Antakshari ke khel mein Didi ki chudai

मजाक मजाक में निशा दीदी चूत देदी अंताक्षरी खेलने में

ये कहानी है मेरी ज़िंदगी की एक ऐसी सच्ची घटना जिसे मैं हमेशा से छुपाना चाहता था, एक ऐसा राज़ जो आज तक किसी को नहीं बताया। इस Antarvasna से भरी कहानी में वो सब कुछ है जो शायद ही किसी ने अपनी ज़िंदगी में महसूस किया हो। ये एक ऐसी Kamukta थी जो धीरे-धीरे बढ़ती गई और एक दिन हदें पार कर गई। इस Hindi Sex Story में मैं आपको अपने दिल की हर बात, हर एहसास और हर पल के बारे में खुलकर बताऊंगा। Didi ki chudai

मेरा नाम अर्जुन है और ये कहानी है मेरी और मेरी पड़ोसन निशा दीदी की। मैं तब 21 साल का था और दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में एक छोटे से फ्लैट में अकेला रहता था। मेरे पापा-मम्मी गाँव में रहते थे और मैं यहाँ पढ़ाई करने आया था। निशा दीदी मेरी बगल वाले फ्लैट में रहती थीं, उनकी उम्र करीब 34 साल थी और वो एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करती थीं। उनके पति अमित जी अक्सर बिज़नेस के सिलसिले में बाहर रहते थे, कभी मुंबई तो कभी बैंगलोर, महीनों घर नहीं होते थे।

निशा दीदी को देखकर ही मन में एक अजीब सी हलचल होती थी। वो बहुत खूबसूरत थीं, गोरा रंग, लंबे काले बाल जो अक्सर खुले रहते थे, और उनकी आँखों में एक अजीब सी गहराई थी। उनका फिगर भी कमाल का था, भरे हुए स्तन जो हमेशा कुर्ते के नीचे से झाँकते रहते, पतली कमर और चौड़े कूल्हे। जब भी वो सीढ़ियों से उतरती-चढ़ती, उनके कूल्हों की लय देखने लायक होती। मैं अक्सर अपनी बालकनी में खड़ा होकर उन्हें जाते-आते देखता रहता और मन ही मन उनके बारे में सोचता रहता।

एक दिन शाम को मैं अपने फ्लैट के बाहर खड़ा था कि तभी निशा दीदी आईं और बोलीं, अर्जुन, आज शाम को मेरे घर आना, कुछ मदद चाहिए मैं तुरंत हाँ कर दिया और मन ही मन खुश हो गया। शाम करीब 6 बजे मैं उनके फ्लैट पर गया। दरवाज़ा खोला तो निशा दीदी ने, आज वो एक हल्के गुलाबी रंग के सूट में थीं, चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी। आ जाओ, अंदर उन्होंने कहा और मैं अंदर चला गया। फ्लैट बहुत सुंदर तरीके से सजा हुआ था, दीवारों पर पेंटिंग्स, कोने में एक बड़ा सा सोफा, और सामने एक बड़ी सी टीवी। Didi ki chudai

देखो, मुझे ये नया टीवी स्टैंड जोड़ना है, मुझसे नहीं हो रहा। तुम्हारे जवान हाथ हैं, कर दोगे उन्होंने कहा और मुस्कुराईं। मैंने कहा, कोई बात नहीं दीदी, कर दूंगा मैंने औज़ार उठाए और काम में लग गया। निशा दीदी पास ही किचन में कुछ बनाने लगीं। थोड़ी देर बाद वो मेरे पास आईं और एक गिलास ठंडा शरबत लेकर आईं। लो, पहले ये पी लो उन्होंने कहा। मैंने शरबत पिया और फिर से काम में लग गया। उनकी मौजूदगी से कमरे का माहौल ही बदल गया था।

करीब एक घंटे की मेहनत के बाद टीवी स्टैंड तैयार हो गया। अरे वाह, तुमने तो कमाल कर दिया निशा दीदी खुशी से बोलीं। अब इतनी मेहनत की है तो खाना भी मेरे साथ ही खाओगे उन्होंने आगे कहा। मैंने कहा, नहीं दीदी, अभी मैं चलता हूँ लेकिन उन्होंने ज़ोर दिया और मुझे रोक लिया। वो किचन में गईं और प्लेट में खाना लगाकर ले आईं। हम दोनों साथ बैठकर खाना खाने लगे। खाना बहुत स्वादिष्ट था, मैंने उनकी तारीफ की तो वो शरमा गईं।

