ये एक देसी हिंदी सेक्स कहानी है, मेरी ज़िन्दगी की वो हॉट देसी स्टोरी जिसे मैं हमेशा दबाए रहा, एक ऐसी सच्ची घटना जो मेरी रूह में बस गई। बात उन दिनों की है जब मैं 22 साल का नौजवान था, दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाक़े में एक किराए के कमरे में रहता था और पास ही के एक प्राइवेट कॉलेज में बी.कॉम फाइनल ईयर की पढ़ाई कर रहा था। मेरा नाम विक्रम है, लेकिन उस वक़्त मैं एक आम सा लड़का था, पढ़ाई से ज़्यादा ख़याली पुलाव पकाने वाला, और ज़िंदगी में किसी बड़े तजुर्बे की तलाश में था। मेरे घर के ठीक सामने वाला मकान कुछ दिनों से बंद था, सुना था कोई नया परिवार आने वाला है, लेकिन मुझे इससे कोई ख़ास मतलब नहीं था। एक शाम जब मैं अपनी बालकनी में खड़े होकर चाय पी रहा था, तभी मैंने देखा कि सामने वाले गेट पर एक बड़ी सी गाड़ी रुकी है और कुछ लोग सामान उतार रहे हैं। Naye Padosan Dulhan ki Chudai
मेरी नज़रें अचानक एक लड़की पर टिक गईं जो गाड़ी से उतर रही थी। उसने गहरे हरे रंग का सलवार कमीज़ पहना हुआ था, हल्की सी चुनरिया सर पर थी, और हाथों में मेंहदी की लाली अभी भी गहरी थी। कानों में झुमके चमक रहे थे, पायल की छनछनाहट हवा में घुल रही थी। यह थी सना, मेरी नयी पड़ोसन, जो अभी-अभी अपनी शादी के बाद अपने पति मोहसिन के साथ इस घर में शिफ्ट हुई थी।
उसकी उम्र शायद 19 या 20 रही होगी, गेहुआं रंग, घुंघराले बालों की लटें चेहरे पर बिखर रही थीं, और एक मादक अदाएगी जो अनजाने में ही किसी का भी दिल धड़का सकती थी। मैं उसे देखता ही रह गया, वो पल भर को मुड़ी, उसकी नज़र मुझसे टकराई, वो शरमाई और नज़रें झुका कर अंदर चली गई। बस यहीं से शुरुआत हुई मेरी उस कहानी की जो मेरी पूरी ज़िंदगी बदल कर रख गई।
पहले कुछ दिन तो सिर्फ नज़रों की गुफ्तगू चली। मैं अक्सर सुबह-सुबह बालकनी में आकर खड़ा हो जाता, कभी बहाने से अखबार उठाने, कभी चाय पीने। सना भी अक्सर अपनी रसोई की खिड़की या बालकनी में नज़र आती। कभी वो पौधों को पानी देती तो कभी कपड़े सुखाने आती। हर बार हमारी नज़रें मिलतीं, एक अनकहा सा आकर्षण हम दोनों के बीच पनपने लगा था।
उसके पति मोहसिन एक प्राइवेट कंपनी में सेल्स मैनेजर थे, जिसकी वजह से वो अक्सर बाहर ही रहते थे, कभी सूरत तो कभी जयपुर। मोहसिन के माता-पिता भी इस घर में ही रहते थे, लेकिन वो दोनों बूढ़े और निहायत धार्मिक क़िस्म के इंसान थे, दिनभर टीवी पर भजन सुनते या मंदिर में बैठे रहते। इस वजह से सना घर में अक्सर अकेली सी रहती, एक नए माहौल में खुद को ढालने की कोशिश करती हुई।
मैंने एक दिन हिम्मत करके उसे हल्की सी मुस्कान दी, और मेरी ख़ुशकिस्मती से उसने भी धीरे से मुस्कुरा कर जवाब दे दिया। उस दिन के बाद से हर रोज़ एक दूसरे को देखकर मुस्कुराना हमारी आदत में शुमार हो गया। कभी-कभी मैं बाहर निकलता तो उसके घर के बाहर से गुज़रता, बहाने से पूछ लेता, |आपको इस इलाक़े में कोई दिक्क़त तो नहीं हो रही?| वो भी हल्की सी मुस्कान के साथ जवाब देती, नहीं, सब ठीक है, थोड़ा अजनबी सा लगता है बस|।
