दोस्तों, ये मेरी वो असली घटना है जिसे मैं हमेशा से अंदर ही अंदर छुपाकर रखना चाहता था लेकिन आज मैं आपको अपनी पूरी सच्ची कहानी देसी हिंदी सेक्स कहानी के रूप में बता रहा हूँ। मेरा नाम राहुल है और मेरी उम्र 23 साल है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे शहर का रहने वाला हूँ। मुझे कामुक कहानियाँ पढ़ना बहुत पसंद है और जब भी समय मिलता है मैं ऐसी साइट्स पर आ जाता हूँ। दोस्तों मैंने सोचा क्यों न अपनी ये अनकही कहानी आप सबके साथ शेयर कर दूँ।
दोस्तों मेरी अपनी एक छोटी सी दुकान है और ठीक उसके बगल में ही एक लेडीज ब्यूटी पार्लर चलता है जिसकी मालकिन रेखा हैं। वो दिखने में एकदम हॉट और सेक्सी हैं अगर आप एक बार देख लो तो आपका लंड तुरंत खड़ा हो जाएगा। मैंने अपनी दुकान कुछ महीने पहले ही खोली थी लेकिन वो वहाँ पिछले कई सालों से काम कर रही हैं। मैं उनसे ज्यादा बातचीत नहीं करता था बस दूर से उन्हें देखा करता था और मन ही मन कल्पनाएँ करता रहता था।
वो बारिश का मौसम था और शाम के करीब 6-7 बज रहे थे तभी अचानक बहुत तेज हवा चली और जोरों से बारिश शुरू हो गई। साथ ही बिजली भी चली गई। उनका पति बहुत ज्यादा शराब पीता था तो वो उस दिन भी पीकर लड़खड़ाता हुआ दुकान पर आया। उसके सारे कपड़े कीचड़ में सने हुए थे शायद कहीं गिर पड़ा था और उसके मुंह से तेज शराब की बदबू आ रही थी। वो आते ही रेखा को गालियाँ देने लगा।
रेखा ने उनसे कहा कि आप घर जाओ मैं थोड़ी देर बाद आती हूँ। मुझे ये सब देखकर बहुत बुरा लग रहा था इसलिए मैंने रेखा से पूछ लिया कि क्या वो हमेशा ऐसा करते हैं। उन्होंने कुछ जवाब नहीं दिया और अपने पार्लर में जाकर रोने लगीं। मुझे ये देखकर अच्छा नहीं लग रहा था तो मैं भी उनके पीछे अंदर चला गया और बोला कि आप बहुत परेशान लग रही हैं ना।
तभी वो मुझ पर जोर से चिल्लाईं और बोलीं कि तुम मुझे और ज्यादा परेशान मत करो प्लीज यहाँ से चले जाओ। मैं भी वहाँ से बाहर निकल आया और अपनी दुकान में चला गया। फिर रात के 8.30 बजे उन्होंने मुझे आवाज लगाई। मैं तुरंत उनके पास चला गया और उनके सामने खड़ा हो गया। उन्होंने मुझे सॉरी कहा तो मैंने कहा कि कोई बात नहीं सब ठीक है। फिर वो फिर से रोने लगीं और मुझे अपनी सारी बातें बताने लगीं कि उनके पति रोज शराब पीकर आते हैं गालियाँ देते हैं और कभी-कभी मार भी देते हैं।
मैंने उन्हें पानी पिलाया और रोने से मना किया। हमारी दुकानों के बाहर तेज बारिश हो रही थी और हमें घर जाना था लेकिन बारिश की वजह से निकलना मुश्किल था। तो मैंने सोचा क्यों न यहीं बैठकर रेखा का मूड ठीक किया जाए। मैंने इधर-उधर की बातें शुरू कीं और उनका मन बहलाने लगा। जैसे-जैसे उनका मूड ठीक होता गया मेरा लंड खड़ा होता गया और मैं बार-बार उनके बड़े बूब्स की तरफ देख रहा था।
उस दिन उन्होंने काली साड़ी पहनी हुई थी और उनके बड़े-बड़े बूब्स ब्लाउज से बाहर झाँक रहे थे। मेरा तो बस झड़ने ही वाला था और मैं बार-बार अपने लंड को पैंट में सेट कर रहा था कहीं वो मेरा खड़ा लौड़ा देख न लें। अब वो मुझसे बहुत अच्छे से हँस-हँसकर बात कर रही थीं एकदम अच्छे दोस्त की तरह। फिर मैंने मौका देखकर उनसे पूछ लिया कि क्या आपके पति आपको संतुष्ट नहीं करते हैं।
तभी उनके चेहरे पर हँसी गायब हो गई और उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मैं टेंशन में आ गया कि कहीं वो नाराज न हो जाएँ इसलिए मैंने कहा कि चलो मैं घर जाता हूँ। उन्होंने कहा कि रुक जाओ थोड़ी देर बारिश रुकने दो फिर चले जाना। मैं उनके कहने पर वहीं रुक गया। फिर उन्होंने पूछा कि तुमने अभी कुछ देर पहले ऐसा क्यों पूछा कि मैं संतुष्ट हूँ या नहीं।