खाना खाते-खाते हमारी बातचीत शुरू हो गई। मैंने पूछा, अमित जी कब आएंगे? उन्होंने थोड़ा उदास होकर कहा, बस, इस बार तो तीन महीने हो गए, अभी तो कोई खबर नहीं मैंने महसूस किया कि वो अकेली बहुत बोर होती हैं। कोई बात नहीं दीदी, मैं हूँ ना, जब भी कोई काम हो बता देना मैंने कहा तो वो मुस्कुरा दीं। खाने के बाद मैंने जाने के लिए कहा तो उन्होंने कहा, रुको, अभी तो मिठाई खाओगे वो अंदर गईं और एक प्लेट में दो गुलाब जामुन ले आईं। Didi ki chudai

मिठाई खाते वक्त उनका हाथ अचानक मेरे हाथ से छू गया और मुझे एक करंट सा लगा। मैंने घबराकर अपना हाथ पीछे खींच लिया। उन्होंने शायद नोटिस नहीं किया या नोटिस करके भी अनदेखा कर दिया। मैं जल्दी से खड़ा हो गया और बोला, अच्छा दीदी, अब मैं चलता हूँ, रात हो रही है उन्होंने कहा, अच्छा, जाओ, कल फिर आना, कुछ और भी काम है मैंने हाँ कहा और अपने फ्लैट पर आ गया। उस रात मुझे नींद नहीं आई, बार-बार उनका चेहरा, उनकी मुस्कान, और वो पल जब उनका हाथ मेरे हाथ से छुआ था, याद आता रहा।

अगले कुछ दिनों में मेरा उनके घर आना-जाना बढ़ गया। कभी कोई सामान लाना होता, कभी बिजली का कोई काम, तो कभी बस ऐसे ही बात करने। मैंने देखा कि निशा दीदी मुझसे बात करते वक्त अक्सर अपने बालों को इधर-उधर करतीं, अपने होठों पर जीभ फिरातीं, और कभी-कभी तो अपने कपड़े भी थोड़े एडजस्ट करतीं जैसे जानबूझकर मेरा ध्यान अपनी तरफ खींच रही हों। मैं सोचता कि शायद मुझे भ्रम हो रहा है, लेकिन फिर लगता कि नहीं, ऐसा कुछ है ज़रूर।

एक दिन शाम को मैं अपने फ्लैट में बैठा पढ़ाई कर रहा था कि तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई। खोला तो निशा दीदी थीं। आज वो बिल्कुल अलग लग रही थीं, एक ब्लैक कलर की साड़ी में, ब्लाउज थोड़ा डीप नेक वाला था, और पल्लू को उन्होंने बहुत ही कैज़ुअली डाला हुआ था। क्या कर रहे हो? उन्होंने पूछा। पढ़ रहा था दीदी मैंने जवाब दिया। चलो मेरे घर, बहुत बोर हो रही हूँ, कुछ बातें करते हैं उन्होंने कहा और बिना मेरे जवाब का इंतज़ार किए मुड़कर चलने लगीं। मैंने दरवाज़ा बंद किया और उनके पीछे-पीछे चला गया। Didi ki chudai

उनके फ्लैट में जाकर हम सोफे पर बैठ गए। उन्होंने टीवी ऑन किया लेकिन देख कोई नहीं रहा था।  बहुत बोर होती हूँ अर्जुन, अमित जी का कोई फोन भी नहीं आता ठीक से  उन्होंने कहा।  कोई बात नहीं दीदी, मैं हूँ ना, आप जब चाहो बुला लिया करो   मैंने कहा। वो मुस्कुराईं और फिर अचानक बोलीं,  अच्छा एक बात बताओ, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड है? मैं थोड़ा शर्मा गया और बोला,  नहीं तो दीदी, पढ़ाई में ध्यान लगा रहा हूँ  वो हँस पड़ीं,  अच्छा, तो प्यार-व्यार नहीं किया कभी?  मैंने सिर हिला दिया।  कोई सेक्स वगैरह?  उन्होंने सीधा सवाल पूछ दिया। मैं चौंक गया और मेरे चेहरे का रंग उड़ गया।