धीरे-धीरे बातचीत का सिलसिला बढ़ता गया। एक दिन वो बालकनी में खड़ी थी और तेज़ धूप के बावजूद कपड़े सुखा रही थी। मैंने अपनी बालकनी से ही पूछ लिया, इतनी धूप में क्यों खड़ी हैं आप? वो हंसी, काम तो करना ही पड़ता है ना, वरना ये घर वाले कहेंगे बहू कुछ करती नहीं। उसकी ये ईमानदारी मुझे अच्छी लगी। Naye Padosan Dulhan ki Chudai
उस शाम मैंने देखा कि मोहसिन का सामान फिर से बंध रहा है, वो अपने ऑफिस के काम से बेंगलुरु जा रहे थे एक हफ्ते के लिए। उस रात मेरे दिल में एक अजीब सी हलचल हुई, एक उम्मीद, एक डर, और एक गुनाह का एहसास। मैं जानता था कि ये गलत है, लेकिन मेरा दिल मानने को तैयार नहीं था। सना के प्रति मेरा आकर्षण दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा था, और अब जब उसका पति शहर से बाहर था, तो एक अवसर सामने था, एक ऐसा मोड़ जो हमारी ज़िंदगी को एक नयी दिशा दे सकता था।
मोहसिन के जाने के दूसरे ही दिन शाम को मैं हिम्मत जुटाकर उनके घर के बाहर गया। दरवाज़ा खटखटाया तो उसकी सास ने खोला। मैंने विनम्रता से कहा। माताजी, मैं सामने वाला विक्रम, मेरे घर में बिजली की तार में कुछ दिक्क़त है, क्या एक सीढ़ी मिल सकती है?| वो बुढ़िया कुछ बोलती उससे पहले ही सना अंदर से आती दिखी। उसने मुझे देखा तो उसकी आंखों में चमक सी आ गई। मैंने दोबारा अपनी बात दोहराई तो उसने अपनी सास से कहा।
अम्मी, आप बैठो, मैं देती हूँ इन्हें|। वो अंदर से सीढ़ी लेकर आई और दरवाज़े तक छोड़ आई। मैंने सीढ़ी लेते हुए हल्के से उसकी उंगलियों को छू लिया, जानबूझकर। वो सकपकाई, उसने तुरंत अपना हाथ पीछे खींच लिया, लेकिन उसकी नज़रों में कोई शिकवा नहीं था, बल्कि एक अनकही सहमति थी। मैंने फुसफुसाते हुए कहा, थोड़ी देर में छत पर मिलो, कुछ बात करनी है| वो घबराई, नहीं, ये ठीक नहीं… मैंने कोई जवाब नहीं दिया, बस एक गहरी नज़र से देखा और सीढ़ी लेकर अपने घर आ गया। करीब आधे घंटे बाद मैं अपनी छत पर पहुंचा। हमारी और उनकी छत के बीच सिर्फ एक छोटी सी दीवार थी, जिसे पार करना बिलकुल आसान था।
मेरा दिल ज़ोर से धड़क रहा था, हर आहट पर मुझे लगता कोई आ जाएगा। तभी मैंने पायल की हल्की सी छनक सुनी। वो आ रही थी, धीरे-धीरे, सहमी हुई। उसने सूती साड़ी पहनी हुई थी, बाल खुले हुए थे, और चेहरे पर शरमाहट और उत्सुकता का अनोखा मिश्रण था। यहाँ क्यों बुलाया? उसने धीरे से पूछा, उसकी आवाज़ हवा में कांप रही थी। मैंने उसके करीब जाकर कहा. Naye Padosan Dulhan ki Chudai
सना, मैं पिछले पंद्रह दिनों से सिर्फ तुम्हें ही देख रहा हूँ, मुझे नींद नहीं आती, पढ़ाई में मन नहीं लगता, बस तुम ही तुम नज़र आती हो वो चौंकी, पागल हो गए हो? मैं शादीशुदा हूँ…| मैंने कहा, मुझे पता है, लेकिन क्या हमारे दिलों का कसूर है?
