तीन रातो तक पड़ोसन भाभी की चुदाई

Teen Raton padosan bhabhi ki damdar chudai

ये एक हॉट देसी स्टोरी है, मेरी ज़िंदगी का एक ऐसा अध्याय जिसे मैं हमेशा छुपाना चाहता था, एक ऐसी सच्ची कहानी जो मेरे दिलो-दिमाग पर ऐसी छपी है कि शायद ही कभी मिट पाए। बात है मेरी पड़ोसन भाभी की, जिनका नाम इस कहानी में मैं रजनी भाभी रख रहा हूँ। उनका असली नाम कुछ और ही था, मगर उनका शरीर, उनकी अदाएँ, और वो तीन रातें… सब कुछ ऐसा था कि सोच-सोच कर आज भी मेरा लण्ड खड़ा हो जाता है। padosan bhabhi ki chudai

मैं 25 साल का नौजवान था, बनारस के एक पुराने मोहल्ले में किराए के कमरे में रहता था। मेरा नाम इस कहानी में रोहन रख लेता हूँ। मैं एक एम.एन.सी. कंपनी में नौकरी करता था, काम की वजह से इस शहर में आया था, और रहने के लिए मैंने एक बड़ी सी बिल्डिंग में एक फ्लैट ले लिया था। मेरे बगल वाले फ्लैट में सतीश भैया रहते थे, और उनकी बीबी थीं रजनी भाभी।

सतीश भैया की उम्र कोई 35-36 साल रही होगी, और रजनी भाभी 30 की थीं। शादी को उन्हें हुए भी 8-9 साल हो चुके थे, मगर कोई बच्चा नहीं था। डॉक्टर ने बताया था कि सतीश भैया के शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम है, जिसकी वजह से रजनी भाभी माँ नहीं बन पा रही थीं। इस बात का मुझे बाद में पता चला, जब भाभी ने खुद ही अपनी व्यथा मुझे बताई।

रजनी भाभी को देखते ही मेरी साँसें थम जाती थीं। क्या चीज़ थी वो… गोरा-गोरा रंग, साँवले साँचे में ढला हुआ शरीर, लंबे घने बाल जो कमर तक झूलते थे। उनकी आँखें बड़ी-बड़ी, काजल से सजी, और होंठ ऐसे गुलाबी मानो गुलाब की पंखुड़ियाँ हों। कद इतना कि मैं उनसे बात करता तो आँखें मिलाने में दिक्कत होती। उनके स्तन… उफ़… बड़े-बड़े, तरबूज की तरह गोल-मटोल, मगर उतने ही टाइट, जो उनकी सूती साड़ी के ब्लाउज़ में कस-कस के बंधे रहते थे।

उनकी कमर पतली और कूल्हे फैले हुए थे, और नितम्ब… बस क्या कहूँ, जब वो चलतीं तो उनका हिलना मेरे दिमाग की सारी बत्तियाँ गुल कर देता था। मैं अक्सर सुबह-सुबह छत पर जाने का बहाना बनाता, ताकि भाभी को कपड़े सुखाते हुए देख सकूँ। वो बिना पल्लू के, सिर्फ ब्लाउज़ और पेटीकोट में घूमतीं, और मुझे देखकर मुस्कुराती हुई बोलतीं, |अरे रोहन बाबू, सुबह-सुबह यहाँ? चाय पियोगे?| मैं अंदर ही अंदर काँप जाता था,  हाँ भाभी, आप बनाओगी तो ज़रूर पियूँगा| और बस, यहीं से शुरू होती थी हमारी बातचीत, जो धीरे-धीरे गहराती गई। padosan bhabhi ki chudai

सतीश भैया अक्सर बाहर रहते। उनका ट्रांसपोर्ट का काम था, और वो अक्सर 5-6 दिन के लिए दूसरे शहरों में रहते। रजनी भाभी अकेली होती थीं, और मैं भी अकेला। मैंने कभी उनसे कोई गलत हरकत नहीं की, मगर मेरी निगाहें, मेरी तारीफें, सब कुछ बयां कर देती थीं कि मेरे दिल में क्या चल रहा था। एक शाम, जब सतीश भैया दिल्ली गए हुए थे, भाभी ने मुझे खाने पर बुलाया। मैंने पूछा, |भाभी, आज क्या बना रही हो?

वो बोलीं, |तुम्हारी पसंद का, चिकन करी और तंदूरी रोटी| मैं खुश होकर उनके घर पहुँच गया। वो बेहद हल्की सी सूती साड़ी पहने हुए थीं, जिसमें से उनके बदन की खुशबू आ रही थी। खाना खाते-खाते बातों का सिलसिला शुरू हुआ। भाभी ने बताया कि उनका मन बहुत उदास रहता है। सतीश भैया का ज़्यादातर बाहर रहना, और बच्चे की कमी, उन्हें अंदर ही अंदर खाए जा रही थी। मैंने उन्हें सांत्वना दी, और बातचीत करते-करते हम काफी करीब आ गए। रात के 11 बज रहे थे, और बारिश शुरू हो गई थी। बिजली चमक रही थी, और भाभी डर के मारे सिमट कर मेरे पास बैठ गई थीं। एक ज़ोरदार बिजली की कड़क के साथ उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया। padosan bhabhi ki chudai

मैंने उनके हाथों की नरमी को महसूस किया। धीरे-धीरे मेरी उंगलियाँ उनकी उंगलियों में उलझ गईं। मैंने उनकी तरफ देखा, उनकी आँखें मुझसे मिलीं और एक पल के लिए वो झुक गईं। मैंने हिम्मत करके उनकी ठुड्डी पकड़ी और उनका चेहरा ऊपर उठाया। उनकी आँखों में पानी था, मगर शिकायत नहीं थी, एक अजीब सी चाहत थी। मैंने फुसफुसाते हुए कहा, |भाभी, आप इतनी खूबसूरत हो, आपकी आँखों में आँसू अच्छे नहीं लगते| वो कुछ बोलीं नहीं, बस मेरी तरफ देखती रहीं।

मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। मेरे मन में कई तरह के विचार आ रहे थे कि ये गलत है, ये मेरी पड़ोसन भाभी है, मगर फिर एक आवाज़ आई कि वो एक औरत है, एक जवान औरत, जिसे प्यार और ध्यान की ज़रूरत है। मैंने अपनी उंगली से उनके आँसू पोंछे, और फिर बिना सोचे-समझे, अपने होंठ उनके होंठों से मिला दिए। पहले तो वो सकपका गईं, उनका शरीर अकड़ गया, मगर फिर जैसे बरसों की प्यास जाग गई हो, वो भी मुझसे लिपट गईं।

हमारे होंठ एक-दूसरे को चूम रहे थे। ये मेरा पहला चुंबन नहीं था, मगर जो अहसास था, वो ऐसा था जैसे बिजली का झटका लगा हो। उनके गुलाबी होंठ इतने मुलायम और गर्म थे कि मैं बस चूमता ही रहना चाहता था। मेरे हाथ उनकी कमर पर चले गए, और धीरे-धीरे उनकी पीठ पर चलने लगे। साड़ी का कपड़ा हमारे बीच में एक पतली सी दीवार जैसा था, जो हर पल गिरती जा रही थी।

भाभी की साँसें तेज़ हो गई थीं, और वो हल्की-हल्की कराह रही थीं, |उह्ह्ह्ह… रोहन, ये क्या कर रहे हो…| मगर उनके हाथों ने मुझे जकड़ रखा था, मना नहीं कर रही थीं। मैंने उनके गालों, उनकी आँखों, उनकी गर्दन पर अपने होंठ फिराने शुरू कर दिए। उनके शरीर से एक अजीब सी गंध आ रही थी, पसीने और इत्र का मिलाजुला एहसास, जो मुझे और पागल बनाए दे रहा था। मैंने उनके कान की लौ को अपने होठों में लेकर चूसा, और वो एकदम से सिहर उठीं, |आआह्ह्ह्ह… रोहन, बहुत दिनों बाद…| वो आगे कुछ न कह पाईं। padosan bhabhi ki chudai

मैं समझ गया था कि उनकी ज़िंदगी में शारीरिक सुख की भारी कमी है। सतीश भैया के साथ उनका जीवन बस एक रस्म बनकर रह गया था। उनके शरीर को, उनके मन को, एक तूफ़ान की ज़रूरत थी, और वो तूफ़ान बनकर मैं आया था। बारिश अब भी हो रही थी, और ठंडी हवा कमरे में आ रही थी, मगर हमारे शरीर आग के भट्ठी की तरह तप रहे थे। मैंने अपना शर्ट उतार फेंका। मेरी काया अच्छी खासी गठी हुई थी, जिम जाने का शौक था। भाभी की आँखें मेरी छाती और बाजुओं पर घूम रही थीं। उन्होंने अपना हाथ बढ़ाकर मेरी छाती के बालों को सहलाया, और मानो एक करंट सी दौड़ गई। मैंने अब उनकी साड़ी का पल्लू धीरे-धीरे सरकाया।

पल्लू के नीचे से उनका ब्लाउज़ दिख रहा था, जो उनके विशाल स्तनों के कारण फटा जा रहा था। उन्होंने शर्म से अपनी बाहें भींच लीं, जिससे उनकी चोली का खिंचाव और भी साफ दिखने लगा। मैंने प्यार से उनके हाथों को हटाया और उनके कंधों पर अपने होंठ रख दिए।

भाभी ने अपना सिर पीछे की ओर झुका दिया, अपनी लंबी गर्दन मेरे हवाले कर दी। मैं पागलों की तरह उनकी गर्दन को चूम रहा था, चूस रहा था, जैसे कोई भूखा शेर अपना शिकार खा रहा हो। मेरे हाथ उनके नितम्बों पर पहुँच गए, और उन्होंने उन्हें अपनी मुट्ठियों में भर लिया। गुदगुदी-गुदगुदी गोलाई, कसी हुई, और बेहद गर्म। मैंने अपनी उंगलियाँ उनके नितम्बों के बीच की दरार में डालीं और दबाने लगा। भाभी ज़ोर-ज़ोर से साँसें भर रही थीं। उनका ब्लाउज़ भीग गया था, पसीने और बारिश की नमी से। मैंने उनके ब्लाउज़ के हुक खोलने शुरू किए, एक-एक कर, बेहद आहिस्ता से। हर हुक के खुलने के साथ उनका बदन और ज़्यादा खिलता जा रहा था। padosan bhabhi ki chudai

आखिरकार, ब्लाउज़ खुला और वो नीचे ज़मीन पर गिर गया। सामने था उनका सीना, एक काले रंग की ब्रा में कैद। ब्रा के ऊपर से ही मैं देख सकता था कि उनके स्तन कितने भारी-भरकम हैं। गोलाई ऐसी कि पूरा हाथ भी कम पड़ जाए। मैंने अपना मुँह उनकी छाती पर रख दिया, और ब्रा के ऊपर से ही उनके स्तनों को चूमने लगा। भाभी ने अपने दोनों हाथ मेरे बालों में फेर दिए, और हल्के से मेरा सिर दबाने लगीं।

उनके मुँह से निकल रहा था, |आह्ह्ह… रोहन, बहुत तेज़ हो… आराम से…| मैंने अपना एक हाथ उनकी पीठ पर ले जाकर ब्रा का हुक खोला। ब्रा ढीली पड़ते ही एक जोरदार उछाल आया, और उनके स्तनों ने आज़ादी पा ली। वो मेरी आँखों के ठीक सामने थे, दो बड़े-बड़े तरबूजों की तरह, जिनके सिरों पर गहरे भूरे रंग के निप्पल, जो अब उत्तेजना से सख्त हो चुके थे।