ये सवाल सुनकर मैं बिल्कुल सन्न रह गया। मैंने कभी किसी लड़की से इस तरह की बात नहीं की थी, और यहाँ मेरी ही पड़ोसन दीदी मुझसे ऐसे सवाल पूछ रही थीं। मैं कुछ बोल नहीं पाया, बस नज़रें झुका लीं। वो फिर से हँसीं और बोलीं, अरे, इतना शर्माते क्यों हो? ये तो नॉर्मल बात है। मैं तुम्हारी दीदी जैसी हूँ, मुझसे शेयर करने में क्या प्रॉब्लम है?  उन्होंने अपना हाथ मेरे कंधे पर रख दिया और मुझे हल्का सा सहलाया। मेरे शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गई। मैंने धीरे से कहा,  नहीं दीदी, ऐसा कुछ नहीं किया उन्होंने कहा,  अच्छा, तो तुम बिल्कुल फ्रेश हो  और मेरी तरफ देखकर मुस्कुराईं।

माहौल थोड़ा अजीब हो गया था। निशा दीदी उठकर किचन में गईं और दो गिलास पानी लेकर आईं। पानी पीते हुए भी उनकी नज़रें मुझ पर ही टिकी थीं।  अर्जुन, तुम जानते हो, एक औरत के लिए अकेलापन कितना मुश्किल होता है?  उन्होंने अचानक गंभीर होकर कहा।  जब पति पास ना हो, बात करने को कोई ना हो, सब कुछ सूना-सूना सा लगे  उनकी आवाज़ में एक दर्द था।

मैंने कहा,  मैं समझ सकता हूँ दीदी  वो बोलीं,  नहीं, तुम नहीं समझ सकते। एक औरत की ज़रूरतें सिर्फ बातें करने से पूरी नहीं होतीं ये कहते हुए उन्होंने मेरी तरफ गहराई से देखा। उनकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, कुछ ऐसा जो मैंने पहले कभी नहीं देखा था।

वो अपनी सीट पर थोड़ा और पास सरक आईं। अब हमारे बीच बस कुछ इंच का फासला था। उनके शरीर से आ रही गर्माहट मुझे महसूस हो रही थी, और उनके परफ्यूम की खुशबू मेरे दिमाग को सुन्न किए दे रही थी।  तुम बहुत अच्छे लड़के हो अर्जुन, और बहुत हैंडसम भी  उन्होंने कहा और अपना हाथ मेरे बालों में फेर दिया। मैं सकपका गया, मेरी धड़कनें तेज़ हो गईं।

दीदी, ये क्या कर रही हैं?  मैंने हिम्मत जुटाकर पूछ ही लिया। वो मुस्कुराईं और बोलीं,  कुछ नहीं, बस ऐसे ही। तुम्हें बुरा लग रहा है?  मैंने कहा,  नहीं, लेकिन…   इससे पहले कि मैं कुछ और कहता, उन्होंने मेरे होठों पर अपनी उंगली रख दी और कहा,  चुप

फिर अचानक निशा दीदी ने अपनी साड़ी का पल्लू नीचे सरका दिया और मेरा हाथ पकड़कर अपने स्तनों पर रख दिया। मैं अवाक रह गया। मेरे हाथों के नीचे उनके स्तनों की नरमी और गर्माहट महसूस कर मेरा दिमाग जैसे काम करना बंद कर गया। दीदी… मैंने धीमी आवाज़ में कहा। उन्होंने मेरी तरफ देखा और बोलीं,  आज कोई दीदी-वीदी नहीं, बस निशा हूँ मैं, समझे? उनकी आवाज़ में एक अजीब सी प्यास थी। मुझे समझ आ रहा था कि ये गलत है, लेकिन मेरा शरीर मेरे काबू में नहीं था। ये मेरी ज़िंदगी की सबसे बड़ी Kamukta थी, एक ऐसी घटना जो इस Sex Story का सबसे रोमांचक हिस्सा बनने वाली थी। Didi ki chudai

निशा दीदी ने अपना ब्लाउज और नीचे सरका दिया और मेरे दोनों हाथों को अपने स्तनों पर रख लिया। दबाओ इन्हें, ज़ोर से उन्होंने कहा। मेरे हाथ काँप रहे थे, लेकिन मैंने उनकी बात मान ली और उनके स्तनों को सहलाने लगा। उनके स्तन बड़े और मुलायम थे, और मेरे दबाने पर वो हल्की सी कराह उठीं।  आआह्ह्ह्ह… हाँ, ऐसे ही उन्होंने कहा और अपनी आँखें बंद कर लीं। मैंने उनके स्तनों के बीच की दरार में अपनी उंगलियाँ फिराईं और फिर उनकी निप्पल्स को हल्के से दबाया। उनकी निप्पल्स सख्त हो चुकी थीं और उन्हें छूते ही वो ज़ोर से कराह उठीं।

