दोस्तो, बिना किसी भूमिका के मैं अपनी भाई बहन सेक्स कहानी आपके सामने लिख रहा हूँ.
मेरा नाम रुद्रा है. यह नाम बदला हुआ है. मेरी उम्र 21 साल है. मेरा रंग गोरा है और हाइट 5 फीट 6 इंच.
मेरे लंड की लंबाई साढ़े पांच इंच की है और यह काफी मोटा है. लगभग 3.5 इंच मोटा है.
मेरा नाम रुद्रा है. यह नाम बदला हुआ है. मेरी उम्र 21 साल है. मेरा रंग गोरा है और हाइट 5 फीट 6 इंच.
मेरे लंड की लंबाई साढ़े पांच इंच की है और यह काफी मोटा है. लगभग 3.5 इंच मोटा है.
यह वर्जिन सिस्टर सेक्स कहानी उस दिन की है, जब हम सब लोग बड़े चाचा की बेटी की शादी में गए हुए थे.
उनका घर हमारे घर से कुछ दस मिनट की दूरी पर है.
चाचा के घर पर काफी सारे रिश्तेदार आए हुए थे.
मेरे छोटे चाचा की बेटी रूपाली भी आई थी.
उसके साथ मेरा काफी अच्छा जमता था.
मेरी चचेरी बहन रूपाली (यह नाम बदला हुआ है) की उम्र 18 साल है.
उसकी फिगर 34-30-36 की है.
उसकी हाइट 5 फीट ही है और रंग गेहुंआ है.
कई दिनों बाद हम दोनों मिले थे.
आपस में थोड़ी-बहुत बातचीत हुई और फिर हम काम में लग गए क्योंकि शादी का घर था, काम बहुत था.
पूरे दिन काम खत्म करने के बाद रात को सोने के लिए जगह ढूँढने लगे.
बड़े लोग अच्छी-अच्छी जगहें लेकर सो गए थे.
मैं भी जगह देखने लगा तो एक छोटी-सी खाली जगह मिली, जहां मुश्किल से एक आदमी सो सकता था.
मैंने किसी तरह वहां सो रहे शख्स को थोड़ा साइड करके खुद के लिए जगह बनाई और लेट गया.
तभी मेरे बगल वाले आदमी को न जाने क्या हुआ, वह उठ कर चला गया.
शायद उसे दिक्कत हो रही थी.
अब मैं फैल कर लेट गया था.
तभी मेरी नजर सामने गई.
मेरी बहन रूपाली भी सोने के लिए जगह ढूँढ रही थी और थोड़ी परेशान लग रही थी.
मैंने पूछा- क्या हुआ?
वह बोली- देखो ना भैया … पूरे दिन काम करने के बाद पूरा शरीर दुख रहा है और सोने के लिए ठीक-ठाक बेड भी नहीं मिल रहा!
मैंने कहा- अरे ये अपना घर थोड़े है, शादी का घर है. जहां जगह मिले, वहीं सो जाओ.
वह बोली- पूरे घर में देख लिया, कहीं अच्छी जगह नहीं मिल रही है!
मैंने कहा- यहां थोड़ी-सी जगह है. अगर तुम्हें कोई दिक्कत नहीं तो मेरे साथ सो सकती हो!
वह तुरंत बोली- ठीक है!
अब वह मेरे पास आकर सो गई.
फरवरी का महीना था, ठंड काफी थी.
हम लोग कंबल ओढ़कर सो रहे थे और दोनों एक ही कंबल में थे.
हमारा शरीर आपस में टच हो रहा था.
उसका बदन थोड़ा भरा हुआ था.
वह मोटी तो नहीं, पर उसका जिस्म काफी गदराया हुआ एकदम मक्खन सा मुलायम था.
वह मेरी तरफ पीठ करके सोई थी.
उसके चूतड़ मेरे जिस्म छू रहे थे.
वाह … क्या मुलायम चूतड़ थे … मेरा लंड कड़क होने लगा था.
थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि वह सर्दी से कांप रही है.
शायद उसकी सर्दी एक कंबल से दूर नहीं हो पा रही थी.
मैंने उसके और पास सटकर उसे अपनी बॉडी से सटा लिया.
वह खुद भी थोड़ा पीछे को सरक आई.
अब मेरा पेट उसकी पीठ से पूरा लग गया था.
मैंने धीरे से अपना हाथ उसकी कमर पर रख दिया और आंखें बंद कर लीं.