मैं एकटक देखता रहा, मानो कोई अनमोल ख़ज़ाना मिल गया हो। भाभी ने शर्म से अपनी आँखें बंद कर लीं। मैंने झुककर एक निप्पल को अपने होठों में ले लिया। जैसे ही मेरी जीभ उनके निप्पल पर लगी, उनके पूरे शरीर में एक झटका सा लगा। मैं एक तरफ चूस रहा था, और दूसरे हाथ से दूसरे स्तन को मसल रहा था, जैसे आटा गूँधा जा रहा हो। उनके निप्पल और भी सख्त और बड़े हो गए थे।

मेरी जीभ तेज़ी से उन पर घूम रही थी, और मेरे दाँत हल्के से उन्हें काट रहे थे। भाभी की कराहें अब और तेज़ हो गई थीं, |उम्म्म्म… हाँ… ऐसे ही… रोहन, ऐसे ही चूसो… आआह्ह्ह्ह…| मैंने उनके पेट पर भी अपने होंठ फिराए। उनकी नाभि में अपनी जीभ डाली और उसे तेज़ी से हिलाने लगा। वो हँसते हुए सिकुड़ गईं, मगर फिर उसी में खो गईं।

अब बारी थी उनकी साड़ी की। मैंने उनकी साड़ी की गाँठ खोली, और वो धीरे-धीरे सरकती चली गई। अब वो सिर्फ एक पेटीकोट में थीं। उनके कूल्हे, उनकी लंबी-गोरी टाँगें, सब कुछ मेरी नज़रों के सामने था। मैंने अपना हाथ उनकी जाँघों पर फेरना शुरू किया। ये वो टाँगें थीं जिन्हें मैंने कितनी बार देखा था, मगर आज पहली बार उन्हें छू पा रहा था। रेशम की तरह मुलायम त्वचा, मानो दूध से नहाई हों। padosan bhabhi ki chudai

मेरा हाथ उनकी जाँघों के बीच के त्रिकोण की ओर बढ़ने लगा। पेटीकोट का कपड़ा अब गीला हो चुका था, और वहाँ की गर्मी को मैं साफ महसूस कर सकता था। मैंने धीरे-धीरे उनकी पेटीकोट को ऊपर सरकाना शुरू किया, और मेरी साँसें इस कदर थम गईं कि जब मेरी नज़र उनकी जाँघों के बीच पड़ी। उन्होंने एक सफेद रंग की कच्छी पहनी हुई थी, जो पूरी तरह से भीग चुकी थी। वहाँ का रस टपक कर उनकी जाँघों तक आ गया था।

ये देखकर मेरा लौड़ा तन के लोहे की छड़ जैसा हो गया। मैंने अपनी पैंट पर हाथ लगाया तो वहाँ भी गीलापन था, मेरा टपका हुआ पानी। भाभी ने अपना हाथ बढ़ाकर मेरी पैंट की ज़िप खोली, और मेरा लंड बाहर निकल आया। तन कर खड़ा, फन उठाए हुए, और बेहद गर्म। भाभी ने उसे देखा, और एक पल के लिए ठगी सी रह गईं। उसकी मोटाई और लंबाई को देखकर वो सिहर उठीं। उन्होंने अपनी मुट्ठी में मेरा लण्ड पकड़ा, मगर उनका हाथ पूरी तरह से उस पर नहीं आ पाया। वो बोलीं, |इतना बड़ा… और इतना मोटा…| मैंने कहा, |ये सब आपकी खूबसूरती का कमाल है भाभी| और फिर मैंने झुककर उनकी कच्छी को सरकाना शुरू किया।

जैसे ही कच्छी नीचे उतरी, मेरे सामने था उनकी चुत। साफ-सुथरी, गोरी, और बेहद मांसल। हल्के-हल्के बाल थे, और बीच में वो गुलाबी दरार, जिसमें से रस टपक रहा था। मैं वहीं बैठ गया और अपनी उंगली से उनके चुत के होंठों को अलग किया। भीतर गहरे लाल रंग का मांस था, और चमक रहा था। मैंने अपनी जीभ वहाँ रख दी। जैसे ही मेरी जीभ उनकी चुत पर लगी, भाभी ज़ोर से चीख पड़ीं, padosan bhabhi ki chudai

आआअह्ह्ह्हह… रोहन… ये क्या कर रहे हो… उह्ह्ह्ह…| मगर उन्होंने मेरा सिर पकड़ कर और ज़ोर से दबा दिया। मैं उनकी चुत को बड़े चाव से चाटने और चूसने लगा। मेरी जीभ उनकी भगशेफ पर तेज़ी से घूम रही थी, और मेरे होंठ उसे चूस रहे थे। उनके रस का स्वाद हल्का नमकीन और मीठा था, और मैं उसे बड़े मज़े से पी रहा था। भाभी की कराहें अब बेकाबू हो रही थीं। वो मेरे बालों को जकड़े हुए थीं, और अपना कूल्हा हिला-हिला कर मेरे मुँह पर अपनी चुत रगड़ रही थीं।

मैंने अपनी दो उंगलियाँ उनकी चुत के अंदर डालीं, और ऊपर-नीचे करने लगा। भीतर से वो इतनी गर्म और तंग थीं कि मेरी उंगलियाँ भी मुश्किल से घुस पा रही थीं। मैंने अपनी उंगलियों को मोड़कर उनकी जी-स्पॉट पर रगड़ना शुरू किया। बस फिर क्या था, भाभी की चीखें और तेज़ हो गईं, और अचानक से उनके शरीर में एक ज़ोरदार झटका लगा, और उनकी चुत से रस की एक तेज़ धार निकलकर मेरे मुँह पर गिरी। भाभी झड़ गई थीं। उनका पहला ऑर्गेज़्म इतना ज़ोरदार था कि वो कुछ पल के लिए बेहोश सी होकर बिस्तर पर पड़ी रहीं, सिर्फ हाँफती हुई। मैं उनके ऊपर गया और उनके चेहरे पर पड़े बालों को हटाकर उन्हें प्यार से देखने लगा। padosan bhabhi ki chudai