अपने कपड़े उतारो उन्होंने अचानक आँखें खोलकर कहा। मैं थोड़ा हिचकिचाया तो वो खुद ही मेरी टी-शर्ट के नीचे हाथ डालकर मेरी छाती सहलाने लगीं। तुम्हारा शरीर बहुत टोन्ड है उन्होंने कहा और मेरी टी-शर्ट ऊपर खींच दी। मैंने खुद ही अपनी टी-शर्ट उतार दी और निशा दीदी ने मेरी छाती पर हाथ फेरते हुए कहा, बहुत अच्छे हो तुम फिर उन्होंने अपना ब्लाउज पूरी तरह उतार दिया और अपने स्तनों को मेरे सामने खोल दिया। ये नज़ारा देखकर मेरी साँसें तेज़ हो गईं। उनके स्तन बिल्कुल परफेक्ट शेप में थे, गोल, भरे हुए और निप्पल्स हल्के भूरे रंग के।

आओ, चूसो इन्हें उन्होंने कहा और मेरे सिर को अपने स्तनों की तरफ खींच लिया। मैंने अपना मुँह खोला और उनकी एक निप्पल को अपने होठों में ले लिया। जैसे ही मैंने उसे चूसना शुरू किया, निशा दीदी के मुँह से एक लंबी सिसकारी निकली, उह्ह्ह्ह्ह… हाँ अर्जुन, बिल्कुल ऐसे ही मैं ज़ोर-ज़ोर से उनके स्तनों को चूसने लगा, बारी-बारी से एक को और फिर दूसरे को।

मेरी जीभ उनकी निप्पल्स पर गोल-गोल घूम रही थी और वो लगातार कराह रही थीं। उनकी कराहट सुनकर मेरे शरीर का तापमान बढ़ता जा रहा था और मेरा लंड पूरी तरह सख्त हो चुका था।

कुछ देर तक मैं उनके स्तनों को चूसता रहा, फिर मेरे हाथ अपने आप नीचे की तरफ बढ़ने लगे। मैंने उनकी कमर को सहलाया और फिर धीरे-धीरे उनके कूल्हों पर हाथ फेरने लगा। निशा दीदी ने अपनी साड़ी की गाँठ खोल दी और साड़ी नीचे सरक गई। अब वो सिर्फ अपने पेटीकोट और ब्लाउज में थीं, जो ब्लाउज तो पहले ही उतर चुका था।

पूरा उतार दो मुझे उन्होंने कहा और मैंने उनका पेटीकोट नीचे खींच दिया। अब वो सिर्फ अपनी पैंटी में थीं, उनका शरीर देखकर मेरी आँखें फटी रह गईं। उनका फिगर बहुत ही खूबसूरत था, पतली कमर और चौड़े कूल्हे, और उनकी पैंटी के नीचे से उनकी चूत की शेप साफ झलक रही थी।

अब तुम्हारी बारी निशा दीदी ने कहा और मेरी जींस की बेल्ट खोलने लगीं। उन्होंने बड़ी सफाई से मेरी जींस उतार दी और अब मैं सिर्फ अपने अंडरवियर में था। मेरे लंड की सख्ती साफ दिखाई दे रही थी और निशा दीदी ने मेरे अंडरवियर के ऊपर से ही मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया। वाह, बहुत बड़ा है तुम्हारा तो उन्होंने कहा और मुस्कुराईं। मुझे शर्म आ रही थी लेकिन साथ ही एक अजीब सा उत्साह भी हो रहा था। ये मेरी ज़िंदगी का पहला मौका था जब कोई औरत मेरे इतने करीब थी, और वो भी इस कदर। Didi ki chudai

निशा दीदी ने मेरा अंडरवियर नीचे खींचा और मेरा लंड बाहर कूद गया। वो पूरी तरह खड़ा था और उसका सिरा चमक रहा था। कितना सुंदर है उन्होंने कहा और फिर अचानक झुककर मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया। मैं चीख पड़ा, इतनी तेज़ सनसनी मेरे पूरे शरीर में दौड़ गई कि मैंने उनके बाल पकड़ लिए। उह्ह्ह्ह्ह… दीदी… मैं बस इतना ही कह पाया।

वो मेरे लंड को ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगीं, कभी पूरा मुँह में लेतीं, कभी सिर्फ सिरे को चूसतीं, और कभी अपनी जीभ से मेरे लंड की पूरी लंबाई पर गोल-गोल घुमातीं। मेरे शरीर से एक के बाद एक सिहरन दौड़ रही थी और मुझे लग रहा था कि कहीं मैं उनके मुँह में ही ना निकल जाऊँ।

