दोस्तों ये “पड़ोस वाली रेखा आंटी की चुदाई” मेरी वो सच्ची कहानी है जिसे मैं हमेशा से अपने दिल में छुपाकर रखना चाहता था लेकिन आज पहली बार खुलकर बता रहा हूँ इस देसी हिंदी सेक्स कहानी में। मेरा नाम विक्रम है।
मैं 22 साल का लड़का हूँ और मुझे सेक्स बहुत पसंद है। मैं पुणे में रहता हूँ। मेरे पास वाले घर में एक छोटा सा परिवार रहता था जिसमें अंकल रेखा आंटी और उनका एक बेटा जो कि 5 साल का था। अंकल ज्यादातर काम के सिलसिले में बाहर रहते थे सुबह जल्दी निकल जाते और कभी कभी तो रात के 4 बजे घर लौटते। पड़ोस वाली रेखा आंटी की चुदाई
रेखा आंटी बहुत ही सेक्सी और हॉट थीं। उनका फिगर देखकर कोई भी लड़का पागल हो सकता था। बड़े बड़े बूब्स पतली कमर और मोटी गांड। मैं कभी कभी अपनी मम्मी के कहने पर उनके घर छोटे मोटे काम कर दिया करता था। इससे मेरा उनके घर आना जाना लगा रहता था क्योंकि वो अकेली रहती थीं।
एक दिन आंटी ने मुझे बुलाया और कहा कि देखो ना ये लाइट ठीक से नहीं जल रही इसे जरा ठीक कर दो। मैंने कहा ठीक है और काम में लग गया। उस वक्त आंटी ने एक हल्की मैक्सी पहनी थी जो उनके जिस्म को बहुत अच्छे से दिखा रही थी। मैंने आंटी से कहा कि मुझे एक पेचकस दो। आंटी हंसते हुए बोलीं कि वो तो तुम्हारे पास ही होगा ना।
मैं चकित रह गया और सोचने लगा कि आंटी कहना क्या चाहती हैं। फिर मैंने जल्दी से बोला कि आंटी प्लीज जल्दी दो मुझे जरूरी काम से जाना है। उन्होंने पेचकस दिया। मैंने लाइट ठीक कर दी और घर चला गया। लेकिन अब मेरे मन में आंटी की खराब नियत के बारे में विचार आने लगे थे। पड़ोस वाली रेखा आंटी की चुदाई
उसी रात मैं उनके बारे में सोच सोच कर पागल हो रहा था। मैंने मोबाइल पर ब्लू फिल्म डाउनलोड की और आंटी के बारे में गंदे गंदे खयालों के साथ मुठ मारने लगा। उनके बड़े बूब्स और मोटी गांड की कल्पना में मैं पूरी तरह खो गया था।
फिर एक दिन सुबह अंकल ने मुझे बुलाया और कहा कि आज रात तुम हमारे घर पर रह जाना क्योंकि रेखा आंटी को रात में अकेले डर लगता है और मैं सुबह 4 बजे तक लौटूंगा। मैं बहुत खुश हो गया और तुरंत हां कह दिया। पड़ोस वाली रेखा आंटी की चुदाई
शाम होते ही मैं उनके घर पहुंच गया। रेखा आंटी ने दरवाजा खोला और मुस्कुराते हुए बोलीं कि क्यों इतनी जल्दी आ गए देवर जी। मैंने कहा कि क्या करूं आंटी आपका ख्याल रखना तो मेरा काम है। हम दोनों हंस पड़े।
आंटी ने कहा आओ बैठो मैं तुम्हारे लिए चाय बना देती हूं। मैं मोबाइल साइड में रखकर बैठ गया और मन ही मन सोचने लगा कि आज कैसे इस चुदक्कड़ आंटी को चोदूं। आंटी चाय लेकर आईं। मैंने कहा कि आंटी मैं 5 मिनट में आता हूं आप इंतजार करना।
मैं जानबूझ कर मोबाइल वहीं छोड़ दिया क्योंकि मुझे पता था कि आंटी को इंटरनेट और वीडियो बहुत पसंद है। कुछ देर बाद जब मैं वापस आया तो चुपके से देखा कि आंटी अपने रूम में थीं। मेरा फोन उनके हाथ में था और वो ब्लू फिल्म देख रही थीं। साथ ही अपनी चुत में उंगली डालकर चुदवाने का मजा ले रही थीं। पड़ोस वाली रेखा आंटी की चुदाई
मैंने सोचा मौका सही है और अंदर घुस गया। आंटी चौंक गईं और फोन नीचे रख दिया लेकिन मुझे प्यारी सी स्माइल दे दी। मैंने पूछा क्या हुआ आंटी। उन्होंने कहा कुछ नहीं बस ऐसे ही देख रही थी।
