकर उसके लंड को दबोच लिया। रोहन पूरी तरह से झड़ने के बाद अंजलि की पीठ पर गिर पड़ा। दोनों बुरी तरह से हाँफ रहे थे।
मैं खुद भी अपनी ही धुन में खोया हुआ था। मैंने कब अपनी पैंट खोलकर अपना लंड बाहर निकाल लिया और कब अपना मूठ मारना शुरू कर दिया, मुझे पता ही नहीं चला। उनकी चुदाई की आवाज़ों और दृश्यों ने मुझे पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लिया था। मैंने देखा कि रोहन का वीर्य अब अंजलि की चुत से बाहर रिस रहा था, एक मोटी, सफेद धार। अंजलि ने पीछे होकर उसे देखा और मुस्कुराकर अपनी उँगली से उस वीर्य को पोंछकर अपने मुँह में डाल लिया। ये देखकर तो मेरी बस की नहीं रहा, और मैं भी अपने ही हाथों से वहीं दरवाजे के पीछे झड़ गया।
मैं तुरंत सावधान हो गया और बिना आवाज़ किए वापस अपने बिस्तर पर चला गया। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था और मेरा दिमाग पूरी तरह से सुन्न था। कुछ देर बाद मैंने सुना कि रोहन हमारे रूम में आया। मैंने आँखें बंद कर लीं और सोने का नाटक करने लगा। वो भी अपने बिस्तर पर लेट गया और कुछ ही मिनटों में उसकी घर्राटे भरने की आवाज़ आने लगी। लेकिन मैं पूरी रात नहीं सो पाया। behan ki chudai
अगली सुबह मैं देर से उठा। सब लोग पहले से ही लॉन में नाश्ता कर रहे थे। जब मैं बाहर गया तो अंजलि ने मुझे देखकर एक प्यारी सी मुस्कान दी और बोली, |अर्जुन, इतनी देर तक सोते हैं कोई? जल्दी से नाश्ता कर मैंने उसकी तरफ देखा। वो फ्रेश लग रही थी, बिल्कुल अलग रंग की टीशर्ट और शॉर्ट्स में। लेकिन मेरी नज़रें तो बार-बार उसकी तरफ ही जा रही थीं, और मेरे दिमाग में रात के दृश्य फिर से घूमने लगे।
रोहन भी वहीं था, चाय पीते हुए और विक्की से हँसी-मज़ाक करते हुए। उसे देखकर मेरे मन में एक अजीब सी जलन और साथ ही एक अजीब सी इज्ज़त भी पैदा हुई। मैं खुद को बहुत ही कन्फ्यूज़ महसूस कर रहा था। मैंने जल्दी से नाश्ता खत्म किया और अकेले में टहलने निकल गया। मेरा मन बार-बार सोच रहा था कि क्या मैंने जो देखा वो गलत था? क्या ये सब देखना मेरे लिए सही था? लेकिन मैं अपनी उत्तेजना और उसके प्रति अपने मन में उठे विचारों को लेकर बहुत शर्मिंदा था। फिर भी, कहीं न कहीं एक इच्छा थी कि काश मैं भी अंजलि को वैसे ही चोद पाता।
दिन बीता। हम सब ने मिलकर बहुत मज़ा किया, नजदीक के झरने देखने गए, गाने गाए, खेले। अंजलि और रोहन ने भी एक सामान्य जोड़े की तरह व्यवहार किया, लेकिन अब मैं उनकी छोटी-छोटी हरकतों को एक अलग नजरिए से देख रहा था। जब भी रोहन अंजलि का हाथ पकड़ता, उसकी कमर पर हाथ रखता, या उसके कान में फुसफुसाता, मैं समझ जाता कि शायद वो रात के बारे में बात कर रहे हैं। मुझे अंजलि के चेहरे पर एक अलग ही संतुष्टि और चमक दिखाई दे रही थी, एक औरत वाली संतुष्टि।