कुछ मिनटों बाद, जब वो होश में आईं, तो उनकी आँखों में एक नई चमक थी। एक संतुष्टि, एक शांति, जो शायद उन्होंने कभी महसूस न की हो। उन्होंने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और कहा, |रोहन, मुझे नहीं पता था कि ऐसा भी कुछ होता है| मैंने मुस्कुराकर कहा, |ये तो सिर्फ शुरुआत है भाभी| और फिर मैंने उनके शरीर को अपने नीचे लिया।

मेरा लंड अभी भी पूरी तरह से खड़ा हुआ था, और उसे राहत चाहिए थी। मैंने भाभी को अपनी तरफ घुमाया, और उन्हें अपने ऊपर बैठा लिया। अब वो मेरे ऊपर सवार थीं। ये उनकी पहली मर्तबा था इस पोज़ीशन में। उन्होंने अपना हाथ बढ़ाकर मेरा लंड पकड़ा और उसे अपनी चुत के द्वार पर लगाया। धीरे-धीरे वो नीचे बैठने लगीं।

जैसे ही मेरे लण्ड का सिरा उनकी चुत के अंदर घुसा, हम दोनों ने एक साथ एक गहरी साँस छोड़ी। वो अंदर से इतनी तंग थीं कि मुझे लगा मेरा दम घुट जाएगा। भाभी के चेहरे पर हल्का सा दर्द और बहुत सारा आनंद साफ झलक रहा था। वो एक-एक इंच करके नीचे बैठती जा रही थीं, और मेरा लौड़ा उनमें समाता जा रहा था।

जब मेरा पूरा का पूरा लंड उनकी चुत के अंदर चला गया, तो उन्होंने मेरी छाती पर अपने हाथ रख दिए और अपने कूल्हों को गोल-गोल घुमाने लगीं। मज़ा तो इतना आ रहा था कि मैं पागल हुआ जा रहा था। उनकी चुत की दीवारें मेरे लण्ड को कस के जकड़ रही थीं, जैसे कोई गीली और गर्म मुट्ठी ने पकड़ रखा हो।

भाभी अब ऊपर-नीचे उछलने लगीं। उनके बड़े-बड़े स्तन मेरी आँखों के सामने ज़ोर-ज़ोर से हिल रहे थे। मैंने उन दोनों को अपने हाथों में पकड़ लिया, और उन्हें मसलते हुए, नीचे से अपने कूल्हों से ज़ोर-ज़ोर से झटके मारने लगा। हर झटके के साथ भाभी के मुँह से आवाज़ निकलती, |आह्ह्ह… हाँ… मारो… और ज़ोर से… रोहन, ज़ोर से चोदो मुझे…

उनकी बातें सुनकर मेरा खून और गर्म हो गया। मैं तेज़ी से अपने कूल्हे ऊपर की तरफ उछाल रहा था। हमारे जिस्मों के टकराने की चप-चप की आवाज़ और भाभी की चीखें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। padosan bhabhi ki chudai

इस पोज़ीशन में काफी देर तक चुदाई करने के बाद, मैंने भाभी को अपने नीचे लिटा लिया। ये मिशनरी पोज़ीशन थी। मैंने उनकी टाँगों को फैलाया और अपने आप को उनके बीच में रखा। उनके पैरों को मोड़कर मैंने उनके घुटने उनकी छाती तक ला दिए। इससे उनकी चुत बाहर की तरफ और ज़्यादा खुल गई थी। मैंने अपना लंड उस गीली चुत पर रगड़ा और एक ही ज़ोरदार झटके में पूरा अंदर तक घुसा दिया।

भाभी ज़ोर से चीखीं, |उइ माँ… रोहन… इतना गहरा…| मगर उनकी आँखों में दर्द नहीं, बल्कि एक तीव्र इच्छा थी। मैंने अपनी गति तेज़ कर दी। अब मैं उन्हें पूरी ताकत से चोद रहा था। मेरे अंडकोष उनके नितम्बों पर ज़ोर-ज़ोर से टकरा रहे थे। मैं झुका और उनके होंठों को चूमने लगा, जबकि मेरी कमर लगातार आगे-पीछे हो रही थी।

भाभी ने अपने पैर मेरी कमर से लपेट दिए, और अपने नाखून मेरी पीठ पर गड़ा दिए। वो लगातार बुदबुदा रही थीं, |हाँ… हाँ… बस यहीं… ऐसे ही… उह्ह्ह्ह… आआअह्ह्ह्हह…| उनकी चुत में से एक चिपचिपा सा रस निकल रहा था, जिसने मेरे पूरे लण्ड को गीला कर दिया था और हमारे बीच से लचकदार आवाज़ें आ रही थीं। padosan bhabhi ki chudai

मैं कभी अपनी पूरी लंबाई निकाल लेता और फिर पूरी ताकत से अंदर घुसा देता। कभी मैं छोटे-छोटे और तेज़ झटके मारता। हर झटके के साथ उनकी साँसें उखड़ती जा रही थीं। मैंने अपनी गति और भी बढ़ा दी, और अब तो मैं उन्हें चोदते हुए खुद भी चिल्लाने लगा था, |आह्ह्ह भाभी… कितनी तंग है तुम्हारी चुत… बहुत मज़ा आ रहा है…|

फिर मैंने बिना रुके, अपना सारा बल लगाकर उनकी चुत पर लगातार हमला बोला। मेरा लंड एक मूसल की तरह अंदर-बाहर हो रहा था। भाभी की चुत के भीतर की गर्मी और कसाव इतना बढ़ गया था कि अब मैं रोक नहीं पा रहा था। मुझे लगा मेरे अंडकोषों में एक तूफान सा उठ रहा है, और मेरा सारा तनाव मेरे लण्ड के सिरे पर आ गया है।

