साहेब की बहन की चुदाई का Amazing Experience

दोस्तो साहेब की बहन की चुदाई ये मेरी वो सच्ची कहानी है जो मैं सालों से अपने दिल में छुपाकर रखना चाहता था लेकिन आज मैं आपको इस देसी हिंदी सेक्स कहानी में बताने जा रहा हूँ जो बहन की चुदाई कहानी है सरिता दीदी ने मुझे और प्रिया को सेक्स करते हुए देख लिया था प्रिया मेरे नीचे लेटी थी और उस वक्त वो अपनी चुत में मेरा मस्त लंड लिए हुए पड़ी थी प्रिया सरिता दीदी को नहीं देख पाई थी शर्म या अपनी इज्जत को ध्यान में रखते हुए शायद सरिता दीदी ने उस समय कुछ नहीं कहा लेकिन यकीन मानिए मेरी जबरदस्त गांड फट गई थी मुझे पूरा यकीन था कि अब नौकरी तो जाएगी ही साहेब जेल में भी बंद करा दे तो कोई बड़ी बात नहीं होगी इससे हुआ यह कि मेरा अच्छा खासा मस्त खड़ा लंड एकदम से चूहा हो गया। साहेब की बहन की चुदाई 

मैंने लंड निकालते हुए प्रिया से कहा कि कुछ गड़बड़ लग रही है शायद उधर कोई था।

उसने मेरी बात सुनी तो तुरंत कपड़े पहने और वहाँ से निकल गई।

शाम तक का टाइम बिताना मेरे लिए पहाड़ जैसा हो गया था और बहुत डर भी लग रहा था मैंने सोचा कि चाचा को फोन करके सब बता देता हूँ लेकिन सोचा कि अभी देखते हैं जब ज्यादा गलत लगेगा तो चाचा को फोन करूँगा। साहेब की बहन की चुदाई 

शाम के करीब 5 बजे सरिता दीदी का फोन मेरे मोबाइल पे बजा उनका नंबर देखते ही मेरा शरीर काँपने लगा मैंने डरते हुए फोन उठाया।

सरिता दीदी गरजती आवाज़ में कहा कहाँ हो तुम तुरंत ऊपर मेरे पास आओ।

इससे पहले कभी उन्होंने मुझसे ऐसे बात नहीं की थी मैं समझ गया कि आज तो थप्पड़ पड़ेंगे और जेल भी जाना पड़ेगा।

खैर हिम्मत करके ऊपर गया और चुपचाप उनके सामने आंखें नीची करके खड़ा हो गया। साहेब की बहन की चुदाई 

सरिता दीदी ने गुस्से से गरजते हुए कहा मैं तुम्हें अपने घर का सदस्य समझती थी भाई जैसा प्यार दिया तुमको और तुमने जिस थाली में खाया उसी में छेद किया नमकहराम साहेब को आने दो तुम्हें जेल में ना करवाया तो कहना तुम्हें ज़रा भी शर्म नहीं आई अपनी छोटी बहन से गंदा काम करते हुए।

मैं बहुत डर गया था कि आज तो सब खत्म हो गया है बस किसी तरह से जान बच जाए और मैं यहाँ से भागूं।

तभी मेरे दिमाग ने कहा कि सरिता दीदी को बात सब खुल कर बताना चाहिए हो सकता है जान बच जाए।

मैंने हाथ जोड़ कर कहा प्लीज आप मुझे कुछ कहने का अवसर तो दो।

उन्होंने घूर कर देखा और मुझसे गुर्राते हुए कहा बोलो। साहेब की बहन की चुदाई 

तो मैंने हिम्मत करके उनको शुरू से लेकर अब तक का सब कुछ बताया कि कैसे उस लड़के ने प्रिया को प्रेगनेंट किया था और मैंने उनका अबॉर्शन करवाया था और किन हालत में प्रिया और मेरे बीच में सेक्स हुआ अगर मैं नहीं करता तो प्रिया किसी और से मजा लेती और फिर से चक्कर में फंस जाती।

मैंने सरिता दीदी को ये भी बताया कि मैं प्रिया से शादी नहीं करूँगा और प्रिया भी एकदम क्लियर है हमारा रिश्ता सिर्फ प्रिया की शादी तक का है और मैं आज ही नौकरी छोड़ कर चला जाता हूँ बस आप मुझे माफ कर दो और किसी को कुछ ना कहो। साहेब की बहन की चुदाई 

कुछ देर तक डांट पिलाने के बाद सरिता दीदी ने उस टाइम मुझे जाने दे दिया बड़ी मुश्किल से रात कटी इस बीच प्रिया का फोन आया तो मैंने कहा कि कुछ नहीं हुआ है लेकिन मुझे डर है कि शायद किसी ने हमें देख लिया है इसीलिए हमें अब सावधान रहना चाहिए और कुछ दिन तक ज्यादा बात नहीं करनी चाहिए।

प्रिया भी मान गई सुबह सब नॉर्मल था साहेब जी साहेबानी जी ने कुछ नहीं कहा सारे काम हर रोज की तरह हो रहे थे मैं साहेब जी फैक्ट्री में छोड़ कर आया इस सब का मतलब यही था कि सरिता दीदी ने अभी तक बम्ब नहीं फोड़ा था। साहेब की बहन की चुदाई 

यह महसूस करके मुझे थोड़ी सी राहत हुई कि शायद जेल तो नहीं जाना पड़ेगा पर हां नौकरी तो पक्का जाएगी क्योंकि सरिता दीदी अब मुझे घर में तो रहने नहीं देगी।