दूसरी रात मैंने जानबूझकर सोने का नाटक किया। रोहन जब उठकर बाहर गया तो मैं भी थोड़ी देर बाद बाथरूम का बहाना करके उठा और फिर से उसी दरवाजे की दरार के पीछे जा खड़ा हुआ। इस बार मैं तैयार था। मैंने अपने फोन का कैमरा भी तैयार रखा, सोचा था कुछ रिकॉर्ड करूँगा, लेकिन फिर हिम्मत नहीं हुई और मैंने फोन जेब में ही रख लिया। behan ki chudai
आज की रात का सीन कल से भी ज्यादा गर्म था। अंजलि ने एक लाल रंग की लेस वाली ब्रा और पैंटी का सेट पहना हुआ था, जो शायद वो खासतौर पर रोहन के लिए लाई थी। वो दोनों वाइन पी रहे थे और बातें कर रहे थे। रोहन ने अंजलि को अपनी गोद में बैठा लिया था। अंजलि उसके लंड को अपनी पैंटी के ऊपर से ही रगड़ रही थी और दोनों की साँसें तेज़ हो रही थीं। रोहन ने उसकी ब्रा उतारी और उसके स्तनों को मसलने लगा। अंजलि की कराहें आज और भी बेताब थीं।
|रोहन, आज मुझे बहुत मन कर रहा है| अंजलि ने कहा और फिर खुद ही उसकी गोद से उतरकर घुटनों के बल बैठ गई और उसने रोहन की पैंट खोलकर उसका लंड बाहर निकाल लिया। आज उसने और भी जोश से उसका लंड चूसना शुरू किया, अपनी जीभ से उसके सुराख पर खेलती, गोटियाँ चाटती और फिर पूरा लंड अपने गले के अंदर तक ले जाती। |आह्ह्ह… साली कमीन… क्या चूसती है…| रोहन कराह उठा। behan ki chudai
फिर रोहन ने अंजलि को उठाकर सोफे की बाजू पर लिटा दिया। इस बार उसने उसकी पैंटी साइड से हटाई और सीधा अपना लंड उसकी चुत में ठूँस दिया। अंजलि एक पैर नीचे रखे खड़ी थी और दूसरा पैर सोफे की बाजू पर। ये एक अजीब लेकिन बहुत ही उत्तेजक पोज़िशन थी। रोहन ने उसकी एक टाँग अपने कंधे पर डाल ली और उसे बुरी तरह से चोदने लगा। इस पोज़िशन में उसका लंड अंदर तक जा रहा था और अंजलि की चुत उसे पूरी तरह से जकड़ रही थी। |हाँ… हाँ… मैं तो पागल हो रही हूँ…| अंजलि चिल्ला रही थी।
थोड़ी देर में रोहन ने उसे घुमाकर खिड़की की तरफ मुँह करके खड़ा कर दिया और पीछे से उसकी चुत में अपना लंड डाल दिया। अंजलि ने खिड़की की चौखट पकड़ ली और अपनी कमर पीछे की तरफ कर दी। रोहन ने उसके कूल्हों को पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। बाहर का अँधेरा, शीशे पर उनका अक्स, और अंजलि के स्तनों का हर धक्के के साथ उछलना, ये सब एक अलग ही समाँ बना रहा था। मेरी नज़रें उसके चेहरे पर थीं जो शीशे में साफ दिखाई दे रहा था – आँखें बंद, होंठ खुले, और पूरा चेहरा आनंद से विकृत।
|रोहन… प्लीज़… आज मेरी… गांड में डालो न…| अंजलि ने अचानक कराहते हुए कहा। मेरी तो साँस ही रुक गई। रोहन भी एक पल के लिए रुका, फिर बोला, |सच?| अंजलि ने सिर हिलाया। रोहन ने अपना लंड उसकी चुत से बाहर निकाला, जो अब पूरी तरह से गीला था, और उसी गीलेपन को लुब्रीकेंट की तरह इस्तेमाल करते हुए उसने अपने लंड का सिरा अंजलि की गांड के छेद पर रखा।
अंजलि ने अपनी साँस रोकी और अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया। रोहन ने धीरे-धीरे दबाव डाला और अंजलि की गांड का छेद खुलने लगा। |उह्ह्ह्ह्ह… आहिस्ता…| अंजलि कराही। रोहन ने धीरे-धीरे अपना लंड अंदर डाला और एक इंच भर के अंदर जाने पर अंजलि ने राहत की साँस छोड़ी।