मैंने भाभी को ज़ोर से पकड़ लिया, और एक ज़ोरदार चीत्कार के साथ अपना पूरा माल उनकी चुत के अंदर खाली कर दिया। धार पर धार, मेरा गाढ़ा, गर्म वीर्य उनकी चुत के भीतर भर गया। भाभी ने भी उसी पल एक और ज़ोरदार ऑर्गेज़्म महसूस किया, और हम दोनों एक साथ वीर्य और रस का विस्फोट करते हुए, पूरी तरह से संतुष्ट होकर बिस्तर पर ढेर हो गए।

ये पहली रात का अंत था, मगर जैसा कि शीर्षक है, असली कहानी तो अभी शुरू हुई थी। पहली रात के उस तूफानी सेक्स के बाद, हम दोनों थक कर बिस्तर पर पड़े थे। मेरा वीर्य उनकी चुत से बाहर टपक रहा था, और बिस्तर की चादर पूरी तरह से भीग चुकी थी। भाभी ने मेरी छाती पर अपना सिर रख दिया था, और उनकी उंगलियाँ मेरे सीने पर गोले बना रही थीं।

बारिश अब बंद हो चुकी थी, और बाहर सिर्फ ठंडी हवा चल रही थी, जो खिड़की से आकर हमारे पसीने से भीगे शरीरों को सुखा रही थी। मैंने उनके बालों में उंगलियाँ घुमाते हुए पूछा, |भाभी, आप ठीक हो?| वो मुस्कुराईं, उनकी आँखों में एक नशा सा था, रोहन, मैं आज तक ठीक नहीं थी… आज पहली बार ठीक हुई हूँ| उनकी ये बात सुनकर मुझे अजीब सा सुकून मिला। मुझे लगा जैसे मैंने कोई पुण्य का काम किया हो। padosan bhabhi ki chudai

दूसरी रात सतीश भैया का फोन आया कि उनका काम एक दिन और बढ़ गया है, और वो परसों तक ही आ पाएँगे। भाभी ने फोन पर उनसे बात की, उनकी आवाज़ बिल्कुल सामान्य थी, मगर मुझे देखकर उनकी आँखों में एक शरारत चमकी। फोन रखते ही वो बोलीं, |सुना रोहन बाबू, आज भी आपकी भाभी अकेली है| मैंने हँसते हुए कहा, |तो मैं क्या कम हूँ?| बस फिर क्या था, हम दोनों फिर से एक-दूसरे में खो गए।

आज की रात कुछ अलग थी। आज भाभी ने खुद पहल की। शाम होते ही वो मेरे घर आ गईं। उन्होंने एक गहरे हरे रंग की साड़ी पहनी हुई थी, जो बनारसी रेशम की थी, और उसमें से वो और भी जानलेवा लग रही थीं। उनके कानों में झुमके थे, और हाथों में चूड़ियाँ, जिनकी छन-छन की आवाज़ माहौल को और मादक बना रही थी।

आज भाभी कुछ ज़्यादा ही बातूनी मिज़ाज में थीं। वो मेरे साथ बैठकर शराब पीना चाहती थीं। मैं थोड़ा हैरान हुआ, क्योंकि मुझे नहीं पता था कि वो पीती हैं। उन्होंने बताया कि सतीश भैया के साथ कभी-कभी दो पैग लगा लेती थीं, मगर आज वो खुलकर पीना चाहती थीं। मैंने अपनी बोतल निकाली, और हम दोनों ने धीरे-धीरे पीना शुरू किया। नशे की गर्मी ने हमारे दिमागों को और भी ढीला कर दिया।

भाभी ने बताना शुरू किया कि कैसे सतीश भैया ने कभी उन्हें सच्चे मायने में संतुष्ट नहीं किया। उनकी कमज़ोरी की वजह से वो बस एक मिनट में ही समाप्त हो जाते थे, और भाभी को कभी चरम सुख नहीं मिल पाया था। उन्होंने बताया, |रोहन, कल रात जो हुआ, वो मेरी ज़िंदगी का पहला ऑर्गेज़्म था…| ये सुनकर मेरा दिमाग चकरा गया। इतनी खूबसूरत और जवान औरत, जिसकी 8-9 साल की शादीशुदा ज़िंदगी में कभी झड़ने का मौका न मिला हो। padosan bhabhi ki chudai

नशे की धुंध में, भाभी खुद मेरी गोद में आकर बैठ गईं। मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड को महसूस करने लगीं। उनका कहना था, |आज मैं तुम्हें कुछ नया दिखाऊँगी| उन्होंने मेरी शर्ट उतारी, और मुझे सोफे पर लिटा दिया। फिर वो ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ गईं, और अपनी साड़ी को कमर तक लपेट लिया। उनके हाथ मेरी पैंट की बेल्ट पर गए, और उसे खोलकर उन्होंने मेरी पैंट नीचे सरका दी। मेरा लंड अभी भी अर्ध-उत्तेजित था, मगर जैसे ही ठंडी हवा ने उसे छुआ, और भाभी की गर्म साँसों ने उसे सहलाया, वो तुरंत फन उठाकर खड़ा हो गया। भाभी ने एक हाथ से मेरे लंड की जड़ पकड़ी, और दूसरे हाथ से मेरे अंडकोषों को सहलाने लगीं।