उसने नज़रें नीची कर लीं, उसकी सांसें तेज़ हो गई थीं। मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया। उसने थोड़ा सा विरोध किया, लेकिन फिर धीरे-धीरे उसकी उंगलियां मेरी उंगलियों में उलझ गईं। चांदनी रात में उसका चेहरा और भी खूबसूरत लग रहा था, उसके होंठों की लाली चांद की रोशनी में और भी नुमाया थी।
मैंने उसकी ठुड्डी पकड़ कर चेहरा ऊपर उठाया, हमारी आंखें मिलीं। उस ख़ामोशी में हज़ारों बातें हो गईं। मैंने उसके होंठों को चूम लिया, बेहद आहिस्ता और नर्मी से। उसने विरोध नहीं किया, उल्टे उसके हाथ अपने आप मेरे कंधों पर आ गए। ये चुम्बन एक लंबे समय से दबी हुई इच्छा का विस्फोट था। होंठ मिले तो जैसे बिजली कौंध गई, हम दोनों की सांसें मानो थम गईं।
मैंने उसके निचले होंठ को हल्के से चूसा, उसने आहिस्ता से मेरे ऊपरी होंठ को अपने होंठों में लेकर चूमा। ये खेल कुछ देर तक चलता रहा। उसके बाद मैंने उसे दीवार के सहारे खींच लिया और हमारे शरीर एक दूसरे से कस कर भिड़ गए।
उसके स्तन मेरी छाती से दबे हुए थे, मैं उनकी गर्माहट और कोमलता को अपनी छाती पर महसूस कर रहा था। मैंने उसके गले को चूमना शुरू किया, उसने हल्की सी सिसकी भरी, उसका शरीर कांपने लगा।
छत पर नहीं… कोई देख लेगा…
वो बुदबुदाई। मैंने उसके कान के पास फुसफुसाकर कहा, कल दिन में, जब सब सो रहे होंगे, मेरे घर आ जाना Naye Padosan Dulhan ki Chudai
उसने हामी में सर हिलाया, अपने होंठों को फिर से मेरे होंठों से जोड़ा, और फिर तेज़ी से मुड़ी और बिना पीछे देखे सीढ़ियों से नीचे उतर गई। मैं छत पर ही खड़ा रह गया, हवा में उसकी खुशबू और उसके शरीर की गर्माहट की यादों को समेटता हुआ।
अगला दिन मेरी ज़िंदगी का सबसे लंबा दिन था। हर पल मुझे सना का ही ख़याल आ रहा था। दोपहर का वक़्त था, करीब 2:30 बजे, जब मैंने अपने घर के दरवाज़े पर दबी हुई दस्तक सुनी। मैंने दरवाज़ा खोला तो देखा सना खड़ी है, सफ़ेद रंग का सूट पहने, ज़रा सी घबराई हुई, लेकिन आंखों में एक अजीब सी उमंग लिए।
अंदर आ जाओ| मैंने कहा और धीरे से उसे अंदर खींच लिया। दरवाज़ा बंद होते ही हमारे होंठ फिर से जुड़ गए, मानो हम दोनों ने एक दूसरे से दूर रहने की कसम खाई हो। अब हम एक बंद कमरे में थे, पर्दे गिरे हुए थे, बाहर की धूप अंदर हल्की रोशनी के तौर पर झांक रही थी। मैंने उसे दीवार के सहारे लगा कर ज़ोर से चूमना शुरू कर दिया। उसके होंठ नर्म और भीगे हुए थे। मेरी ज़बान उसके मुंह के अंदर गई, उसने भी अपनी ज़बान से मेरा स्वागत किया। हमारी लार एक दूसरे के मुंह में जा रही थी, गीली, गर्म और सिहरन भरी।
मैंने उसके चेहरे को पकड़ कर और ज़ोर से चूमा, हमारे दांत टकराए, होंठ सूज गए। इस बार कोई रोक-टोक नहीं थी, सिर्फ दो जिस्मों की आग बुझने की बेताबी थी। मैंने उसके गले से लिपट कर अपने होंठ उसकी गर्दन पर रख दिए, फिर हल्के-हल्के काटने लगा। वो सिहर उठी, आआह्ह्ह्ह… उसके मुंह से पहली बार एक मादक सी कराह निकली। ये आवाज़ मेरे लिए किसी संगीत से कम नहीं थी। मैंने उसके कान की लौ को चूसा, अपनी ज़बान से उसके कान के अंदर गीला किया, फिर गर्दन पर अपनी ज़बान फेरी। उसका शरीर ढीला पड़ता जा रहा था, वो मेरे ऊपर अपना पूरा वज़न डाल रही थी।