आआह्ह्ह्ह… आआअह्ह्ह्ह्हह… मैं कराह उठा जब उन्होंने मेरे लंड को और गहराई तक अपने गले में उतार लिया। वो मुझे देख रही थीं, उनकी आँखों में एक शैतानी चमक थी। वो मेरे लंड को चूसती रहीं, कभी तेज़ तो कभी धीमे, कभी अपने हाथों से मेरे टट्टों को सहलातीं तो कभी मेरे लंड की जड़ को दबातीं। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और इस एहसास को पूरी तरह महसूस करने लगा। ये एक ऐसी कामुकता थी जो मैंने कभी सोची भी नहीं थी, एक ऐसी Antarvasna जो मेरे हर रोम-रोम में समा गई थी।

करीब पाँच मिनट तक वो मेरे लंड को चूसती रहीं, फिर अचानक रुक गईं और बोलीं, अब तुम मुझे चाटो, मेरी चूत को मैं बिना कुछ सोचे-समझे हाँ कर दिया। निशा दीदी ने अपनी पैंटी उतार दी और सोफे पर पीठ के बल लेट गईं, अपने पैर फैलाकर। उनकी चूत का नज़ारा देखकर मेरा दिमाग घूम गया। वहाँ पर हल्के बाल थे, और उनकी चूत के होंठ गीले और सूजे हुए से लग रहे थे। उनकी चूत से रस टपक रहा था, और वो बिल्कुल तैयार थीं। Didi ki chudai

आओ, चाटो इसे, बहुत दिनों से प्यासी है मेरी चूत उन्होंने कहा और मेरा सिर अपनी जाँघों के बीच खींच लिया। मैंने पहली बार किसी औरत की चूत को इतने करीब से देखा था, उसकी महक, उसकी गर्माहट, सब कुछ मुझे पागल किए दे रही थी। मैंने धीरे से अपनी जीभ बाहर निकाली और उनकी चूत के होंठों पर रख दी। जैसे ही मेरी जीभ ने उनकी चूत को छुआ, निशा दीदी के पूरे शरीर में एक झटका लगा और वो ज़ोर से कराह उठीं। आआह्ह्ह्ह… हाँ अर्जुन, बिल्कुल वहीं Didi ki chudai

मैं उनकी चूत को चाटने लगा, कभी उनके चूत के होंठों को चूसता, कभी अपनी जीभ को उनकी चूत के अंदर डालता, और कभी उनके क्लिटोरिस को हल्के-हल्के चाटता। निशा दीदी बेकाबू हो रही थीं, उनका शरीर ऐंठ रहा था, वो मेरे बाल खींच रही थीं और ज़ोर-ज़ोर से कराह रही थीं। उह्ह्ह्ह्ह… और तेज़… आआअह्ह्ह्ह्हह… हाँ… वहीं… उनकी आवाज़ें सुनकर मेरा लंड और भी सख्त हो गया था।

मैंने अपनी जीभ से उनकी चूत के हर कोने को चाटा, हर सिलवट को महसूस किया, और उनके रस को पिया। उनकी चूत का स्वाद थोड़ा नमकीन और मीठा सा था, और मुझे ये बहुत पसंद आ रहा था।

मैंने अपनी दो उंगलियाँ उनकी चूत में डाल दीं और साथ-साथ उनके क्लिटोरिस को चूसना शुरू कर दिया। बस ये देखिए, निशा दीदी चीख पड़ीं और उनके शरीर में एक तेज़ झटका लगा। आआह्ह्ह्ह… मैं आ रही हूँ… उह्ह्ह्ह्ह… और फिर उनकी चूत से रस की एक तेज़ धार निकली जिसे मैंने बड़े चाव से पी लिया। वो कुछ देर तक बिल्कुल ढीली पड़ी रहीं, उनकी साँसें तेज़ चल रही थीं और उनकी आँखें बंद थीं। मैंने अपनी उंगलियाँ बाहर निकालीं और उन्हें चाट लिया। ये सब मेरे लिए एक सपने जैसा था। Didi ki chudai