फिर जो हुआ, वो मेरी कल्पना से भी परे था। भाभी ने अपना मुँह खोला और पूरे जोश के साथ मेरे लंड को अपने गर्म मुँह में ले लिया। उनके होंठों का गीलापन, उनकी जीभ की नरमी, और उनके गले की गहराई… मैं तो जैसे सातवें आसमान पर पहुँच गया। वो मेरे लण्ड को बड़ी ही तेज़ी और कौशल से चूस रही थीं। उनका सिर ऊपर-नीचे हो रहा था, और मेरा पूरा लौड़ा उनके मुँह में अंदर-बाहर जा रहा था। मेरे पूरे शरीर में करंट सी दौड़ गई। मैंने उनके बालों को मुट्ठी में भर लिया, और अपने कूल्हे ऊपर की तरफ उठाने लगा। वो लगातार चूस रही थीं, और बीच-बीच में अपनी जीभ से मेरे लंड के सिरे के नीचे वाले हिस्से को, जो सबसे संवेदनशील होता है, बड़ी फुर्ती से सहला रही थीं।

मैं ज़ोर-ज़ोर से कराहने लगा, |आआह्ह्ह्ह… भाभी… क्या कर रही हो… बहुत तेज़ है… उह्ह्ह्ह…| मेरी आवाज़ सुनकर वो और ज़ोर से चूसने लगीं। अब उन्होंने मेरे लंड को अपने एक हाथ से पकड़कर हिलाना शुरू कर दिया, और साथ ही साथ अपनी जीभ से सिरे पर ज़ोर-ज़ोर से गोले बनाने लगीं। उनका दूसरा हाथ मेरे अंडकोषों को मसल रहा था। ये अहसास इतना तीव्र था कि मुझे लगा अब निकल ही जाऊंगा। मैंने भाभी को बताना चाहा,

भाभी… अब मैं… मैं रोक नहीं पाऊंगा…| लेकिन उन्होंने मेरी बात अनसुनी कर दी, और अपना मुँह मेरे लंड पर और गहराई तक ले गईं, यहाँ तक कि मेरा पूरा सिरा उनके गले की दीवारों को छूने लगा। बस फिर क्या था, मेरे शरीर से एक ज़ोरदार झटका निकला, और मैंने अपना सारा माल सीधा उनके गले में उड़ेल दिया। उन्होंने एक-एक बूँद को निगल लिया, और जब तक मेरा लंड पूरी तरह से ढीला नहीं पड़ गया, उसे अपने मुँह से बाहर नहीं निकाला। ये पहला मौका था जब किसी औरत ने मेरा सब कुछ पूरी तरह से पी लिया हो। padosan bhabhi ki chudai

इसके बाद, भाभी ने अपना मुँह पोंछा और मेरे ऊपर आकर लेट गईं। अब उनकी बारी थी। मैंने नीचे जाकर उनकी चुत को चाटना शुरू किया। अब तक वो पूरी तरह से गीली हो चुकी थीं। मैंने अपनी जीभ उनकी चुत के गहरे अंदर तक घुसाई, और अपनी नाक से उनकी भगशेफ को रगड़ने लगा। ये तरीका उन्हें बहुत पसंद आया, और वो मेरे बाल खींच-खींच कर अपनी चुत मेरे मुँह पर घिसने लगीं। काफी देर तक ऐसा करने के बाद, उन्होंने मुझे ऊपर खींचा और कहा, |आज मुझे कुत्ते की तरह चोदो| उनकी इस बात ने मेरी नसों में आग लगा दी। मैंने उनकी कमर पकड़ी और उन्हें पलटकर पेट के बल लिटा दिया।

भाभी ने अपने घुटने मोड़ लिए, और अपने नितम्ब ऊपर की तरफ उठा दिए। मेरे सामने उनके गोरे-गोरे और भारी-भरकम चूतड़ थे, और उनके बीच में उनकी रसीली चुत, जो मानो मुझे बुला रही थी। ये डॉगी स्टाइल पोज़ीशन मेरी सबसे पसंदीदा थी। मैंने उनके कूल्हों को कस कर पकड़ा, और अपना लंड पकड़कर उसे उनकी चुत के द्वार पर लगाया।

एक ही ज़ोरदार झटके में, मेरा पूरा लण्ड उनकी चुत में गायब हो गया। इस पोज़ीशन में पेनिट्रेशन बहुत गहरा होता है। भाभी ज़ोर से चीखीं, |आह्ह्ह… हाँ रोहन… बहुत गहरा… मारो…| मैं पीछे से उनके नितम्बों पर अपना पूरा वज़न डालकर, तेज़-तेज़ झटके मारने लगा। हमारे शरीरों के टकराने की आवाज़, चूड़ियों की छन-छन, और भाभी की बेकाबू चीखों ने पूरे घर को भर दिया। padosan bhabhi ki chudai

मैंने एक हाथ आगे बढ़ाकर उनका एक स्तन पकड़ लिया, और उसे मसलते हुए चोदता रहा। दूसरा हाथ उनके कूल्हे पर था, जो उन्हें पीछे की ओर खींच रहा था, ताकि हर झटका और भी गहरा जाए। भाभी अपनी बाँहों के सहारे खुद को संभाले हुए थीं, मगर मेरे ज़ोरदार हमलों से वो बार-बार नीचे गिरती और फिर उठतीं। मैंने इस पोज़ीशन में बहुत देर तक चुदाई की। मेरा लौड़ा उनकी चुत में एक पिस्टन की तरह चल रहा था। भाभी की चुत की दीवारें अब बार-बार सिकुड़ रही थीं, जो इस बात का संकेत था कि वो फिर से झड़ने वाली हैं। और हुआ भी ऐसा ही, वो एक ज़ोरदार कराह के साथ फिर से ऑर्गेज़्म पर पहुँच गईं, और उनकी टाँगें काँपने लगीं।

लेकिन मैं अभी नहीं रुका। मैंने उन्हें उसी पोज़ीशन में रखा और अपनी गति और भी तेज़ कर दी। मैं जानता था कि अब मेरी बारी है। भाभी की चुत का कसाव अब इतना बढ़ गया था कि मेरे लिए रोकना नामुमकिन हो रहा था। मैंने अपने दाँत भींच लिए, और आखिरी 10-15 ज़ोरदार झटके मारे। हर झटके के साथ मैं उनके नितम्बों को अपनी तरफ खींचता जा रहा था। अंत में, मैंने एक ज़ोरदार दहाड़ मारी, और अपना पूरा माल उनकी चुत के अंदर छोड़ दिया। मेरा वीर्य इतना गर्म था कि भाभी फिर से सिहर उठीं। मैं पूरी तरह से पस्त होकर उनकी पीठ पर गिर पड़ा।