मैंने उसे अपने बिस्तर तक खींच लिया, वो भी मानो एक नींद में चलती हुई मेरे साथ आ गई। बिस्तर पर उसे लिटा कर मैंने उसके ऊपर झुक कर उसकी आँखों को चूमा, फिर नाक की नोक, फिर गाल, फिर ठोड़ी, और आखिर में होंठ। मेरे हाथ उसकी कमर पर थे, धीरे-धीरे सहलाते हुए ऊपर की ओर बढ़ रहे थे। उसने सूट का कुर्ता पहना हुआ था, जो मेरे लिए एक दीवार की तरह था। Naye Padosan Dulhan ki Chudai
मैंने धीरे से उसके कुर्ते की पहली बटन खोली, उसने नीचे होंठ दबा लिया, हल्की सी शरमाहट उसके चेहरे पर आ गई, लेकिन विरोध नहीं किया। मैंने एक-एक करके सारी बटन खोल दीं। अब वो सिर्फ अपनी ब्रा और सलवार में थी, उसका पेट सपाट और गोरा था, नाभि गहरी और बेहद आकर्षक। मैंने झुक कर उसकी नाभि में अपनी ज़बान डाल दी, फिर उसे चूमने लगा। वो छटपटाने लगी, उसकी उंगलियां मेरे बालों में उलझ गईं। विक्रम… ये… वो कुछ कहना चाह रही थी, लेकिन उसके शब्द कराह में बदल गए जब मैंने उसके पेट पर अपने होंठ रगड़े।
मैंने अपना हाथ उसकी ब्रा पर रखा, वो पहले से ही उभरी हुई थी, उसकी छाती के उभार मानो बाहर आने को बेताब थे। मैंने पीछे से हुक खोला, और ब्रा खुलते ही उसके स्तन बाहर उछल पड़े। गोल, गोरे, उभरे हुए, और चोटी पर गुलाबी निपल्स। ये नज़ारा देखकर मेरे लंड में एक तेज़ सिहरन दौड़ गई। मैंने झुक कर उसके एक स्तन को अपने मुंह में ले लिया, दूसरे को अपने हाथ से मसलने लगा। मेरी ज़बान उसके निप्पल पर घूम रही थी, उसे चूस रही थी, हल्के से दांत गड़ा रही थी। उसकी कराहें तेज़ होती जा रही थीं, |आआअह्ह्ह्हह… उह्ह्ह्ह… विक्रम… बहुत अच्छा लग रहा है… उसने अपनी टांगें फैला दीं, और अपना हाथ मेरी पैंट पर रख दिया।
उसका हाथ जैसे ही मेरे लण्ड पर पड़ा, मैं समझ गया कि अब रुकना मुमकिन नहीं है। मैंने अपनी पैंट और अंडरवियर उतार फेंके। मेरा लौड़ा पूरी तरह खड़ा था, तना हुआ, फन की तरह उसकी तरफ इशारा करता हुआ। उसने पहली बार किसी मर्द का लंड इतने करीब से देखा था, उसकी आँखें फैल गईं, उसने अपने होंठों पर ज़बान फेरी। मैंने उसे अपनी तरफ खींचा और उसके हाथ को अपने लण्ड पर रख दिया। उसने धीरे से पकड़ा, पहले सहमी हुई, फिर धीरे-धीरे सहलाने लगी। उसकी उंगलियां मेरे लंड की नसों को छू रही थीं, एक अजीब सी गुदगुदी और करंट सी दौड़ रही थी।
मैंने उसकी सलवार उतारी, उसकी पैंटी भी गीली हो चुकी थी। उसकी चूत के बाल हल्के से कटे हुए थे, और उसकी चुत के होंठ गुलाबी और चमकदार थे। मैंने उसकी टांगों को फैलाकर अपना सर उसकी जाँघों के बीच रख दिया। उसने शरमा कर अपना चेहरा तकिए में छुपा लिया। मैंने अपनी ज़बान उसकी चुत पर फेरी। वो पूरी तरह गीली थी, एक खास नमकीन और मीठी महक आ रही थी। मैंने उसकी चूत के भीतरी होंठों को अपनी ज़बान से खोला और उसकी भगशेफ को चूसने लगा। |उह्ह्ह्ह… आआह्ह्ह्ह… हां… वहीं…| वो पागलों की तरह कराह रही थी। मैंने अपनी ज़बान से उसकी चूत को और गहराई तक चाटा, अंदर से गीलापन और बढ़ता जा रहा था। उसने मेरे बालों को ज़ोर से पकड़ लिया। मैं समझ गया कि वो अब तैयार है।