फिर रोहन ने अपनी पकड़ मजबूत की और पूरा लंड एक झटके में अंदर कर दिया। |आआआह्ह्ह्ह… माँ…| अंजलि चीख पड़ी। रोहन ने उसके कूल्हों को पकड़कर अपनी रफ्तार बढ़ा दी और अंजलि की गांड को जोर-जोर से चोदने लगा। उसकी गांड की मांसपेशियों ने रोहन के लंड को बहुत कसकर जकड़ रखा था, जिससे रोहन को बहुत मज़ा आ रहा था। |तेरी गांड बहुत टाइट है साली…। रोहन बड़बड़ाया।
अंजलि अब दर्द और मज़े के मिले-जुले एहसास में कराह रही थी। रोहन ने एक हाथ से उसकी चुत को भी सहलाना शुरू कर दिया, जिससे अंजलि का मज़ा दोगुना हो गया। |हाँ… हाँ… तू मेरी गांड फाड़ दे… और मेरी चुत भी दबा… आह्ह्ह… मैं आ रही हूँ…| और कुछ ही सेकंड में अंजलि झड़ गई, उसका सारा शरीर काँपने लगा और रोहन ने भी अपना माल उसकी गांड के अंदर ही भर दिया।
ये सब देखकर मैं फिर से अपने को नहीं रोक पाया और मेरा भी मूठ निकल गया। मैं तुरंत वापस अपने बिस्तर पर भाग गया। आज की रात रोहन बहुत देर बाद आया, करीब एक घंटे बाद। तब तक मैं सोने का नाटक कर रहा था। behan ki chudai
तीसरे और आखिरी दिन की सुबह मौसम खराब था। बाहर बादल छाए हुए थे और हल्की बूँदाबाँदी हो रही थी। सब लोग थोड़े उदास थे क्योंकि पिकनिक खत्म होने वाली थी। मैंने अंजलि को देखा तो वो कुछ असहज लग रही थी, शायद रात की गुदाई की वजह से उसकी गांड में दर्द था। वो धीरे-धीरे चल रही थी और बैठने में भी उसे तकलीफ हो रही थी। लेकिन उसके चेहरे पर एक चमक ज़रूर थी। मैं अपनी नज़रें उससे मिलाने से कतरा रहा था, और हर बार जब वो मेरी तरफ देखती, मुझे लगता जैसे वो मेरे दिमाग को पढ़ रही है।
हम सब ने सामान समेटा और गाड़ी में बैठकर वापस देहरादून के लिए निकल पड़े। वापसी के सफर में भी गाने बज रहे थे, लेकिन मेरे कानों में तो बस अंजलि की कराहें और रोहन के चोदने की आवाज़ें गूँज रही थीं। मैंने पूरी राह आँखें बंद रखीं और उन दोनों के साथ बिताए तीन दिनों की हर रात को याद करता रहा।
घर पहुँचने पर माँ-पापा ने पिकनिक के बारे में बहुत कुछ पूछा। अंजलि ने खूब बढ़ा-चढ़ाकर सब कुछ बताया कि कितना मज़ा आया। मैं चुपचाप उसकी बातें सुनता रहा। आज तक, उस पिकनिक के बाद, अंजलि और मेरा रिश्ता ऊपर से वैसा ही है, लेकिन मेरे दिमाग में हमेशा एक विचार आता है, एक तस्वीर उभरती है जिसमें अंजलि रोहन के साथ नंगी लेटी कराह रही होती है।
मैं आज भी जब भी रोहन से मिलता हूँ, मैं उसे उसी नज़र से नहीं देख पाता, और जब भी अंजलि मुझसे प्यार से बात करती है, मेरे मन में उसके लिए इज्ज़त और साथ ही एक घिनौनी सी हवस, दोनों पैदा होती हैं। लेकिन हाँ, ये मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी और छुपाई हुई देसी हिंदी सेक्स कहानी है, जो मैंने अपनी आँखों से देखी, और जिसका राज़ मैं शायद कभी किसी को नहीं बता पाऊँगा।