दूसरी रात के बाद, अब हमारा रिश्ता एक अलग ही मुकाम पर पहुँच चुका था। अब शर्म और झिझक की दीवार पूरी तरह से गिर चुकी थी। भाभी अब खुलकर मेरे साथ रहती थीं। दिन में हम सामान्य पड़ोसियों की तरह रहते, मगर शाम होते ही वो मेरे घर या मैं उनके घर पहुँच जाता। तीसरी और आखिरी रात, सतीश भैया के आने से ठीक पहले की रात, एक अजीब सी बेचैनी और जोश से भरी थी। हम दोनों जानते थे कि शायद ये आखिरी मौका हो, या फिर बहुत दिनों बाद ऐसा हो पाए। इस बार का माहौल कुछ जुदा था। न कोई जल्दबाज़ी, न कोई हड़बड़ी, बस एक-दूसरे में पूरी तरह से डूब जाने की चाहत। भाभी ने खाना बनाया, हमने साथ बैठकर खाया, और फिर बिना कुछ कहे, हाथ पकड़कर बेडरूम की तरफ चल दिए। padosan bhabhi ki chudai

आज भाभी ने कोई भारी साड़ी नहीं, बल्कि एक हल्का गुलाबी नाइटगाउन पहना हुआ था, जो उनके हर उभार को बखूबी दिखा रहा था। नीचे शायद कुछ भी नहीं था। मैंने भी सिर्फ एक लुंगी पहन रखी थी। हम बिस्तर पर लेटे, और एक-दूसरे की आँखों में देखते रहे। मैंने उनके चेहरे को अपने हाथों में लिया, और बहुत प्यार से, बहुत धीरे से, उनके होंठों को चूमा। आज का चुंबन कोई जंगली जुनून नहीं, बल्कि एक गहरे प्यार और अपनेपन का अहसास लिए हुए था। हमारी जीभें धीरे-धीरे एक-दूसरे को सहला रही थीं, मानो एक-दूसरे का स्वाद हमेशा के लिए याद रखना चाहती हों।

मेरे हाथों ने उनके नाइटगाउन को ऊपर सरकाना शुरू किया। मेरी उंगलियाँ उनकी नरम जाँघों पर, उनके कूल्हों की गोलाई पर, और उनकी पसलियों पर घूम रही थीं। मैं उनके शरीर के हर अंग को याद कर लेना चाहता था। उनके स्तन आज फिर से मेरे होठों की गिरफ्त में थे। padosan bhabhi ki chudai

मैं बारी-बारी से दोनों निप्पलों को चूस रहा था, और मेरा लण्ड उनकी जाँघों के बीच गर्म होता जा रहा था। भाभी ने अपना हाथ नीचे ले जाकर मेरी लुंगी खोल दी, और मेरे तने हुए लंड को बाहर निकालकर सहलाने लगीं। हम दोनों ने एक-दूसरे के शरीर को अपनी उंगलियों से खोजना शुरू किया।

भाभी बोलीं, |रोहन, आज मुझे वो करना है जो मैंने कभी किसी के साथ नहीं किया| मैंने हैरानी से पूछा, |क्या?| वो शरमा कर बोलीं,  तुम मुझमें पीछे से घुसना| यानि वो एनल सेक्स चाहती थीं। मैंने कहा, |भाभी, इसमें दर्द होता है, आपको तकलीफ होगी| मगर वो ज़िद पर अड़ी रहीं, |मुझे पता है, मगर मैं तुम्हारे साथ हर दर्द और हर मज़ा महसूस करना चाहती हूँ| मैंने उन्हें समझाया कि इसके लिए बहुत तैयारी चाहिए। मैंने उन्हें पेट के बल लिटाया, और उनके नितम्बों पर तेल लगाना शुरू किया। मैंने बड़ी कोमलता से उनकी गांड की मालिश की, ताकि माँसपेशियाँ ढीली हो जाएँ।

मैंने अपनी एक उंगली तेल में भिगोई, और धीरे-धीरे उनकी गांड के छेद पर लगानी शुरू की। भाभी ने अपनी साँस रोक ली। मैंने बहुत आराम से, बहुत धीरे से, अपनी उंगली का सिरा अंदर डाला। उनका शरीर अकड़ गया। मैंने कहा, |आराम करो भाभी, साँस लो| धीरे-धीरे उनकी सिकुड़न ढीली पड़ी, और मेरी पूरी उंगली अंदर चली गई। मैं उसे बहुत ही धीमी गति से अंदर-बाहर करने लगा। कुछ देर बाद, मैंने दो उंगलियाँ डालीं, और उनकी गांड की माँसपेशियों को फैलाने लगा। भाभी के मुँह से अब हल्की-हल्की कराहें निकल रही थीं, मगर वो दर्द से ज़्यादा एक अलग ही किस्म के रोमांच से भरी हुई थीं। padosan bhabhi ki chudai

जब मुझे लगा कि अब वो तैयार हैं, तो मैंने अपने लंड पर ढेर सारा तेल लगाया। मैं उनके ऊपर गया, और अपने लण्ड का सिरा उनकी गांड के छेद पर रखा। मैंने बहुत ही धीमे दबाव के साथ अंदर घुसना शुरू किया। भाभी ने तकिये को मुँह से दबा लिया। जैसे ही मेरा सिरा अंदर गया, उन्होंने एक तेज़ सिसकारी भरी, |उस्स्स… रोहन, बहुत बड़ा है…| मैं रुक गया। मैंने उनकी पीठ को सहलाया, और कहा,