कुछ देर बाद निशा दीदी ने अपनी आँखें खोलीं और मुस्कुराईं। तुम तो बहुत शैतान निकले अर्जुन, पहली बार में ही मुझे झड़ा दिया उन्होंने कहा और मुझे अपनी तरफ खींच लिया। अब अपनी इस प्यारी सी चीज़ को मेरी चूत में डालो उन्होंने मेरे लंड को पकड़ते हुए कहा। मैं बिना देर किए उनके ऊपर आ गया। निशा दीदी ने अपने पैर चौड़े कर लिए और मेरे लंड को अपनी चूत के मुहाने पर लगा लिया। धीरे से डालो, बहुत दिनों बाद ले रही हूँ उन्होंने कहा।

मैंने अपने कूल्हों को आगे बढ़ाया और मेरे लंड का सिरा उनकी चूत के अंदर घुस गया। इतनी टाइटनेस, इतनी गर्मी, इतना गीलापन मैंने कभी महसूस नहीं किया था। आआह्ह्ह्ह… हम दोनों एक साथ कराह उठे। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और धीरे-धीरे अपने लंड को उनकी चूत में और अंदर तक धकेल दिया। निशा दीदी ने अपने नाखून मेरी पीठ में गड़ा दिए और ज़ोर से कराह उठीं। उह्ह्ह्ह्ह… भर दो मुझे… पूरा भर दो उन्होंने कहा और मैंने अपना पूरा लंड उनकी चूत में उतार दिया। हमारी जाँघें आपस में मिल चुकी थीं और मेरे टट्टे उनकी गांड को छू रहे थे।

कुछ सेकेंड मैं बिल्कुल रुका रहा, उनकी चूत की टाइटनेस को महसूस करता रहा। फिर निशा दीदी ने कहा, अब चलाओ इसे और मैंने अपने कूल्हे पीछे खींचे और फिर आगे की तरफ धकेल दिए। एक लय में मैं उनकी चूत में अपना लंड घुसाने और बाहर निकालने लगा। हर धक्के के साथ निशा दीदी ज़ोर-ज़ोर से कराह रही थीं और मेरा नाम ले रही थीं। आआह्ह्ह्ह हाँ अर्जुन… ऐसे ही… चोदो मुझे… ज़ोर से… उनकी आवाज़ें कमरे में गूँज रही थीं और मेरे शरीर का हर रोम-रोम रोमांचित हो रहा था। ये एक ऐसी चुदाई थी जो मैं ज़िंदगी भर नहीं भूल पाऊंगा। Didi ki chudai

इस पहली पोज़ीशन में, जिसे हमने बड़े आराम और प्यार से शुरू किया था, मैं उनके ऊपर था और वो नीचे लेटी हुई थीं। मेरे हाथ उनकी कमर के नीचे थे, उनके कूल्हों को थामे हुए, और उनके पैर मेरी कमर के चारों तरफ लिपटे हुए थे। हर बार जब मैं अपने लंड को उनकी चूत के अंदर धकेलता, तो वो अपनी कमर को ऊपर उठाकर मुझे और गहराई तक ले जाने की कोशिश करतीं।

मेरे लंड पर उनकी चूत की पकड़ इतनी ज़बरदस्त थी कि मुझे लग रहा था कि कहीं मेरा लंड टूट ना जाए। उनकी चूत ने मेरे लंड को पूरी तरह जकड़ लिया था और हर धक्के के साथ एक गीली आवाज़ आ रही थी।

तुम बहुत अच्छा चोदते हो अर्जुन… उह्ह्ह्ह्ह… इतना मज़ा मुझे कभी नहीं आया… निशा दीदी कराह रही थीं। ये सुनकर मेरा आत्मविश्वास और बढ़ गया और मैंने अपनी रफ़्तार और तेज़ कर दी। अब मैं उन्हें ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा, मेरे टट्टे उनकी गांड पर ज़ोर से चोट कर रहे थे और हर धक्के के साथ उनके स्तन हिल रहे थे। मैं झुका और उनके हिलते हुए स्तनों में से एक को अपने मुँह में ले लिया। अब मैं एक साथ उनका स्तन चूस रहा था और उनकी चूत में अपना लंड घुसा रहा था। ये डबल स्टीमुलेशन निशा दीदी के लिए बहुत ज़्यादा थी और वो ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगीं। Didi ki chudai

आआअह्ह्ह्ह्हह… अर्जुन… मैं फिर से आ रही हूँ… उह्ह्ह्ह्ह… और इस बार उनकी चूत ने मेरे लंड को एक ज़ोरदार भींच दिया। उनकी चूत की मसल्स मेरे लंड पर जकड़ गईं और मुझे लगा जैसे कोई मेरे लंड को चूस रहा हो। ये एहसास बहुत ही ज़बरदस्त था और मैं बमुश्किल अपने आप को रोक पाया। मैंने भी अपनी रफ़्तार और तेज़ कर दी, उन्हें और ज़ोर से चोदने लगा।

