माँ को पडोसी विक्रम अंकल के साथ चुदते देखा दरवाजे के छेद से | Maa ko Padosi chudte dekha
ये उन दिनों की बात है जब मैं अपनी ज़िंदगी के एक ऐसे मोड़ पर खड़ा था जहाँ न तो कुछ समझ आ रहा था और न ही कुछ सोच पा रहा था। इस Antarvasna से भरी दुनिया में मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन ऐसा भी आएगा जब मैं अपनी आँखों से कुछ ऐसा देखूंगा जो मेरी पूरी ज़िंदगी बदल कर रख देगा। ये एक ऐसी Sex Story है जिसे मैं आज तक अपने सीने में दबाए हुए था, एक ऐसी Kamukta जो मेरे अंदर कहीं गहरे दबी हुई थी और आज मैं इसे पूरी ईमानदारी के साथ बयां करने जा रहा हूँ। Maa ko Padosi chudte dekha
मेरी उम्र उस वक्त 19 साल थी और मैं अपनी माँ के साथ दिल्ली के एक छोटे से इलाके में किराए के मकान में रहता था। पापा का देहांत मुझे बचपन में ही हो गया था और माँ ने अकेले ही मुझे पाल-पोस कर बड़ा किया था। माँ का नाम सुनीता था और वो उस वक्त करीब 38 साल की थीं, लेकिन अपनी उम्र से काफी कम दिखती थीं।
उनका शरीर एकदम भरा हुआ और सुडौल था, गेहुंआ रंग, लंबे घने बाल और बड़ी-बड़ी आँखें। माँ अक्सर साड़ी पहनती थीं और उनकी चाल में एक अलग ही मस्ती थी जो किसी का भी ध्यान अपनी तरफ खींच लेती थी। ये एक ऐसी Antarvasana है जिसे शायद मैं कभी बयां नहीं कर पाता, लेकिन आज हिम्मत जुटा रहा हूँ।
हमारे पड़ोस में विक्रम अंकल रहते थे, उम्र करीब 42 साल, कद-काठी से एकदम मज़बूत और दिखने में काफी हैंडसम। वो अकेले ही रहते थे, उनकी बीवी का कुछ साल पहले एक्सीडेंट में देहांत हो गया था। वो एक प्राइवेट कंपनी में काम करते थे और अक्सर शाम को जल्दी घर आ जाते थे। Maa ko Padosi chudte dekha
माँ और विक्रम अंकल के बीच एक अच्छी दोस्ती थी, अक्सर वो हमारे घर आते, चाय पीते और माँ से बातें करते। मुझे शुरू में इसमें कुछ खास नहीं लगा, लेकिन धीरे-धीरे मुझे उनकी नज़रों में कुछ और ही नज़र आने लगा। ये Hindi Sex Story उसी सच्चाई का एक हिस्सा है जिसे मैंने अपनी आँखों से देखा और जिसे आज तक छुपा कर रखा।
वो जुलाई का महीना था और बाहर बारिश की रिमझिम फुहारें पड़ रही थीं। मौसम बड़ा सुहावना था, ठंडी-ठंडी हवाएं चल रही थीं और आसमान में बादल घिरे हुए थे। मैं अपने दोस्त के घर से लौट रहा था कि अचानक बारिश तेज़ हो गई। मैं भीगता हुआ घर पहुंचा, दरवाज़ा खोला तो देखा कि घर में सन्नाटा था।
मैंने आवाज़ लगाई, «माँ, मैं आ गया» लेकिन कोई जवाब नहीं आया। मेरे कपड़े पूरी तरह भीग चुके थे और मुझे तेज़ ठंड लग रही थी। मैंने सोचा शायद माँ बाज़ार गई हैं या किसी काम से बाहर हैं, लेकिन फिर मुझे विक्रम अंकल के जूते बाहर दरवाज़े पर रखे दिखे। Maa ko Padosi chudte dekha