उसके मादक जिस्म की गर्मी पाकर नींद तो आने से रही.
मुझे महसूस हुआ कि वह थोड़ा कसमसा रही है और वह मेरे साथ कुछ ज्यादा ही सटकर सो गई.
मुझे थोड़ा अजीब लगा.
मैं धीरे-धीरे से अपने हाथ से उसे सहलाते हुए हाथ को उसके पेट पर ले गया.
वह कुछ नहीं बोली, हिली भी नहीं.
बस, मैं समझ गया कि वह भी ये सब चाहती है.
मैंने अब अपना हाथ उसकी टी-शर्ट के नीचे से अन्दर डाल दिया और धीरे-धीरे पेट पर सहलाने लगा.
वह कुछ नहीं बोली, तो मैं और आगे बढ़ गया.
जैसे ही मेरा हाथ उसके बूब्स तक पहुंचा, वह थोड़ा हिली.
मैं तुरंत रुक गया और हाथ वहीं रोक लिया.
वह फिर शांत हो गई.
मैं सोचने लगा कि मैंने हाथ क्यों रोक दिया?
अब वह मेरी तरफ अपना मुँह करके सो गई.
उसके होंठ और मेरे होंठ के बीच बहुत कम दूरी रह गई थी.
मुझे उसकी तेज़-तेज़ सांसें महसूस हो रही थीं.
मैंने उसे थोड़ा अपनी तरफ खींच लिया.
वह पूरी तरह मुझसे सट गई.
उसके होंठ मेरे होंठों से लग गए.
उस पल मेरे पूरे बदन में आग लग गई, मेरा लंड पूरी तरह खड़ा और तैयार हो गया.
मैंने धीरे से उसकी टी-शर्ट को ऊपर किया और ब्रा के ऊपर से ही उसके बूब्स को अपने होंठों से मसलने लगा.
वह आंखें बंद करके मजा ले रही थी.
मैं बस उसके होंठ चूमे जा रहा था.
वह अभी भी कुछ नहीं कर रही थी, शायद शर्मा रही थी.
मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके हाथ में पकड़ा दिया.
जैसे ही उसने मेरा लंड पकड़ा, उसकी आंखें खुल गईं.
मैं मुस्कुरा कर उसे देखने लगा और वह मुझे देखती रही.
मैंने उसका हाथ पकड़ रखा था, तो वह छुड़ा नहीं सकती थी.
एक हाथ से मैंने उसके सिर को पकड़ लिया था और उसके होंठ चूमे जा रहा था तो वह बोल भी नहीं पा रही थी.
कुछ देर बाद वह शांत हुई, तो मैंने हाथ छोड़ दिया और सिर भी.
अब वह खुद-ब-खुद मेरे लंड को सहलाने लगी.
उफ्फ्फ … क्या नर्म हाथ थे … इतने प्यार से सहला रही थी कि मेरा लंड पानी छोड़ने को तैयार हो गया.
मैंने उसे रोक दिया.
वह बोली- क्या हुआ?
मैंने कहा- सारा मजा एक साथ खत्म करना है क्या? नहीं ना … थोड़ा आराम से करो न!
फिर हम दोनों ने अपना ऊपरी कपड़े उतार दिए और एक-दूसरे को चूसने लगे.
वह मेरे लौड़े को सहलाती रही, मैं उसके बूब्स चूसता रहा और चूत में उंगली करता रहा.
मैंने कहा- लंड देखना है?
वह बोली- अभी कोई देख लिया तो क्या होगा? अभी नहीं … फिर कभी!
मैंने कहा- ये भी ठीक है!
हम रात के करीब एक बजे तक ऐसे ही एक-दूसरे को चूसते, चाटते रहे.
मैंने दो बार पानी छोड़ा, उसने भी दो बार पानी छोड़ा.
मैंने उसका टेस्ट किया … वाह यार, क्या माल थी नमकीन-नमकीन … पहली बार चखा था उसका रस!
फिर हमने बात की कि अब चुदाई कैसे और कहां करें?
वह बोली- यहां तो हो नहीं सकती.
अब हमारे पास एक ही रास्ता था.
मैं उसे अगले दिन मेरे अपने घर ले जाकर कमरे में अपने पलंग पर चोद लेने की सोचने लगा.
वहां अभी कोई नहीं था, तो वहां सही से चुदाई हो सकती थी.
बस, हमने यही डिसाइड किया और कपड़े पहन कर सो गए.
हम दोनों ठीक वैसे ही चिपक कर सोए हुए थे, जैसे कोई कपल सोता है.