मैंने कहा कि मेरे दिल में आया तो पूछ लिया। उनकी आँखें गीली हो गईं और मैं समझ गया कि वो अपने पति से बहुत नाखुश हैं। अब मुझे अच्छा भी लग रहा था क्योंकि मुझे चांस मिल गया था। फिर मैं उनके पास जाकर बैठ गया और हिम्मत करके उनके कंधे पर हाथ रख दिया। उन्होंने तुरंत अपने हाथ से मेरे हाथ को दबा लिया तो मैं समझ गया कि आज मेरी लॉटरी लग गई।
मैं फिर उनकी पीठ पर हाथ ले गया और धीरे-धीरे सहलाने लगा। उन्हें बहुत अच्छा लग रहा था और वो लंबी-लंबी साँसें भरने लगीं। मैंने कहा कि एक मिनट रुको मैं दरवाजा बंद करता हूँ। मैं उठा और पार्लर का काँच बंद करके अंदर से शटर नीचे खींच लिया। उस समय बिजली नहीं थी और इमरजेंसी लाइट भी कम हो रही थी। वो चुपचाप खड़ी थीं।
मैं उनके पास गया और उन्हें जोर से पकड़ लिया। उन्होंने भी मुझे कसकर पकड़ लिया। उनके बूब्स मेरी छाती से दब रहे थे। मैं उनकी पीठ मसल रहा था और हम दोनों को बहुत मजा आ रहा था। फिर मैंने उनकी साड़ी उतार दी। अब वो मेरे सामने सिर्फ ब्लाउज और पैंटी में थीं। मैंने धीरे-धीरे ब्लाउज के ऊपर से ही उनके बूब्स दबाने और सहलाने शुरू किए।
तभी उन्होंने अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ लिया और दबाने लगीं। मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। मैंने उन्हें पूरा नंगा कर दिया और खुद भी नंगा हो गया। फिर मैंने उन्हें किस किया और थोड़ी देर बाद मेरा खड़ा लौड़ा उनकी चुत में पूरा घुस गया। वो आहह उफ्फ्फ सीईईई कर रही थीं।
मैंने उन्हें गोद में उठाकर कुर्सी पर बिठाया और उनके दोनों पैर कुर्सी के हैंडल पर रखने को कहा जिससे उनकी चुत पूरी तरह चौड़ी हो गई। उनकी चुत पर हल्के-हल्के बाल थे और चुत रस से एकदम गीली थी। थोड़ी देर बाद मैं उनकी चुत में अपनी जीभ घुमाने लगा। मैंने अपनी उँगली से चुत को चौड़ा करके अंदर डालना शुरू किया और जीभ को बहुत अच्छे से चुत के अंदर घुमाता रहा। वो आहह उफ्फ… कर रही थीं।
उनकी चुदाई देखकर मैं और ज्यादा उत्तेजित हो गया। मैंने उन्हें कुर्सी पर ही लिटा दिया और अपना लौड़ा उनकी चुत पर रगड़ने लगा। फिर एक झटके में पूरा लंड उनकी चुत में डाल दिया। वो चीख उठीं लेकिन मजा भी ले रही थीं। मैं जोर-जोर से चोदते हुए उन्हें चोद रहा था। वो चुदवाती हुई बोलीं कि और तेज चोदो राहुल। मैंने उन्हें चुदक्कड़ बनाते हुए लंड अंदर बाहर करना शुरू किया।
हम दोनों चुदाई में पूरी तरह मगन थे। मैं उनकी चुत को लंड से भर रहा था और वो मेरे लंड को अपनी चुत में ले रही थीं। हम चोदते-चुदवाते ही रहे। मैंने उन्हें अलग-अलग पोज में चोदा। कभी कुर्सी पर कभी फर्श पर। उनकी चुत मेरे लंड को चूस रही थी। मैंने उन्हें चुदवाने के बाद अपनी चुदाई पूरी की और उनकी चुत में झड़ गया।
फिर हम दोनों थककर लेट गए। वो मेरे सीने पर सर रखकर लेटी रहीं और बोलीं कि आज के बाद तुम मुझे रोज चोदना। मैंने कहा कि हाँ रेखा अब हम दोनों की चुदाई रोज चलेगी। बारिश रुक गई थी लेकिन हम दोनों पार्लर में ही रहे। हमने फिर से चुदाई शुरू की। इस बार वो ऊपर थी और मेरे लंड पर बैठकर चुद रही थी।
उस रात हमने कई बार चोदते हुए एक-दूसरे को संतुष्ट किया। सुबह होने तक हम दोनों की चुदाई चलती रही। अब से हम रोज मिलते हैं और चुदाई करते हैं। उनकी चुत अब मेरे लंड की चुदक्कड़ बन गई है। दोस्तों ये थी पड़ोस की ब्यूटी पार्लर वाली की मेरी सच्ची चुदाई कहानी।
दोस्तो, ये मेरी अपनी सच्ची रोमांटिक कहानी है, अगर आपको पसंद आई तो कमेंट करके जरूर बताना।