ये देखकर मुझे थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि आमतौर पर जब भी विक्रम अंकल आते थे तो माँ मुझे पहले ही बता देती थीं। खैर, मैंने सोचा शायद वो बैठकर बातें कर रहे होंगे। मैं अपने कमरे की तरफ बढ़ा ही था कि अचानक मेरे कानों में एक अजीब सी आवाज़ आई। मैं ठिठक गया। आवाज़ माँ के कमरे की तरफ से आ रही थी।
मैंने ध्यान से सुना तो वो कुछ हल्की-हल्की सिसकियों और हांफने की आवाज़ें थीं। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। ये Sex Stories का वो पहला अध्याय था जो मेरी ज़िंदगी में लिखा जाने वाला था, और मैं इससे बेखबर था।
मैं धीरे-धीरे माँ के कमरे की तरफ बढ़ा। कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद था, लेकिन पुराना दरवाज़ा होने की वजह से उसमें एक छोटा सा छेद था, जो शायद ताले की जगह बना था और बाद में वहाँ से ताला हटा दिया गया था। वो छेद इतना बड़ा था कि उसमें से कमरे के अंदर का नज़ारा आराम से देखा जा सकता था। मैंने अपनी सांस रोकी और उस छेद से झांकने लगा। अंदर का नज़ारा देखकर मेरे पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक गई। मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं और मेरे मुँह से आवाज़ तक नहीं निकल रही थी।
माँ बिस्तर पर थीं, पूरी तरह नंगी। उनकी साड़ी और ब्लाउज़ फर्श पर बिखरे पड़े थे। उनका सुडौल शरीर बिस्तर पर पूरी तरह फैला हुआ था और उनके ऊपर विक्रम अंकल थे, वो भी पूरी तरह नंगे। विक्रम अंकल का शरीर काफी मज़बूत और गठीला था, उनकी चौड़ी छाती, उभरी हुई बांहें और एकदम सपाट पेट। Maa ko Padosi chudte dekha
लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाली चीज़ थी उनका लंड, जो एकदम खड़ा हुआ था और जिसे देखकर मेरी सांसें तेज़ हो गईं। वो इतना बड़ा और मोटा था कि मैंने अपनी ज़िंदगी में कभी ऐसा नहीं देखा था, शायद 7 या 8 इंच का रहा होगा और उतना ही मोटा।
माँ विक्रम अंकल के नीचे लेटी हुई थीं और उनके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान और संतुष्टि का भाव था। विक्रम अंकल माँ के ऊपर झुके हुए थे और उनकी एक हथेली माँ के बाएं स्तन पर थी, जिसे वो धीरे-धीरे सहला रहे थे। माँ का स्तन देखने में एकदम पके हुए आम जैसा लग रहा था, बड़ा, गोल और भरा हुआ।
उनके निप्पल एकदम उभरे हुए थे और विक्रम अंकल उन्हें बारी-बारी से दबा रहे थे। माँ की सांसें तेज़ हो रही थीं और उनके मुँह से हल्की-हल्की कराहें निकल रही थीं। «उह्ह्ह्ह्ह… विक्रम… धीरे…», माँ की आवाज़ कांप रही थी।
विक्रम अंकल ने अपना चेहरा माँ के स्तनों पर झुका दिया और उनके निप्पल को अपने मुँह में ले लिया। वो उसे चूसने लगे, अपनी जीभ से सहलाने लगे, काटने लगे। माँ ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उनके मुँह से एक और ज़ोरदार कराह निकली, «आआह्ह्ह्ह… हाँ… बिल्कुल वहीं…»। माँ ने अपने दोनों हाथ विक्रम अंकल के सिर पर रख दिए और उन्हें अपने स्तनों पर और ज़ोर से दबाने लगीं। विक्रम अंकल ने दूसरे स्तन को भी अपने हाथों से ज़ोर-ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया और माँ की कराहें और तेज़ हो गईं।