मैंने उसे अपनी तरफ खींचा और उसके ऊपर आ गया। मेरा लंड उसकी चुत के द्वार पर था। मैंने उसकी आँखों में देखा, एक सवालिया नज़र से। उसने अपनी आँखें बंद करके हामी में सर हिलाया। मैंने बहुत आहिस्ता से अपने लण्ड का फन उसकी चुत में डाला। वो अभी भी बहुत टाइट थी, हालाँकि उसकी सुहागरात को एक हफ्ता हो गया था, लेकिन उसकी चूत में अब भी कसावट थी। Naye Padosan Dulhan ki Chudai
उसने दर्द से अपने दांत भींच लिए, आआ… धीरे… उसने फुसफुसाकर कहा। मैंने आहिस्ता-आहिस्ता अपना लंड अंदर सरकाया, हर इंच के साथ एक नई गर्माहट और गीलापन मुझे घेर लेता था। जब मेरा पूरा लंड अंदर चला गया, तो मैंने एक पल के लिए रुक कर उसे महसूस किया। उसकी चुत की दीवारें मेरे लौड़े को कस कर जकड़े हुए थीं। फिर मैंने पीछे हटकर और आगे बढ़कर चुदाई शुरू की।
शुरुआत धीमी थी, मैं उसे झटके दे रहा था और उसके चेहरे के भाव बदल रहे थे। दर्द की जगह अब आनंद ले रहा था। उसने मेरी कमर पर अपनी टांगें लपेट दीं, जिससे मेरा लण्ड उसकी चुत में और गहराई तक जाने लगा। मैंने अपनी गति तेज़ कर दी, अब हमारे जिस्म टकराने लगे। बिस्तर हिल रहा था, कमरा हमारी कराहों से गूंज रहा था। |आआअह्ह्ह्हह… विक्रम… और ज़ोर से… मुझे चोदो… उसके मुंह से निकला, और मैंने उसे चोदना शुरू कर दिया। मैं लगातार चोदते जा रहा था, मेरा लंड उसकी चूत में तेज़ी से अंदर-बाहर हो रहा था। चुदाई की आवाज़ें आने लगीं, एक गीली, चिपचिपी सी आवाज़। Padosan ke Sath Suhagraat
मैंने उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख लिया, इस पोज़ीशन में मैं उसे और गहराई तक चोद पा रहा था। उसके स्तन जोर-जोर से हिल रहे थे, उसका पूरा शरीर पसीने से भीग गया था। मेरा भी पसीना उसकी छाती पर टपक रहा था। हम दोनों एक लय में थे, जैसे हम सालों से एक दूसरे को जानते हों। वो चुदवाते हुए कराह रही थी, |उह्ह्ह्ह… हां… वहीं… बस… मैं तो गई…| उसकी चीख तेज़ हो गई और उसकी पूरी चुत सिकुड़ गई, मुझे लगा वो झर गई है। उसकी इस हालत ने मुझे भी सीमा पर पहुंचा दिया। मैंने ज़ोर से अपना लंड बाहर निकाला और उसके पेट पर अपना पूरा माल गिरा दिया। गाढ़ा, सफेद, गर्म वीर्य उसके पेट पर बिखर गया। मैं उसके ऊपर ही गिर पड़ा, हम दोनों ज़ोर-ज़ोर से हाँफ रहे थे। ये पहली बार था कि हमने एक दूसरे को इतने करीब से जाना था, और ये सिर्फ शुरुआत थी।
पहली बार की चुदाई के बाद हम कुछ देर तक बिस्तर पर ही पड़े रहे, बिना कुछ बोले। मेरा हाथ उसके बालों को सहला रहा था और वो मेरी छाती पर अपनी उंगलियां फेर रही थी। ये सब बहुत नया है मेरे लिए उसने चुप्पी तोड़ी। लेकिन अच्छा लगा ना? मैंने पूछा। उसने मेरी छाती में मुंह छुपा कर हामी भरी। अभी तक दोपहर का सूरज ढल रहा था, और कमरे में हल्की रोशनी थी। मैंने उठकर पानी की बोतल से पानी पिलाया, फिर खुद भी पिया। उसकी देह पर मेरे निशान थे, गले पर, छाती पर। वो कुछ और ही खूबसूरत लग रही थी, एक संतुष्ट औरत की तरह।