हो गया भाभी, अब और नहीं| मगर वो बोलीं, |नहीं… पूरा अंदर डालो… मुझे चाहिए…| उनकी इस बेताबी ने मुझे और जोश से भर दिया। मैंने धीरे-धीरे एक-एक इंच करके अपना पूरा लंड उनकी गांड में डाल दिया। वो अंदर से चुत से भी ज़्यादा गर्म और कसी हुई थी। मुझे लगा जैसे मेरा लौड़ा किसी शिकंजे में जकड़ दिया गया हो।

एक बार पूरा अंदर जाने के बाद, मैंने कोई हरकत नहीं की। मैं उन्हें अहसास करने देना चाहता था। कुछ सेकंड बाद, भाभी ने खुद अपने कूल्हों को हल्का सा पीछे किया, जो मेरे लिए आगे बढ़ने का इशारा था। मैंने धीरे-धीरे अपने कूल्हों को पीछे किया, और फिर आगे। मेरा लण्ड उनकी गांड में धीमे-धीमे चोदाई करने लगा। मैंने ये रिदम बहुत देर तक बनाए रखा। भाभी का दर्द अब पूरी तरह से गायब हो चुका था,

और उसकी जगह एक तीव्र आनंद ने ले ली थी। वो ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थीं, |आह्ह्ह… रोहन… ये क्या चीज़ है… बहुत मज़ा आ रहा है… मुझे ज़ोर से चोदो… उनकी बात सुनकर मैंने अपनी गति थोड़ी तेज़ कर दी। अब मैं एक हाथ से उनके स्तन दबा रहा था, और दूसरे से उनकी कमर पकड़ कर पीछे से ज़ोर-ज़ोर से उनकी गांड मार रहा था। More Stories  Padosan bhabhi ki chudai

ये सब करते हुए, मेरा दूसरा हाथ नीचे गया और उनकी चुत को रगड़ने लगा। मेरी उंगलियाँ उनकी भगशेफ पर तेज़ी से चल रही थीं, जबकि मेरा लंड उनकी गांड में घुस-घुस कर धमाके कर रहा था। इस डबल स्टीमुलेशन ने भाभी को पूरी तरह से पागल कर दिया। वो बार-बार झड़ रही थीं, और हर बार मेरा नाम ले-लेकर चीख रही थीं। उनकी चुत का रस मेरे हाथों पर बह रहा था, और उनकी गांड की जकड़न मेरे लंड को कुचल रही थी। ये अहसास इतना शानदार था कि मैं भी अब ज़्यादा देर नहीं रोक सका। मैंने उनकी गांड में आखिरी बार गहराई तक घुसकर, अपना पूरा माल उनकी आँतों के अंदर छोड़ दिया।

तीसरी रात का अंत हो चुका था। हम दोनों थके हुए, मगर पूरी तरह से तृप्त, बिस्तर पर पसरे हुए थे। हमारे शरीरों से पसीने की बू आ रही थी, और कमरा सेक्स की भीनी-भीनी खुशबू से भरा हुआ था। भाभी की गांड से मेरा वीर्य रिस रहा था, और उनकी चुत का पानी चादर पर फैल गया था। वो मेरी बाँहों में सिमटी हुई थीं, और उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे।

ये दुख के आँसू नहीं थे, बल्कि एक गहरी भावनात्मक मुक्ति के थे। उन्होंने कहा, |रोहन, ये तीन रातें मैंने पूरी ज़िंदगी जी ली हैं| मैंने उन्हें गले से लगाया और कहा, |भाभी, मैं हमेशा आपके लिए हूँ| मगर हम दोनों जानते थे कि सुबह सतीश भैया के लौटने के साथ ही, ये सिलसिला यहीं खत्म हो जाएगा।

अगली सुबह, जब मैंने भाभी को देखा, तो वो फिर से उसी सूती साड़ी में, हाथों में चूड़ियाँ पहने, घर के काम में लगी हुई थीं। उनके चेहरे पर एक अनोखी चमक थी, एक संतुष्टि का नूर। जब सतीश भैया लौटे, तो मैंने उन्हें देखा, उनके पैर छुए, और वो खुशी-खुशी अपने घर में दाखिल हो गए। रात को जब मैं अपने कमरे में लौटा, तो दरवाज़े पर एक छोटी सी चिट्ठी रखी थी, जिसमें लिखा था, |शुक्रिया, सब कुछ के लिए| उस पर किसी का नाम नहीं था, मगर मैं जानता था वो किसकी थी। मैंने वो चिट्ठी अपनी डायरी में रख ली। padosan bhabhi ki chudai

उसके बाद के दिनों में, हम दोनों ने कभी उन रातों की चर्चा नहीं की, मानो कोई खूबसूरत ख्वाब हो जो सुबह होते ही टूट गया। भाभी पहले की तरह मुझसे बात करतीं, चाय पिलातीं, मगर अब उनकी आँखों में वो बेताबी नहीं थी। उसमें एक शुक्रगुज़ारी थी, एक पवित्र सा स्नेह था। और मैं? मैं अपनी उन यादों के सहारे जी रहा था।

हर रात, बिस्तर पर जाने से पहले, मेरे दिमाग में वो तीन रातों के दृश्य घूमने लगते। कभी मैं उन्हें डॉगी स्टाइल में चोदते हुए याद करता, तो मेरा लंड फिर से खड़ा हो जाता। कभी उनके ब्लोजॉब की याद से मेरी साँसें थम जातीं। और कभी उनके ऑर्गेज़्म की वो तड़प और चीखें, मेरे कानों में गूँज उठतीं।

मैं जानता था कि ये एक ऐसी चुदाई थी, जो सिर्फ शरीरों की नहीं, बल्कि आत्माओं की भी थी। और इसीलिए, ये मेरी ज़िंदगी की सबसे दमदार चुदाई थी, जिसे मैं आज भी नहीं भूल पाया हूँ। padosan bhabhi ki chudai

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