मैं वहीं दरवाज़े के पीछे खड़ा-खड़ा कांप रहा था। मेरे शरीर में एक अजीब सी हलचल हो रही थी, एक ऐसी गर्मी जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। मेरा अपना लंड मेरी पैंट में खड़ा हो चुका था और मैं उसे दबाने की कोशिश कर रहा था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं, कहाँ जाऊं, लेकिन मेरी आँखें उस छेद से हट ही नहीं रही थीं। ये एक ऐसी Kamukta भरी दोपहर थी जिसने मेरे अंदर की सारी सीमाएं तोड़ दी थीं।
विक्रम अंकल अब माँ के स्तनों से हटकर नीचे की तरफ आ गए थे। उन्होंने माँ की टांगों को फैला दिया और उनके बीच अपना चेहरा सरका दिया। माँ ने अपनी टांगें खुद-ब-खुद और फैला दीं। मैंने देखा कि माँ की चुत पूरी तरह गीली थी, बाल वहाँ हल्के से थे और उनकी फूली हुई लाल-लाल चुत एकदम साफ दिख रही थी।
विक्रम अंकल ने अपनी जीभ बाहर निकाली और माँ की चुत को चाटना शुरू कर दिया। माँ के शरीर में जैसे करंट सा दौड़ गया, «आआअह्ह्ह्ह्हह… हे भगवान… ये क्या कर रहे हो…»Maa ko Padosi chudte dekha
विक्रम अंकल रुके नहीं, बल्कि और तेज़ी से माँ की चुत को चाटने लगे। वो अपनी जीभ से उनकी चुत के हर हिस्से को सहला रहे थे, कभी ऊपर तो कभी नीचे, कभी अंदर डालकर तो कभी बाहर निकालकर। माँ की चुत से रस टपक रहा था जिसे विक्रम अंकल बड़े चाव से पी रहे थे। माँ बिस्तर पर तड़प रही थीं, उनकी कमर उछल रही थी और उनके हाथ विक्रम अंकल के बालों को जकड़े हुए थे। «उह्ह्ह्ह्ह… अंदर डालो… प्लीज़… अब बहुत हो गया…», माँ की आवाज़ अब भीख मांगने जैसी हो गई थी।
ये देखकर मेरा लंड और भी सख्त हो गया था। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरी माँ, जिन्हें मैं हमेशा एक सीधी-सादी औरत समझता था, वो इस तरह से किसी मर्द के सामने तड़प सकती हैं। लेकिन साथ ही ये सब देखकर मेरे अंदर एक अजीब सी उत्तेजना भी भर रही थी, एक ऐसा एहसास जिसे मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता। ये मेरी ज़िंदगी का वो Hindi Sex Story का लम्हा था जिसने मुझे पूरी तरह बदल दिया।
विक्रम अंकल अब माँ की चुत चाटते-चाटते थक गए थे और अब वो ऊपर आ गए। उन्होंने माँ की दोनों टांगों को पकड़कर उनके घुटनों को मोड़ दिया और उन्हें माँ की छाती तक ले आए। माँ अब बिल्कुल खुल चुकी थीं, उनकी चुत एकदम सामने थी और वो विक्रम अंकल का इंतज़ार कर रही थीं।
विक्रम अंकल ने अपना लंड पकड़ा और उसे माँ की चुत के बिल्कुल पास ले गए। वो अपने लंड के सिरे को माँ की चुत पर रगड़ने लगे, धीरे-धीरे, बहुत आराम से। माँ की सांसें थम गई थीं, उनकी आँखें बंद थीं और उनके होंठ कांप रहे थे।