दूसरे दिन जब सुबह मेरी आंख खुली तो मेरी बहन उधर नहीं थी.
मैं उठा और उसे देखने लगा.
तभी वह मेरे नजदीक आई और बोली- चलो घर चलते हैं.
मैंने ओके कहा और उधर से यह बहाना बना कर निकल गए कि इधर सभी को फ्रेश होने में दिक्कत हो रही है तो हम लोग घर पर जा रहे हैं, अभी आ जाएंगे.
यह बात मैंने सिर्फ अपनी मम्मी से कही थी, नहीं तो कुछ और लोग भी हमारे साथ आ सकते थे और वर्जिन सिस्टर सेक्स कहानी, चुदाई के कार्यक्रम की माँ चुद जाती.
घर आकर मैंने दरवाजा अन्दर से बंद किया और पिछले दरवाजे से बाहर आकर लॉक लगा कर वापस पीछे से अन्दर चला गया ताकि कोई डिस्टर्ब करने वाला न आए.
अन्दर आया तो मेरी बहन टॉयलेट में थी.
मैं भी अन्दर जाना चाहता था, मगर वह शरमा रही थी.
कुछ देर बाद जब वह बाहर आई तो उसने सिर्फ ब्रा पैंटी ही पहनी थी.
उसे टू-पीस में देख कर मेरे लंड में आग लग गई.
मैं जल्दी से उसे उठा कर बेड पर ले गया और उधर खुद भी नंगा हो गया.
वह मेरे लौड़े को देख कर डर गई और बोली- भैया, मेरा पहली बार है.
मैंने उसे अपनी बांहों में भरते हुए कहा- तो क्या हुआ, सबका कभी न कभी पहली बार ही होता है.
उसने मुझसे पूछा- क्या आप पहले सेक्स कर चुके हो!
मैंने कहा- हां.
वह बोली- किसके साथ?
मैंने कहा- मेरी जीएफ के साथ!
वह मुझे खेलने लगी और मेरे लौड़े को हाथ में लेकर सहलाने लगी.
मैंने कहा- मुँह में लो!
वह मना करने लगी.
मैंने कहा- आज मौका है, मुँह में ले लो. वर्ना बाद में पछताओगी कि मुँह में लेने का अवसर था और शर्म के चलते नहीं ले पाई.
वह हंस दी और उसने 69 में आकर मेरे लंड को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया.
मैंने भी उसकी चुत को चाटना चालू कर दिया.
कुछ ही देर में हम दोनों झड़ गए और वापस सीधे लेट कर एक दूसरे से प्यार करने लगे.
जवान शरीर थे तो हम दोनों जल्दी ही गर्म हो गए और अब चुदाई की आग लगने लगी.
मैंने अपनी बहन को चित लिटाया और उसकी टांगों के बीच में आकर अपने लौड़े के सुपारे को उसकी बुर की फांकों में रगड़ना शुरू कर दिया.
वह खुद भी अपनी कमर उठा कर लंड बुर में ले लेना चाह रही थी.
मैंने एक हल्का सा शॉट मार दिया.
मेरे लंड का सुपारा उसकी कसी हुई बुर को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया.
वह चिल्लाने को हुई, मैंने झट से उसका मुँह बंद कर दिया.
वह कसमसा रही थी और अपने हाथ के इशारे से मुझे मना कर रही थी कि मत करो … रहने दो.
मगर मुझे तो उसकी चुत की गर्मी को ठंडा करना ही था तो धीरे धीरे लौड़े को चुत में पेलता गया.
करीब पांच मिनट की जद्दोजहद के बाद उसकी बुर फट गई और मेरे लंड ने बहन की चुत में झण्डा फहरा दिया.
अब मैंने अपनी बहन की चुत चोदना चालू कर दी.
कुछ ही देर में मेरी बहन भी मस्त हो गई और वह भी जबरदस्त जवाब देती हुई चुदाई का मजा लेने लगी.
उस दिन करीब बीस मिनट तक चली इस चुदाई की हवस में हम दोनों एक साथ स्खलित हो गए थे.
चुदाई खत्म हुई तो हम दोनों एक साथ गर्म पानी से नहाये और जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहन कर शादी वाले घर वापस आ गए.
दोस्तो, यह मेरी सच्ची वर्जिन सिस्टर सेक्स कहानी है, आपको कैसी लगी … प्लीज जरूर बताएं.
kashyapadesh.0195@gmail.com