यह “दीदी की चुदाई देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया” मेरी असली सच्ची कहानी है जिसे मैं हमेशा छिपाना चाहता था, लेकिन आज दिल कर रहा है कि सबको बता दूं। मैंने कभी सोचा नहीं था कि ऐसी घटना मेरे साथ घटेगी, लेकिन हुई तो बहुत कुछ बदल गया। मैं उस समय लखनऊ में इंजीनियरिंग डिप्लोमा कर रहा था और मेरी बड़ी दीदी प्रिया घर पर ही थी, उसने अपनी पढ़ाई पूरी कर ली थी और नौकरी की तलाश में थी।
गर्मियों की छुट्टियां चल रही थीं और घर में सिर्फ मैं और दीदी ही थे क्योंकि मम्मी-पापा गांव गए हुए थे किसी रिश्तेदार के यहां। रात बहुत गर्म थी इसलिए हम दोनों छत पर सोने का फैसला कर लिया। मैंने चादर बिछाई और दीदी ने भी अपनी चादर अलग से लगाई। हम बातें करते-करते सो गए। दीदी की चुदाई
आधी रात को मेरी नींद अचानक खुल गई। मैंने देखा कि दीदी मेरे पास नहीं थीं। लगा शायद नीचे पानी पीने गई होंगी। मैं भी उठा और तकिया लेकर नीचे आने लगा क्योंकि छत पर अब नींद नहीं आ रही थी। सीढ़ियां उतरते हुए मुझे नीचे से हल्की-हल्की आवाजें सुनाई दीं। लगा कोई मेहमान आया होगा लेकिन इतनी रात में कौन?
मैं धीरे-धीरे कमरे की तरफ बढ़ा। दरवाजे पर पर्दा लगा था। मैंने बहुत सावधानी से पर्दे का कोना हटाया और अंदर झांका। जो नजारा दिखा उसने मुझे स्तब्ध कर दिया। दीदी बेड के पास खड़ी थीं और एक लड़का उनके पीछे से उनकी कमर पकड़े हुए था। वो लड़का उनकी गांड को बड़े प्यार से सहला रहा था। दीदी की चुदाई
मैंने ध्यान से देखा तो पता चला वो राहुल है, मेरा दोस्त अमित का बड़ा भाई। राहुल दीदी का बॉयफ्रेंड था। मैंने कभी सोचा नहीं था कि दीदी का कोई अफेयर है। दीदी सलवार-सूट पहने हुए थीं, हल्का नीला कलर का।
राहुल ने धीरे से दीदी की कमीज का पल्लू सरकाया और ऊपर की तरफ खींचा। दीदी ने हाथ ऊपर करके कमीज उतार दी। अब वो सिर्फ ब्रा में थीं। ब्रा गुलाबी थी और दीदी के गोरे जिस्म पर बहुत सुंदर लग रही थी। उनके बड़े-बड़े बूब्स ब्रा से बाहर झांक रहे थे। दीदी की चुदाई देखी
राहुल ने दीदी की सलवार का नाड़ा खोला और सलवार नीचे सरका दी। दीदी अब सिर्फ पैंटी में थीं। उनकी पैंटी भी गुलाबी थी और बहुत पतली। राहुल ने पीछे से आकर दीदी को गले लगाया और उनके बूब्स को ब्रा के ऊपर से दबाने लगा। दीदी की सांसें तेज हो गईं।
राहुल बोला, ‘प्रिया जान, बहुत दिनों से इंतजार था। आज तुझे पूरी तरह चोदना है।’ दीदी ने मुस्कुराकर कहा, ‘हां मेरे राजा, आज मेरी चूत सिर्फ तेरे लंड के लिए तरस रही है। मुझे चोद दो, जोर-जोर से चोदो। मेरी चूत फाड़ दो।’दीदी की चुदाई
राहुल ने दीदी की ब्रा के हुक खोले। दीदी के गोल-गोल बूब्स बाहर आ गए। निप्पल गुलाबी और कड़े हो चुके थे। राहुल ने एक बूब मुंह में लिया और चूसने लगा। दीदी आह्ह्ह… कर रही थीं। फिर राहुल ने पैंटी भी उतार दी। दीदी अब पूरी नंगी थीं। उनकी चूत पर हल्के बाल थे लेकिन बहुत साफ-सुथरी।
मेरा लंड पैंट में खड़ा हो चुका था। मैंने पैंट की जिप खोली और लंड बाहर निकाला। हाथ से सहलाने लगा। दीदी का नंगा जिस्म देखकर मन कर रहा था कि मैं भी अंदर जाकर दीदी को चोदूं।
दीदी ने राहुल के कपड़े उतारे। राहुल का लंड बड़ा और मोटा था। दीदी ने उसे हाथ में पकड़ा और सहलाने लगी। फिर घुटनों पर बैठकर मुंह में ले लिया। दीदी लंड को ऐसे चूस रही थीं जैसे कोई आइसक्रीम हो। ग्ग्ग्ग… गोंग… गीईई… आवाजें आ रही थीं। दीदी की चुदाई देखी
राहुल दीदी को बेड पर लिटाया। वो 69 पोजीशन में आ गए। राहुल दीदी की चूत चाट रहे थे और दीदी उनका लंड चूस रही थीं। दीदी की चूत गीली हो चुकी थी। राहुल की जीभ क्लिट पर घूम रही थी। दीदी तड़प रही थीं।