उनके शरीर पर पसीने की बूँदें आ गई थीं और उनका चेहरा पूरी तरह लाल हो गया था।

कुछ देर और इसी पोज़ीशन में चुदाई करने के बाद, निशा दीदी ने अचानक कहा, रुको, अब मैं ऊपर आती हूँ मैंने अपना लंड बाहर निकाला और वो उठकर मेरे ऊपर सवार हो गईं। ये दूसरी पोज़ीशन थी। उन्होंने मेरे लंड को अपनी चूत के मुहाने पर लगाया और एक झटके में पूरा अंदर ले लिया। अब वो मेरे ऊपर बैठी थीं, उनके कूल्हे मेरे कूल्हों पर थे और मेरा लंड पूरी तरह उनकी चूत के अंदर था। उन्होंने अपने हाथ मेरी छाती पर रख दिए और खुद हिलने लगीं।

ये पोज़ीशन बहुत अलग थी। अब निशा दीदी कंट्रोल में थीं और वो अपनी मरज़ी के हिसाब से मुझे चुदवा रही थीं। वो मेरे लंड पर उछल रही थीं, कभी तेज़ तो कभी धीमे, कभी गोल-गोल घूमतीं तो कभी आगे-पीछे हिलतीं। उनके स्तन मेरे सामने उछल रहे थे और मैंने अपने दोनों हाथों से उन्हें पकड़ लिया। मैं उनके स्तनों को दबा रहा था और वो मेरे लंड को अपनी चूत में लेकर उछल रही थीं। ये नज़ारा बहुत ही कामुक था। आआह्ह्ह्ह… कितना मज़ा आ रहा है… तुम्हारा लंड मेरी चूत में बिल्कुल फिट है… निशा दीदी कराह रही थीं। Didi ki chudai

उनकी रफ़्तार बढ़ती जा रही थी और मेरे लंड पर उनकी चूत की पकड़ और गहरी होती जा रही थी। मैं भी अपने कूल्हों को ऊपर उठा-उठाकर उनके धक्कों का जवाब दे रहा था। अब हम दोनों की साँसें बहुत तेज़ चल रही थीं और हमारे शरीर पसीने से तरबतर थे। निशा दीदी की आँखें बंद थीं और वो बस अपनी मस्ती में डूबी हुई थीं। वो मेरे लंड को ज़ोर-ज़ोर से अपनी चूत में ले रही थीं और हर बार जब वो नीचे आतीं, तो मेरा लंड उनकी चूत की गहराई तक चला जाता।

अब पीछे से करते हैं मैंने हिम्मत करके कहा। निशा दीदी रुक गईं और मुस्कुराईं। अच्छा, तो तुम्हें ये पसंद है उन्होंने कहा और मेरे ऊपर से उतर गईं। ये तीसरी पोज़ीशन की तैयारी थी। वो सोफे पर हाथ और घुटनों के बल आ गईं, अपनी गांड को मेरी तरफ उठाकर। उनकी चूत पूरी तरह मेरे सामने खुली हुई थी, और उनकी चूत से रस की धार बह रही थी। ये नज़ारा बहुत ही उत्तेजक था। मैंने अपने लंड को उनकी चूत के मुहाने पर लगाया और एक ही झटके में पूरा अंदर डाल दिया।

आआअह्ह्ह्ह्हह… निशा दीदी ज़ोर से चीख पड़ीं। अब मैं उनकी गांड को थामे हुए था और ज़ोर-ज़ोर से उन्हें चोद रहा था। इस पोज़ीशन में मेरा लंड उनकी चूत में और भी गहराई तक जा रहा था और हर धक्के के साथ उनकी चूत से पानी निकल रहा था। मेरे टट्टे उनकी जाँघों से टकरा रहे थे और ज़ोर की आवाज़ें आ रही थीं। उह्ह्ह्ह्ह… और ज़ोर से… मुझे बुरी तरह चोदो… निशा दीदी चिल्ला रही थीं। मैं उनकी बात मानकर और तेज़ हो गया।