मैं फिर से उसके पास आकर बैठ गया और उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया। मेरी नज़रें बार-बार उसकी जाँघों और उभरी हुई चुत पर जा रही थीं, जो अब भी गीली थी। मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा था। उसने मेरी ओर देखा और मुस्कुराई, एक शरारती सी मुस्कान। तुम फिर से… वो बोली। मैंने उसे अपनी गोद में खींच लिया, इस बार मैं चाहता था कि वो मेरे ऊपर रहे। मैंने उसे अपनी जाँघों पर बैठा लिया, मेरा खड़ा हुआ लौड़ा उसकी चूत के ठीक नीचे था। मैंने उसकी कमर पकड़ कर ऊपर उठाया और अपने लण्ड का फिर से उसकी चुत में प्रवेश कराया।
इस बार वो खुद ही नीचे बैठती गई, हर इंच को महसूस करती हुई। आआह्ह्ह्ह…वो ज़ोर से कराही। इस पोज़ीशन में मेरा लंड उसकी चुत में बिलकुल दूसरे अंदाज़ से जा रहा था, और वो खुद अपनी मर्ज़ी से हिल रही थी। उसने अपने हाथ मेरे कंधों पर रखे और धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी। उसके स्तन मेरे चेहरे के बिलकुल सामने थे, और मैंने उन्हें चूसना शुरू कर दिया। उह्ह्ह्ह… हां… बहुत मज़ा आ रहा है… वो बोली। अब वो तेज़ी से हिल रही थी, उसकी जाँघों की मांसपेशियां कस रही थीं।
मैंने उसकी कमर पकड़ कर और जोर से नीचे-ऊपर करना शुरू किया। अब हम दोनों एक साथ चिल्ला रहे थे। चोदो मुझे… वो पुकारी। और मैंने अपने कूल्हे उठाकर उसे जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। मेरा लंड उसकी चुत में धंसता जा रहा था। बिस्तर की चरमराहट, हमारे शरीरों की टकराहट, और हमारी कराहों ने पूरे कमरे को भर दिया। इस बार मैंने अपना वीर्य उसकी चुत के अंदर ही डालने का फैसला किया। Padosan ke Sath Suhagraat
जैसे ही मुझे लगा कि मैं झरने वाला हूं, मैंने उसे कस कर पकड़ लिया और अपना लौड़ा उसकी चुत में जितना गहरा जा सकता था उतना गहरा डाल दिया। मैंने ज़ोर से दहाड़ मारी और अपना पूरा वीर्य उसकी योनि में उड़ेल दिया। वो भी कांपने लगी, उसकी चुत सिकुड़ कर मेरे लंड को पूरी तरह निगल गई। |आआअह्ह्ह्हह…| उसकी एक लंबी कराह के साथ हम दोनों एक बार फिर से शांत हो गए।
उस रात मोहसिन का फोन आया तो सना घबरा गई, लेकिन उसने बहुत ही समझदारी से बात की और कहा कि वो अकेली है और उसकी सास पास ही में है। मुझे उसके इस दोहरे व्यक्तित्व ने और भी हैरान कर दिया। मेरे साथ वो एक बिलकुल अलग औरत थी, निडर, चुदक्कड़ और जोशीली। अगले दिन सुबह-सुबह वो फिर से मेरे घर आ गई, इस बार उसके पास एक बहाना था कि वो बाजार जा रही है। वो जैसे ही अंदर आई, मैंने उसे दरवाज़े के पीछे ही दबोच लिया। पागल, कल रात सोने नहीं दिया तुमने वो मुस्कुराते हुए बोली। मैंने उसकी चुनरी हटाई और उसके गले को चूमने लगा। उसके हाथों में मेंहदी की महक अब भी बाकी थी, और उसके जिस्म से एक मादक खुशबू आ रही थी। उस दिन मैंने उसे अपने किचन काउंटर पर बैठाया और उसकी सलवार उतारी। उसकी चूत अब मेरे लिए एक पहचानी सी जगह थी, लेकिन फिर भी उतनी ही रोमांचक।