«अब डालो विक्रम… प्लीज़… बहुत इंतज़ार करवा दिया…», माँ ने गिड़गिड़ाते हुए कहा। विक्रम अंकल ने धीरे से अपने लंड का सिरा माँ की चुत में डाला। माँ ने एक ज़ोरदार सांस ली, «आआह्ह्ह्ह…»। विक्रम अंकल ने और ज़ोर लगाया और उनका लंड धीरे-धीरे माँ की चुत के अंदर सरकने लगा। माँ की चुत ने उनके लंड को पूरी तरह से जकड़ लिया। विक्रम अंकल ने अपनी कमर को आगे बढ़ाया और उनका पूरा लंड माँ की चुत में समा गया।
«उह्ह्ह्ह्ह… म्म्म्म… इतना बड़ा…», माँ की आवाज़ दब गई थी। विक्रम अंकल अब माँ को चोदने लगे थे। वो अपनी कमर को पीछे ले जाते और फिर ज़ोर से आगे करते। हर बार जब वो अपना लंड बाहर निकालते, माँ की चुत का रस उनके लंड पर चिपका हुआ दिखता और फिर जब वो अंदर डालते तो एक गीली सी आवाज़ आती। «चप… चप… चप…» की आवाज़ें कमरे में गूंज रही थीं। माँ के मुँह से लगातार कराहें निकल रही थीं और विक्रम अंकल का शरीर पसीने से तर-बतर हो गया था। Maa ko Padosi chudte dekha
मैं वहाँ खड़ा-खड़ा ये सब देख रहा था और मेरी अपनी स्थिति भी कुछ खास अच्छी नहीं थी। मेरा लंड मेरी पैंट में तन गया था और मैंने अनजाने में ही अपना हाथ अपने पैंट के अंदर डाल लिया था। मैं अपने लंड को सहलाने लगा, बिल्कुल वैसे ही जैसे विक्रम अंकल माँ को चोद रहे थे। मैं अपने आप को रोक नहीं पा रहा था, ये सब इतना उत्तेजक था कि मेरा शरीर खुद-ब-खुद हरकत करने लगा था।
विक्रम अंकल अब माँ की टांगों को अपने कंधों पर रखकर चोद रहे थे। इस पोज़ीशन में उनका लंड माँ की चुत में और गहराई तक जा रहा था। वो बहुत तेज़ी से चोद रहे थे, उनकी कमर की मूवमेंट इतनी तेज़ थी कि देखकर लग रहा था जैसे कोई मशीन चल रही हो। माँ के स्तन ऊपर-नीचे हिल रहे थे और उनकी चुत से चुदाई का रस बहता हुआ बिस्तर तक आ गया था। «आआह्ह्ह्ह… म्म्म… ओह्ह्ह… चोदो मुझे… और ज़ोर से…», माँ अब पूरी तरह बहक चुकी थीं।
माँ के ये शब्द सुनकर मुझे एक साथ कई सारी भावनाओं ने घेर लिया। एक तरफ मुझे अपनी माँ को इस तरह देखकर बहुत अजीब लग रहा था, तो दूसरी तरफ मेरा शरीर पूरी तरह उत्तेजित था और मैं अपना लंड ज़ोर-ज़ोर से हिला रहा था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि माँ जैसी शरीफ औरत भी इस तरह से किसी मर्द से चुदवा सकती है और इतनी बेशर्मी से चोदने के लिए कह सकती है। लेकिन ये सब देखकर मेरे अंदर का जानवर जाग चुका था और मैं बस देखता ही जा रहा था।
विक्रम अंकल अब माँ को डॉगी स्टाइल में चोदना चाहते थे। उन्होंने अपना लंड माँ की चुत से बाहर निकाला और माँ को पलटकर पेट के बल लिटा दिया। माँ ने अपने घुटनों के बल खड़े होकर अपनी कमर को ऊपर उठा लिया और अपनी चुत विक्रम अंकल के सामने कर दी। विक्रम अंकल ने माँ के कूल्हों को पकड़ा और अपना लंड एक बार फिर से माँ की चुत में डाल दिया। इस बार उनका लंड और भी गहराई तक गया क्योंकि इस पोज़ीशन में माँ की चुत पूरी तरह खुल गई थी।