मैंने उनके कूल्हों को अपनी तरफ खींचा और अपने लंड को उनकी चूत में पूरी ताकत से घुसाने लगा। निशा दीदी का शरीर मेरे धक्कों से हिल रहा था और वो अपनी बाहों का सहारा लेकर मुझे झेलने की कोशिश कर रही थीं। उनकी चूत की गर्मी और गीलापन मेरे लंड को पागल किए दे रहा था। मैंने एक हाथ से उनके बाल पकड़ लिए और दूसरे हाथ से उनकी कमर। अब मैं बिल्कुल जानवरों की तरह उन्हें चोद रहा था और वो लगातार कराह रही थीं। उनके मुँह से सिर्फ आहें और कराहटें निकल रही थीं।

इसी पोज़ीशन में चुदाई करते-करते मुझे लगा कि मेरा एहसास चरम पर पहुँचने वाला है। मेरे लंड की जड़ में एक तेज़ सनसनी हुई और मैं समझ गया कि अब मैं रोक नहीं पाऊंगा। दीदी… मैं… मैं निकलने वाला हूँ… मैंने हाँफते हुए कहा। हाँ, निकाल दो… मेरी चूत में ही भर दो… आआह्ह्ह्ह… निशा दीदी ने कहा और मैंने अपने कूल्हों को उनकी गांड से सटा लिया और अपने लंड को उनकी चूत की सबसे गहराई में ले जाकर झड़ गया।

आआअह्ह्ह्ह्हह… मैं ज़ोर से चिल्लाया और मेरे लंड ने उनकी चूत में पिचकारी छोड़ दी। एक के बाद एक करके मेरे वीर्य की धारें निकलीं और निशा दीदी की चूत के अंदर भर गईं। मेरे पूरे शरीर में एक करंट सा दौड़ गया और मेरा दिमाग जैसे सुन्न हो गया। निशा दीदी भी मेरे साथ ही झड़ रही थीं, उनकी चूत ने मेरे लंड को इतनी ज़ोर से भींचा कि मेरे शरीर की सारी ताकत खत्म हो गई। हम दोनों एक दूसरे से लिपटकर बिल्कुल ढीले पड़ गए। Didi ki chudai

कुछ देर तक हम दोनों इसी हालत में पड़े रहे, हमारी साँसें तेज़ चल रही थीं और हमारे शरीर पसीने से तर थे। मेरा लंड अब भी उनकी चूत के अंदर था, और धीरे-धीरे नरम हो रहा था। निशा दीदी ने अपना चेहरा मेरी तरफ घुमाया और मुस्कुराते हुए बोलीं, तुमने तो कमाल कर दिया अर्जुन, मेरी तो चूत ही तरबतर कर दी मैं शर्माते हुए मुस्कुराया। ये मेरी ज़िंदगी का सबसे यादगार पल था, एक ऐसी Antarvasna जिसने मेरी ज़िंदगी बदल दी।

उसके बाद हम दोनों सोफे पर एक-दूसरे से लिपटे हुए लेटे रहे। निशा दीदी ने मेरी छाती पर अपना सिर रख लिया था और मैं उनके बालों में हाथ फेर रहा था। कुछ देर बाद हम उठे और निशा दीदी ने कहा, चलो, नहा लो, मैं चाय बनाती हूँ मैं उनके बाथरूम में गया और ठंडे पानी से नहाया। जब मैं बाहर आया तो निशा दीदी ने भी अपने कपड़े एडजस्ट कर लिए थे और चाय बना रही थीं।

हमने साथ चाय पी और कुछ देर बातें कीं। मैंने जाने के लिए कहा तो उन्होंने मुझे गले लगा लिया और बोलीं, कल फिर आना, ऐसे ही मजाक-मजाक में कुछ और करेंगे ये कहकर वो खिलखिलाकर हँस पड़ीं।

उस रात मैं अपने फ्लैट पर आकर बिस्तर पर लेट गया और बार-बार उस शाम की घटनाओं को याद करता रहा। निशा दीदी के साथ बिताया हर पल, हर लम्हा मेरी यादों में ताज़ा था। उनकी आहटें, उनकी कराहटें, उनकी चूत का गीलापन, सब कुछ मुझे याद था। ये एक ऐसी कहानी थी जिसे मैं हमेशा अपने दिल में छुपाकर रखना चाहता था, एक ऐसी Sex Story जो सिर्फ मेरे और निशा दीदी के बीच का राज़ थी। और हाँ, मजाक-मजाक में निशा दीदी ने अपनी चूत दे दी थी, अंताक्षरी खेलने के बहाने जो शुरू हुआ था, वो एक रोमांचक चुदाई की रात में बदल गया था। ये वो सच्ची कहानी है जो मैंने आज आपको सुनाई,

उम्मीद है आपको पसंद आई होगी। Didi ki chudai


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