मैंने कहा आंटी कुछ तो है आप मुझे बताना नहीं चाहतीं तो आपकी मर्जी। फिर आंटी बोलीं कि तुम अपने फोन में यह सब क्यों रखते हो। मैंने कहा क्या आंटी। उन्होंने कहा ज्यादा भोले मत बनो विक्रम।
मैंने सोचा अब बात घुमाने का फायदा नहीं। मैंने कहा कि आंटी जब से आपको देखकर सोचने लगा हूं मेरी हालत खराब हो गई है। मैं ऐसे वीडियो देखकर आपके बारे में सोच सोचकर मुठ मारता हूं।
आंटी ने कहा कि मैं भी तुम्हें बहुत समय से देख रही थी। तुम मेरी छाती और गांड को घूरते रहते हो। यह सुनते ही मैं उनके बेड पर बैठ गया और बोला कि क्या आप मुझसे सेक्स करना चाहोगी।
आंटी ने कहा यह गलत है अगर अंकल को पता चला तो क्या होगा। मैंने कहा कोई कहेगा तभी पता चलेगा ना। फिर मैंने उनका हाथ अपने लंड पर रख दिया और उनकी जांघों पर हाथ फिराने लगा।
आंटी गरम होने लगीं और मेरे लौड़े को हाथ में लेकर चूसने लगीं। वाह क्या चूस रही थीं वो। मैं तो अलग ही दुनिया में पहुंच गया था। पहली बार किसी ने मेरा लंड चूसा था। मैंने उनका सर पकड़कर उनके मुंह में जोर जोर से लंड के धक्के मारे। पड़ोस वाली रेखा आंटी की चुदाई
फिर मैंने कहा रेखा बस करो अब मेरी बारी है। मैं उनके बूब्स दबाने लगा। वो उछल रही थीं लेकिन मेरा लंड हाथ से छोड़ने का नाम नहीं ले रही थीं। धीरे धीरे मैं उनके पूरे जिस्म को चूमने लगा।
अब बारी आई उनकी चुत की। उनकी चुत बहुत गोरी थी और उस पर हल्के बाल थे। मैं पागलों की तरह उनकी चुत चाटने लगा। आंटी की हालत बयान से बाहर थी। वो चीख रही थीं आह उउंम्म चाट मेरी चुत और जोर से।
तुम्हारे अंकल भी इतना अच्छा नहीं करते। फिर मैंने उनकी गांड भी चाटी। सेक्स में क्या बुरा क्या भला। बस मजा आ रहा था। रेखा आंटी चुदवाती हुई पूरी तरह तैयार हो चुकी थीं। पड़ोस वाली रेखा आंटी की चुदाई
मैंने उन्हें लिटाया और अपना लंड उनकी चुत पर रगड़ा। फिर धीरे से अंदर डाला। आंटी चीख उठीं लेकिन चुदाई का मजा लेने लगीं। मैं जोर जोर से उन्हें चोदते हुए धक्के मार रहा था।
वो चुदक्कड़ आंटी चुत चुदवाने के लिए तड़प रही थीं। मैंने उन्हें कई पोजिशन में चोदा। कभी मिशनरी कभी डॉगी स्टाइल। हर बार उनका लौड़ा अंदर तक घुस रहा था।
आंटी बार बार चीख रही थीं चोद मुझे विक्रम और जोर से चोद। मेरी चुत फाड़ दो आज। मैं भी पूरी ताकत से लंड अंदर बाहर कर रहा था।
आखिरकार मैं उनकी चुत में ही झड़ गया। वो भी एक साथ चरम पर पहुंच गईं। हम दोनों पसीने से तर होकर लेट गए। पड़ोस वाली रेखा आंटी की चुदाई
थोड़ी देर बाद फिर से हमारा खेल शुरू हो गया। इस बार आंटी ऊपर आईं और मेरे लौड़े पर बैठकर खुद चुदवाने लगीं। उनका शरीर उछल रहा था।
मैं उनके बूब्स दबाते हुए नीचे से धक्के मार रहा था। रात भर हम चुदाई करते रहे। सुबह होने तक कई बार हम दोनों झड़ चुके थे।
उसके बाद से मेरी और रेखा आंटी की चुदाई लगातार चलने लगी। जब भी अंकल बाहर जाते हम मौका देखकर एक दूसरे को चोदते। वो पूरी तरह चुदक्कड़ बन गई थीं।
दोस्तों ये थी पास वाली आंटी की बजाई घंटी की पूरी कहानी। मैंने अपनी जिंदगी की वो घटना जो हमेशा छुपाना चाहता था आज आपको बता दी। पड़ोस वाली रेखा आंटी की चुदाई
दोस्तो ये मेरी अपनी सच्ची रोमांटिक कहानी है अगर आपको पसंद आई तो कमेंट करके जरूर बताना।