«आआअह्ह्ह्ह्हह… ये क्या हो रहा है… बहुत गहरा जा रहा है…», माँ चिल्लाई। विक्रम अंकल ने कोई जवाब नहीं दिया, बल्कि वो और तेज़ी से चोदने लगे। उनकी जांघें माँ के नितंबों से टकरा रही थीं और ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ें आ रही थीं। विक्रम अंकल ने माँ के बालों को पकड़ लिया और उन्हें पीछे की तरफ खींचने लगे। माँ की गर्दन पीछे की तरफ मुड़ गई और उनकी कराहें और तेज़ हो गईं। «चोदो… और ज़ोर से… मुझे पूरा भर दो…», माँ बदहवास हो चुकी थीं। Maa ko Padosi chudte dekha
मैं अब तक अपने हाथ से अपने लंड को तेज़ी से हिला रहा था और मैं भी अपनी उत्तेजना के चरम पर पहुँचने वाला था। मेरी सांसें तेज़ हो गई थीं और मेरा पूरा शरीर कांप रहा था। विक्रम अंकल ने माँ की कमर को पकड़कर और तेज़ी से चोदना शुरू कर दिया और उनके मुँह से भी अब सिर्फ हांफने की आवाज़ें आ रही थीं। «अब मैं झड़ने वाला हूँ सुनीता…», विक्रम अंकल ने भारी आवाज़ में कहा। «हाँ… मेरे अंदर… मेरी चुत में… सब डाल दो…», माँ ने चिल्लाकर कहा।
विक्रम अंकल ने एक आखिरी ज़ोरदार धक्का लगाया और उनका पूरा लंड माँ की चुत में एकदम गहराई तक चला गया। उनके शरीर में एक कंपकपी दौड़ी और मैंने देखा कि वो माँ की चुत के अंदर ही झड़ गए। उसी पल मेरा भी पानी मेरी पैंट में ही निकल गया। मैं वहीं फर्श पर बैठ गया और मेरा शरीर ढीला पड़ गया। माँ भी बिस्तर पर ढेर हो गईं और विक्रम अंकल उनके ऊपर गिर पड़े।
कमरे में कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया, सिर्फ दोनों की तेज़ सांसों की आवाज़ें आ रही थीं। मैं धीरे-धीरे वहाँ से उठा और अपने कमरे की तरफ चल दिया। मेरे कदम लड़खड़ा रहे थे और मेरा दिमाग पूरी तरह सुन्न था। मैंने अपने कमरे में जाकर अपने गीले कपड़े उतारे और बिस्तर पर लेट गया।
मैं सोच रहा था कि आखिर मैंने वहाँ जो देखा, वो क्या था? क्या मेरी माँ और विक्रम अंकल के बीच सच में ऐसा कुछ चल रहा था? मुझे विश्वास नहीं हो रहा था, लेकिन जो मैंने अपनी आँखों से देखा था, वो झूठ तो नहीं हो सकता था।
ये सच्चाई मेरे लिए एक झटके की तरह थी, लेकिन साथ ही उस दिन मेरे अंदर कुछ जाग चुका था। मेरे शरीर में एक ऐसी गर्मी, एक ऐसी उत्तेजना जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं की थी। माँ के उस रूप को देखने के बाद मैं उन्हें उसी नज़र से नहीं देख पा रहा था जैसे पहले देखता था। अब जब भी माँ मेरे सामने आतीं, मुझे उनका वो नंगा शरीर, उनकी चुत, उनकी कराहें सब याद आ जातीं और मेरा लंड खड़ा हो जाता। ये एक ऐसी Antarvasna थी जो मेरे अंदर हमेशा के लिए बस गई थी। Maa ko Padosi chudte dekha
उसके बाद कई दिनों तक मैं विक्रम अंकल के घर आने का इंतज़ार करता, उस छेद से झांकने के लिए, उसी नज़ारे को दोबारा देखने के लिए। कई बार ऐसा हुआ जब वो आए और मैंने चुपके से वहाँ से झांककर देखा, लेकिन हर बार उतना सबकुछ नहीं दिखता था।