करीब 12 बजे सरिता दीदी का फोन आया उन्होंने गुस्से में कहा गाड़ी निकालो मुझे कुछ मार्केट में काम है। साहेब की बहन की चुदाई 

मैं तैयार हो गया था सरिता दीदी ने गुस्से से मुझे देखा और पीछे बैठ गई मेरी गांड फट रही थी कि ये औरत जाने क्या करेगी।

उन्होंने एक बाग के सामने गाड़ी रुकवाई और मुझे बाग में चलने को कहा।

लेकिन सरिता दीदी ने इस पर कुछ नहीं कहा और हम घर आ गए।

अगले दिन साहेब जी फैक्ट्री चले गए साहेबानी जी अपनी सहेलियों के साथ चली गईं। साहेब की बहन की चुदाई 

प्रिया दूसरे ड्राइवर के साथ कॉलेज चली गई तभी सरिता दीदी ने मुझे ऊपर बुलाया मैं ऊपर गया तो वो नाइटी में थीं और अपने कमरे की अलमारी से कुछ तलाश कर रही थीं।

मैं उनकी कामुक अवस्था देखते ही समझ गया कि ना तो नौकरी जाएगी ना ही जेल जाना पड़ेगा अब तो सरिता दीदी भी अपनी चूत देंगी।

मैंने तुरंत सोच लिया कि अबकी बार कोई गलती नहीं करूँगा उनकी नाइटी में से ब्रा पेंटी साफ दिख रही थी शायद उन्होंने सब कुछ जानबूझ कर ही इस ड्रेस को पहना था अब तो मैं चूत का खिलाड़ी हो गया था।

मैंने कहा सरिता दीदी आपने बुलाया। साहेब की बहन की चुदाई 

सरिता दीदी विक्रम मैं तुमसे ज्यादा बड़ी नहीं हूँ मेरा नाम लिया करो या फिर बड़ी दीदी बोला करो।

मैं ठीक है बड़ी दीदी आज के बाद बड़ी दीदी कहूँगा नाम तो नहीं ले सकता सब कुछ सोचने लगेंगे।

बड़ी दीदी अच्छा सुनो मैं एक डायरी तलाश रही हूँ प्लीज तुम जरा मेरी हेल्प कर दो।

जी बड़ी दीदी।

वो जानबूझ कर पलंग के नीचे देखने लगीं उस समय उनकी मस्त गांड उभर कर बाहर आ गई और छोटी सी पेंटी उनके चूतड़ों में फंसी गजब ढा रही थी पहली बार मैंने फील किया कि उनका बदन तो प्रिया जैसा ही मस्त है उनकी 34 इंच की चुची 30 इंच की कमर और 36 इंच के चूतड़ों को देख कर ही मजा आ गया।

उनकी उभरी गांड देख कर मेरा लंड उठने लगा मैंने उसे अपने अंडरवियर में सैट करना चाहा लेकिन हो नहीं रहा था।

मैं बड़ी दीदी आप रहने दो मैं देखता हूँ। साहेब की बहन की चुदाई 

दीदी अरे तुम देख ही नहीं पाओगे तू तो बस मेरी हेल्प कर।

वो उठ कर सीधी खड़ी हो गई उन्होंने मेरे खड़े लंड को शायद देख लिया था।

उन्होंने एक स्टूल मंगवाया और उस पर चढ़ कर देखने लगीं मैंने स्टूल को पकड़ा हुआ था उस समय मेरा मुंह उनके चूतड़ों के पास था शायद जानबूझकर उन्होंने ऐसा किया था मैंने बचने की बहुत कोशिश की लेकिन वो धीरे धीरे पीछे हो रही थीं आखिर मेरे गाल उनके एक चूतड़ से टच हो गए मैं भी नहीं हिला समझ तो वो भी गई थीं फिर उन्होंने मुड़ने के बहाने अपने दूसरे चूतड़ को भी मेरे गाल से टच करवाया मौके पर चौका मारते हुए मैंने उनके चूतड़ों पे अपनी गरम सांस छोड़ते हुए किस कर दिया। साहेब की बहन की चुदाई 

आह बड़ा मखमली एहसास था गद्देदार थे उनके चूतड़ बड़े दिनों बाद औरत के चूतड़ों को इतने करीब से देखने का मौका मिला था।

जब उन्होंने कुछ नहीं कहा तो मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैंने धीरे से उनके दोनों चूतड़ों के बीच में हल्का सा किस कर दिया वो थोड़ी सी कसमसाई लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा मैं समझ गया कि चुत का इंतजाम हो गया है अब तो सरिता दीदी और प्रिया दोनों की चुत मिला करेगी।

दीदी अरे यहाँ तो नहीं मिल रही इस तरफ देखती हूँ।  साहेब की बहन की चुदाई 

यह कहकर वो घूम गईं और अब उनकी चुत मेरे सामने थी एकदम मस्त खुशबू आ रही थी शायद सरिता दीदी ने अपनी चुत में कोई सैंट लगाया हुआ था।

वो थोड़ा सा आगे को आईं तो उनकी जांघें मेरे गालों के पास थीं मैंने हिम्मत करके उनकी जांघ को हल्का सा चूम लिया उन्होंने कुछ नहीं कहा।

दोस्तो ये मेरी अपनी सच्ची रोमांटिक कहानी है अगर आपको पसंद आई तो कमेंट करके जरूर बताना।

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