मैंने अपनी ज़बान उसकी जाँघों पर फेरी, उसकी चुत की दरारों को सहलाया। उसने अपनी टांगें मेरे कंधों पर रख दीं, और मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। उसकी चूत का रस मीठा और चिपचिपा था, मेरी ज़बान उसके भगशेफ पर जैसे ही गई, उसने मेरे बाल खींच लिए। |हां… यही… उह्ह्ह्ह…| मैं चाटता रहा, चूसता रहा, उसकी चूत के हर हिस्से को अपनी ज़बान से गीला करता रहा। जब मुझे लगा कि वो काफी गीली हो गई है, तो मैंने अपना लंड बाहर निकाला। उसने मेरे लण्ड को अपने हाथ में लिया और फिर अपने मुंह के पास ले गई। ये मेरे लिए बिलकुल अनपेक्षित था। Padosan ke Sath Suhagraat
मैंने कभी नहीं किया… लेकिन मैं करना चाहती हूँ| उसने कहा। मैंने अपना लंड उसके होठों पर रखा, उसने पहले सिर्फ फन पर चुम्बन लिया, फिर अपनी ज़बान से चाटा। मैंने उसके सर को पकड़ कर हल्के से अंदर की ओर धकेला। उसने मेरे लंड के पूरे फन को अपने मुंह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया। उसकी ज़बान मेरे लंड के सिर पर घूम रही थी, उसका एक हाथ मेरी गेंदों पर था। उह्ह्ह्ह… सना… बहुत अच्छा… मैं कराह उठा। उसने अपनी गति बढ़ाई, अब वो आधे लंड को मुंह में ले रही थी और चूस रही थी।
कुछ देर बाद मैंने उसे उठाकर दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और उसकी एक टांग उठाकर खड़े-खड़े उसकी चुत में अपना लौड़ा डाल दिया। इस पोज़ीशन में चुदाई करना बेहद ही रोमांचक था। दीवार का सहारा लेकर हम लगातार झटके दे रहे थे। खड़े-खड़े चोदते हुए उसके स्तन बाहर निकल आए थे और उछल रहे थे। मैंने उन्हें दबोच लिया। चोदो… ज़ोर से चोदो मुझे… वो चीख रही थी। उस दिन हमने कई घंटों तक एक दूसरे को संतुष्ट किया। वो एक नयी-नवेली दुल्हन थी, जिसकी सुहागरात अधूरी सी थी, और उसने अपनी पूरी हवस मेरे साथ मिटाई।
दूसरी रात और तीसरा दिन हमने साथ बिताया, लगातार एक दूसरे के शरीर को नापते हुए। दूसरी रात को वो चुपके से रात के 2 बजे मेरे घर आई, जब उसके सास-ससुर गहरी नींद में थे। उस रात वो सिर्फ एक लाल रंग की सिल्क की नाइटी पहन कर आई थी। उसके नीचे कुछ नहीं था, उसका शरीर उस पोशाक में से झांक रहा था। मैंने उसे अपनी बाहों में उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया। रोशनी धीमी थी, सिर्फ एक लैम्प जल रहा था। उस रात हमने पारंपरिक तरीके से शुरुआत की। मैंने उसकी नाइटी को धीरे-धीरे उतारा, हर अंग को चूमते हुए। Padosan ke Sath Suhagraat
उसकी पीठ, उसकी कमर, उसकी नितम्ब, हर जगह मेरे होंठों ने सफर किया। उसने उलट कर मेरी छाती पर अपने होंठ रखे और मेरे निप्पल्स चूसे। उसकी ये अदा बिलकुल नई थी। उस रात हमने कुत्ते की तरह की पोज़ीशन में चुदाई की। मैंने उसे बिस्तर पर उलटा लिटा दिया और उसके कूल्हों को ऊपर उठाया। उसकी चूत पीछे से खुल कर सामने थी, गीली और चमकदार। मैंने पीछे से अपना लंड उसकी चूत में डाला, ये एक बेहद गहरी पैठ वाली पोज़ीशन थी। |उह्ह्ह्ह… बहुत अंदर जा रहा है…| वो कराही। मैंने उसके बालों को पकड़ कर हल्के से खींचा और उसे जोर-जोर से चोदने लगा। उसके नितम्ब मेरी जाँघों से टकरा रहे थे, उछल रहे थे।
