ननदोई के साथ छुपा चुदाई का रिश्ता – मेरी असली कहानी
यह मेरी असली कहानी है, जो मैं हमेशा छुपाना चाहती थी, लेकिन आज दिल कर रहा है कि सबको बता दूं। मेरा नाम प्रिया है। मैं लखनऊ की रहने वाली हूं। जब मैं जवान हुई तो घरवालों ने मेरी शादी कानपुर में एक अच्छे परिवार में कर दी। मेरे पति राहुल बहुत अच्छे और मेहनती इंसान थे। शादी के बाद मेरी जिंदगी खुशहाल हो गई। ननदोई के साथ छुपा चुदाई का रिश्ता
ससुराल में मेरी दो ननदें थीं। छोटी ननद का नाम रिया था और बड़ी ननद का नाम नेहा। मेरी सास बहुत कोमल स्वभाव की थीं, कभी भी मुझे ताना नहीं मारतीं। ससुर जी भी बहुत नेकदिल थे। इस तरह ससुराल में मेरा दिल पूरी तरह बस गया।
शादी के पहले दिनों में मैं बहुत घबराई हुई थी। सोचती थी कि कहीं परिवार वाले सख्त न निकलें, कहीं मुझे डांट-फटकार न मिले। अखबारों में पढ़ती थी कि किसी बहू को मार दिया, किसी को परेशान कर दिया। इसलिए मन में काफी डर था।
लेकिन यहां आकर पता चला कि ये सब बेकार का डर था। ये लोग बहुत सरल और प्यार करने वाले थे, बिल्कुल मेरे मायके जैसे। शादी के दस महीने बाद मुझे बेटी हुई तो बड़ी ननद नेहा भी आईं। उनके पति अजय भी साथ आए। बेटी की मुंडन की रस्म में पूरा परिवार जमा हुआ। ननदोई के साथ छुपा चुदाई का रिश्ता
मेरे ननदोई अजय बहुत शर्मीले इंसान थे। भाभी और ननदोई का रिश्ता तो वैसे भी बहुत मजेदार और प्यारा होता है। उस दिन मैंने उन्हें अच्छे से देखा। मुंडन के दिन अजय चुपचाप एक कोने में बैठे रहे, खासकर भाभियों से नजरें नहीं मिलाते थे।
अजय लखनऊ में सरकारी अस्पताल में डॉक्टर थे। मैंने उन्हें देखा तो जल्दी से उनके लिए जूस और नाश्ता ले गई। अजय ने नजरें नीची रखीं, हल्के से मुस्कुराए और जूस ले लिया। मैंने मजाक में कहा, अरे ननदोई जी, जरा इधर भी देखिए ना, अपनी सलहज से मिलेंगे नहीं क्या। वो धीरे से मेरी तरफ देखकर मुस्कुराए।
अरे वाह, आप तो लड़कियों से भी ज्यादा शरमाते हैं, मैंने हंसते हुए कहा। धीरे-धीरे मैंने उनकी शर्म दूर की। अजय बहुत हैंडसम थे, जैसे कोई फिल्म स्टार। डॉक्टर थे लेकिन जरा भी अकड़ नहीं। मेहनत से पढ़ाई की, डॉक्टरी की डिग्री ली। ननदोई के साथ छुपा चुदाई का रिश्ता
अब लखनऊ के बड़े अस्पताल में काम करते थे। खुद का अच्छा घर बनवा लिया था। नेहा अब आराम की जिंदगी जी रही थीं। मेरे पति राहुल सरकारी क्लर्क थे, हमारा भी घर अच्छा था। लेकिन नेहा की शादी में राहुल को काफी खर्च करना पड़ा। अब छोटी ननद रिया की पढ़ाई में भी राहुल ही मदद कर रहे थे। ससुर जी छोटे व्यापारी थे, बस गुजारा चलता था। पैसों को लेकर राहुल से कभी-कभी बहस भी होती कि ननदों पर इतना क्यों खर्च करते हो।
अजय अब मुझसे खुलकर बात करने लगे। उन्हें किताबें पढ़ने और फिल्में देखने का बहुत शौक था। मुझे बताते कि कौन सी फिल्म अच्छी है, क्या खाना पसंद है। कभी-कभी खुद हाथ से स्वादिष्ट खाना बना लेते। बातों-बातों में मैंने उनका मोबाइल नंबर ले लिया। मैं उन्हें रोज गुलाब का फोटो भेजती। वो भी मुझे मजेदार जोक्स और मीम्स भेजने लगे।
एक दिन मैं बहुत मूड में थी। व्हाट्सएप पर लिखा, बताओ ननदोई जी, आप मेरी ननद को कैसे संतुष्ट करते हो। काफी देर तक जवाब नहीं आया। लगा शायद बुरा मान गए। लेकिन फिर एक मैसेज आया जिसमें चुदाई के कई पोज की तस्वीरें थीं। मैं तो हैरान रह गई। ननदोई के साथ छुपा चुदाई का रिश्ता