लेकिन जिस दिन वो सब हुआ था, वो दिन मेरी ज़िंदगी का सबसे यादगार दिन बन गया था। आज भी जब मैं अकेला होता हूँ, तो मुझे वो नज़ारा याद आता है और मेरा शरीर उसी तरह उत्तेजित हो जाता है। ये मेरी ज़िंदगी की वो सच्ची कहानी है जिसे मैं हमेशा छुपाना चाहता था, लेकिन आज मैंने सबको बता दिया।
वैसे तो माँ को विक्रम अंकल के साथ चुदते देखना मेरे लिए बहुत बड़ा झटका था, लेकिन उसके बाद मेरे अंदर एक अलग ही तरह की सोच जाग उठी। मैं सोचता था कि माँ भी एक औरत हैं और उनकी भी शारीरिक ज़रूरतें हैं। पापा के जाने के बाद उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी मेरे लिए लगा दी, लेकिन एक औरत होने के नाते उनके अंदर भी एक आग थी जिसे बुझाने के लिए उन्हें किसी मर्द की ज़रूरत थी। और विक्रम अंकल से बेहतर मर्द शायद ही कोई हो सकता था, जो उन्हें पूरी तरह से संतुष्ट कर सके।
मैंने कई बार सोचा कि माँ से इस बारे में बात करूं, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाया। आखिर बेटा होने के नाते मेरी कुछ सीमाएं थीं और मैं उन्हें लांघना नहीं चाहता था। लेकिन एक बात तो तय थी कि उस दिन के बाद मैं माँ को कभी भी एक साधारण माँ की तरह नहीं देख पाया। मेरे लिए वो एक औरत बन चुकी थीं, एक ऐसी औरत जो अपनी चुदाई के लिए किसी भी हद तक जा सकती थी। और ये सोचकर ही मेरे अंदर की Kamukta और भी बढ़ जाती थी।
समय बीतता गया और विक्रम अंकल का हमारे घर आना-जाना लगा रहा। माँ हमेशा की तरह उनका स्वागत करतीं, चाय बनातीं और बातें करतीं, लेकिन अब मुझे उनकी आँखों में वो चमक दिखती थी जो पहले नहीं दिखती थी। उनकी साड़ी पहनने का अंदाज़ बदल गया था, वो थोड़ा और नीचे पल्लू रखतीं, थोड़ा और टाइट ब्लाउज़ पहनतीं। शायद वो नहीं जानती थीं कि मैं उनका राज़ जान चुका हूँ, लेकिन मैं सब समझ रहा था। Maa ko Padosi chudte dekha
एक दिन की बात है, मैं अपने कमरे में बैठा पढ़ाई कर रहा था कि मुझे फिर से वही आवाज़ें सुनाई दीं। मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा और मैं समझ गया कि आज फिर वही होने वाला है। मैं धीरे-धीरे अपने कमरे से बाहर निकला और माँ के कमरे की तरफ गया। दरवाज़ा फिर से बंद था और मैंने अपनी आँखें उस छेद पर लगा दीं।
इस बार माँ विक्रम अंकल के ऊपर थीं। वो पूरी तरह नंगी थीं और उनका लंड माँ की चुत में था। माँ उछल-उछल कर उस पर बैठ रही थीं, उनके स्तन हवा में झूल रहे थे और उनकी चुत से लगातार रस बह रहा था। विक्रम अंकल नीचे लेटे हुए थे और माँ के कूल्हों को पकड़े हुए थे। «आआह्ह्ह्ह… आज तो मैं तुम्हें पूरी रात चोदूंगी…», माँ चिल्ला रही थीं।
ये देखकर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मैं वहीं खड़े-खड़े अपनी पैंट उतारकर अपने लंड को हिलाने लगा। ये मेरी ज़िंदगी का सबसे बड़ा राज़ था, एक ऐसी Antarvasana जो शायद कभी किसी को नहीं बतानी चाहिए थी, लेकिन आज मैंने बता दी। Maa ko Padosi chudte dekha
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