दीदी बोलीं, ‘राहुल, अब बस… मेरी चूत में लंड डाल दो। मुझे चोद। राहुल ने दीदी के पैर फैलाए। उनकी चूत पूरी खुल गई। गुलाबी और रसीली। राहुल ने लंड का टोपा चूत पर रगड़ा। दीदी कसमसा रही थीं।
धीरे-धीरे राहुल ने लंड अंदर डाला। दीदी चीखीं, ‘आह्ह्ह… आईईईई… धीरे…’ लेकिन राहुल ने जोर का धक्का मारा। दीदी की सील टूट गई। खून निकला। दीदी रोने लगीं लेकिन राहुल रुका नहीं।
धीरे-धीरे धक्के बढ़ने लगे। ठपठप… ठपठप… चपचप… आवाजें आने लगीं। दीदी की आहें अब मजा वाली हो गईं। ‘हां राहुल… और जोर से… चोद मुझे… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह्ह ऊईईई…’
राहुल ने स्पीड बढ़ाई। दीदी की कमर खुद ऊपर उठ रही थी। वो राहुल के धक्कों के साथ कमर हिला रही थीं। राहुल ने दीदी के बूब्स दबाए, निप्पल चूसे। दीदी चिल्ला रही थीं, ‘हां… चोद… और तेज… मैं तेरी चुदक्कड़ हूं…’
करीब 30 मिनट तक चुदाई चली। दीदी कई बार झड़ीं। उनकी चूत से रस बह रहा था। आखिर राहुल ने जोर से धक्का मारा और वीर्य दीदी की चूत में छोड़ दिया। दोनों हांफते हुए लेट गए।
राहुल उठा, लंड बाहर निकाला। दीदी की चूत सूजी हुई थी, वीर्य और खून मिला हुआ। राहुल बाथरूम गया, तैयार होकर चला गया। दीदी कपड़े पहनकर सो गईं। दीदी की चुदाई
मैं चुपके से छत पर लौट आया। लेकिन नींद नहीं आई। दीदी का नंगा जिस्म, उनकी चुदाई की आवाजें, सब दिमाग में घूम रहा था। मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। मैंने हाथ से मुठ मार ली।
उस रात के बाद मैं दीदी को अलग नजर से देखने लगा। जब वो घर में झुकतीं, तो उनका क्लिवेज दिखता। मैं चुपके से देखता। दीदी को शायद पता था लेकिन वो कुछ नहीं कहतीं।
धीरे-धीरे मैंने सोचा कि दीदी को चोदना है। एक दिन मौका मिला। मम्मी-पापा फिर गांव गए। मैंने दीदी से कहा कि रात को छत पर सोएंगे। दीदी मान गईं। दीदी की चुदाई देखी
रात को हम छत पर थे। मैंने बात शुरू की। ‘दीदी, मुझे सब पता है। राहुल भैया वाली रात।’ दीदी चौंक गईं। ‘क्या?’ मैंने कहा, ‘मैंने देख लिया था।’
दीदी शर्मा गईं। फिर बोलीं, ‘तो तूने देखा? और कुछ नहीं किया?’ मैंने कहा, ‘दीदी, मैं भी चाहता हूं।’ दीदी हंस पड़ीं। ‘पागल हो गया है क्या?’ दीदी की चुदाई
मैंने उनके हाथ पकड़े। ‘दीदी, प्लीज। मैं तुझे बहुत चाहता हूं।’ दीदी ने देखा मेरा लंड खड़ा है। बोलीं, ‘अच्छा, तो इतना बड़ा हो गया है तेरा लौड़ा।’
दीदी ने मेरे कपड़े उतारे। मेरा लंड बाहर आया। दीदी ने हाथ में पकड़ा। ‘वाह, मोटा है।’ फिर मुंह में लिया। चूसने लगीं। ग्ग्ग्ग… गोंग… मैं आनंद में डूब गया।
मैंने दीदी को नंगा किया। उनके बूब्स चूसे। चूत चाटी। दीदी तड़प रही थीं। ‘भाई, अब डाल दे।’ मैंने लंड चूत पर रखा। धीरे से अंदर डाला। दीदी आह्ह्ह… कर रही थीं।
फिर जोर-जोर से चोदने लगा। ठपठप… चपचप… दीदी चिल्ला रही थीं, ‘हां भाई… चोद… जोर से… मेरी चूत तेरी है… चुदवाती हूं…’
मैंने कई पोजीशन में चोदा। मिशनरी, डॉगी, ऊपर बैठकर। दीदी कई बार झड़ीं। आखिर मैंने भी वीर्य चूत में छोड़ दिया।
उस रात से हम दोनों रोज चुदाई करते। दीदी मेरी चुदक्कड़ बन गईं। कभी छत पर, कभी कमरे में। मैंने दीदी को पूरी तरह चोद लिया।
अब भी जब मौका मिलता है, हम चुदाई करते हैं। दीदी कहती हैं, ‘भाई, तेरा लंड सबसे अच्छा है।’
यह मेरी जिंदगी की सबसे गुप्त और मजेदार कहानी है। मैं कभी नहीं भूल सकता। दीदी की चुदाई
यह मेरी असली कहानी है। क्या आपको लगता है मैंने सही किया? कृपया अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। अगर आपकी भी ऐसी कोई अनोखी अनुभव है तो शेयर करें।”
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