मैंने अपनी उंगलियों से उसकी गांड के छेद को भी हल्के से सहलाया, जिससे वो और भी चिल्लाने लगी। मेरा लंड उसकी चुत में तेज़ी से आ-जा रहा था, हर झटके के साथ एक चिपचिपी आवाज़ आ रही थी। मैंने उसकी कमर पकड़ कर अपनी गति बहुत तेज़ कर दी। |आआअह्ह्ह्हह… अब निकल रहा है…| उसने चीखा और अपनी चूत को मेरे लंड पर कस लिया। मैंने भी अपनी गर्म वीर्य की धार उसकी चूत के अंदर ही छोड़ दी। वो बिस्तर पर ही ढेर हो गई, हाँफती हुई। मैंने उसे गले लगा लिया और हम वहीं सो गए। Padosi Nayi Dulhan ke Sath Suhagraat
तीसरी सुबह, आखिरी दिन, हम दोनों जानते थे कि अब मोहसिन वापस आने वाला है। इसलिए हमने उस दिन को बहुत ही ख़ास बनाने का फैसला किया। मैंने अपने कमरे के बाहर ताला लगा दिया और हमने पूरा दिन साथ बिताया। उसने मेरे लिए खाना बनाया, हमने साथ खाया, हंसे, बातें कीं। और फिर बिस्तर पर लेट कर पूरे दिन एक दूसरे के जिस्म को तराशते रहे। उस दिन हमने 69 पोज़ीशन में भी एक दूसरे को चूसा। वो मेरे लंड को मुंह में लिए हुए थी और मैं उसकी चूत चाट रहा था। हम दोनों एक दूसरे को चाट और चूस रहे थे, बिना किसी जल्दबाजी के। उसके मुंह में मेरा लौड़ा तना हुआ था और वो बड़ी ही सफाई से चूस रही थी। Padosan ke Sath Suhagraat
उसके बाद मैंने उसे अपनी गोद में बैठाकर, आमने-सामने की पोज़ीशन में चोदा। इस दौरान हम एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे, बिना पलक झपकाए। उसके होंठों से सिर्फ आहें निकल रही थीं। हमने कई बार चुदाई की, हर बार एक नई पोज़ीशन में जाने की कोशिश करते हुए। एक बार वो बिस्तर के किनारे पर लेटी हुई थी और मैं फर्श पर खड़े होकर उसे चोद रहा था। दूसरी बार मैंने उसे कुर्सी पर बैठाकर उसकी टांगों को कंधों पर रखकर चोदा। हर बार वो मेरी पूरी ताकत और वीर्य को अपने अंदर समेटती रही। वो अब एक पूरी तरह से संतुष्ट औरत लग रही थी, जिसे अपने शरीर की असली क़ीमत का पता चल गया हो। उसकी चुदाई करते हुए मैंने उसे बताया कि वो कितनी खूबसूरत है, और वो शरमा कर लाल हो जाती थी।
शाम ढलते-ढलते हम दोनों फिर से एक बार लिपटे हुए थे। मोहसिन की गाड़ी के वापस आने की आहट दूर-दूर तक नहीं थी, लेकिन हमारे दिलों में एक दूसरे से बिछड़ने का डर साफ झलक रहा था।
क्या हम गलत कर रहे हैं? उसने आखिरी बार पूछा। मैंने उसका माथा चूमा और कहा,
हम सिर्फ अपनी ज़रूरतें पूरी कर रहे हैं, अपने दिलों की, अपने जिस्मों की.. Padosi Nayi Dulhan ke Sath Suhagraat
उसने गहरी सांस छोड़ी और मेरी छाती पर अपना सर रख दिया। तीसरी रात हमने एक दूसरे को अंतिम बार चूमा। आखिरी बार चुदाई की। मैंने उसे आहिस्ता-आहिस्ता चोदा, बहुत प्यार से, हर झटके के साथ अलविदा कहता हुआ। उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, और मेरा दिल भी भारी था। जब मैंने उसकी चुत में अपना आखिरी वीर्य छोड़ा तो हम दोनों देर तक कांपते रहे। सुबह होने से पहले वो बिना किसी शोर के अपने घर चली गई।
मैंने उसकी पीठ को जाते हुए देखा, हमारी तीन रातों की सुहागरात को हमेशा के लिए अपनी यादों में समेटते हुए। अगले दिन मोहसिन वापस आ गया। सना फिर से एक शरीफ घरेलू बहू बन गई। लेकिन जब भी हमारी नज़रें मिलतीं, हमारे बीच बीती तीन रातों की कहानी बिना शब्दों के गूंज जाती।
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