कोई पोज नहीं छोड़ता, सब ट्राई करता हूं, उन्होंने लिखा। मैं तो दंग रह गई। बाहर से इतने शरीफ लगते थे, लेकिन अंदर से कितने खुलकर चुदाई की बात करते। सलहज और ननदोई का ये मजाक उस दिन से शुरू हो गया।
अजय को सेक्सी कहानियां और किताबें पढ़ने का बहुत क्रेज था। जबकि नेहा इस मामले में बिल्कुल ठंडी थीं। मुझे भी ऐसी कहानियां पढ़ना पसंद था। जब अजय कोई नई सेक्स बुक खरीदते तो मेरे लिए भी मंगवा देते। किताब मेरे पते पर आ जाती। इस तरह हमारी दोस्ती और गहरी हो गई।
कुछ समय बाद नेहा को बच्चा होने वाला था। उसी दौरान छोटी ननद रिया को भी बच्चा था। इसलिए मुझे नेहा की देखभाल के लिए उनके घर भेज दिया गया। मैं दिन-रात उनकी सेवा करती। डिलीवरी के समय नेहा को अस्पताल में भर्ती किया। मैं हमेशा साथ रहती। ननदोई सलहज चुदाई
रात में अजय ड्यूटी से लौटते और नेहा का हाल पूछते। एक शाम मैं नेहा के पास बैठी थी कि अजय आए। सलहज जी, चलिए कैंटीन में कुछ खा लें, बोले। मैं उनके साथ चली गई। कैंटीन खाली थी। अजय ने चाय और समोसे मंगवाए। हम बातें करने लगे। अजय मुझे अजीब नजरों से देख रहे थे।
ननदोई जी, ऐसे क्यों देख रहे हो, मैंने हंसकर पूछा। ननदोई के साथ छुपा चु दाई का रिश्ता
सलहज जी, पता नहीं क्यों, लेकिन लगता है मेरी शादी आपसे होनी चाहिए थी। हम दोनों में कितनी समानताएं हैं, किताबें पसंद हैं, बातें अच्छी होती हैं। नेहा तो बिल्कुल अलग हैं, अजय ने कहा।
मुझे भी वैसा ही महसूस हुआ। हम अंधेरे कोने में बैठे थे। अजय ने मेरा हाथ पकड़ा। मैंने नहीं छोड़ा। टेबल के नीचे पैर मिलाने लगे। मैं चुप रही। उनकी हरकतें बढ़ीं। अचानक अजय ने मेरे होंठ चूम लिए।
मैं साफ कहती हूं, मैं अजय से चुदवाना चाहती थी। अंधेरे में कई बार होंठ चूमे। मैं पूरी तरह गर्म हो गई। ननदोई के साथ छुपा चुदाई का रिश्ता
डॉगी स्टाइल, अजय ने पूछा। मैं शर्मा गई। ननदोई सलहज चुदाई
कहां, मैंने पूछा। अजय ने कैंटीन वाले से बात की। स्टोर रूम की चाबी मिल गई।
हम स्टोर रूम में गए। दरवाजा बंद किया। अजय मुझ पर टूट पड़े। सलहज जी, पहली बार देखा था तब से चोदना चाहता था, बोले।
मैं मुस्कुराई। उन्होंने मुझे गले लगाया। होंठ चूसने लगे। आह्ह, उनकी सांसें गर्म थीं। मैंने खुद को सौंप दिया। राहुल का लंड रोज खाकर बोर हो गई थी।
अजय ने मुझे खींचा। हाथ छातियों पर। सिहरन हुई। होंठ चूसते रहे। पुराने गद्दे पर लेटे। मैं भी उन्हें चूमने लगी।
अजय ने मेरी कुर्ती उतारी। सफेद ब्रा। सीने से लगाया। सलहज जी, आप सबसे हसीन हो, बोले।
बाल एक तरफ किए। पीठ चूमी। ब्रा खोली। स्तन मुंह में। आह्ह इह्ह, सिसकारी निकली।
दोनों स्तन चूसे। चूत गीली हो गई। सलवार उतारी। पैंटी निकाली।
मैं नंगी हो गई। अजय ने भी कपड़े उतारे। उनका लंड मोटा और लंबा था। मैंने हाथ में पकड़ा। वो कांप गया।
अजय ने मुझे लिटाया। ऊपर आए। लंड चूत पर रगड़ा। धीरे से अंदर डाला। आह्ह, दर्द हुआ लेकिन मजा भी।
धीरे-धीरे धक्के। ठप ठप। मैं चीखी, आह्ह अजय… और जोर से। ननदोई सलहज चुदाई
वो स्पीड बढ़ाई। चपचप चपचप। मैंने टांगें लपेटीं। वो जोर-जोर से चोद रहा था। मेरी चूत में आग लगी।
मैं झड़ गई। वो भी तेज हुआ। अंदर ही झड़ गया। गर्म रस महसूस हुआ।
हम हांफते रहे। फिर कपड़े पहने। बाहर आए। ये हमारा पहला था।
उसके बाद कई बार मिले। हर बार चुदाई। कभी घर पर, कभी बाहर।
अब हमारा रिश्ता छुपा हुआ है। लेकिन मजा अलग है। ननदोई सलहज चुदाई
यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।” ननदोई के साथ छुपा चुदाई का रिश्ता ननदोई के साथ छुपा चुदाई का रिश्ता